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661 करोड़ बैंक घोटाले के आरोपित विक्रम वधवा को होटल ले जाने का मामला

Kavita2
3 Oct 2026 3:02 PM IST
661 करोड़ बैंक घोटाले के आरोपित विक्रम वधवा को होटल ले जाने का मामला
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चंडीगढ़। हरियाणा और चंडीगढ़ से जुड़े चर्चित 661 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोपित रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा को जेल से निकालकर होटल ले जाने के मामले में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने इस मामले में दो पुलिसकर्मियों समेत पांच आरोपितों के खिलाफ चालान पेश किया है। आरोप पत्र में सब-इंस्पेक्टर जगमेहर सिंह, एएसआई सुरिंदर सिंह, जेल में बंद विचाराधीन कैदी विक्रम वधवा और उसके बेटे करण वधवा तथा कुणाल वधवा को आरोपित बनाया गया है।

पुलिस के मुताबिक, सभी आरोपितों को मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यह पूरा मामला उस समय सामने आया था, जब विक्रम वधवा को मेडिकल जांच के लिए जेल से अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि मेडिकल जांच पूरी होने के बाद उसे वापस जेल ले जाने के बजाय सेक्टर-17 के एक होटल में पहुंचाया गया, जहां उसके दोनों बेटे भी मौजूद थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने होटल में छापेमारी कर सभी को पकड़ लिया था।

मेडिकल जांच के बहाने जेल से निकला था वधवा

विक्रम वधवा उस समय मॉडल जेल, बुरैल में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद था। पुलिसकर्मी जगमेहर सिंह और एएसआई सुरिंदर सिंह को उसे सरकारी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, सेक्टर-16 में मेडिकल जांच के लिए ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि अस्पताल में जांच पूरी होने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों ने वधवा को वापस जेल नहीं पहुंचाया।

पुलिस जांच के अनुसार, दोनों पुलिसकर्मी उसे सेक्टर-17 स्थित सिटी होटल ले गए। वहां वधवा के दोनों बेटे करण और कुणाल भी पहुंचे हुए थे। पुलिस ने दावा किया था कि यह सब एक पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा था और वधवा को कानूनी हिरासत से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी।

होटल में छापेमारी के बाद खुला मामला

पुलिस को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी एक सूचना के जरिए मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने सेक्टर-17 के होटल पर छापेमारी की। वहां विक्रम वधवा के साथ उसके दोनों बेटे और दोनों पुलिसकर्मी मिले। सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

चंडीगढ़ पुलिस की ओर से जारी मामले के संक्षिप्त विवरण में कहा गया था कि पुलिसकर्मियों को वधवा को मेडिकल जांच के बाद जेल में वापस जमा कराने का आदेश था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आरोप है कि इसके बजाय उसे होटल ले जाया गया, जहां से उसके फरार होने की कथित योजना थी।

पांच लोगों को बनाया गया आरोपित

सेक्टर-17 थाना पुलिस की ओर से दाखिल चालान में पांच लोगों को आरोपित बनाया गया है। इनमें सब-इंस्पेक्टर जगमेहर सिंह, एएसआई सुरिंदर सिंह, विक्रम वधवा, करण वधवा और कुणाल वधवा शामिल हैं।

मामले में पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के अलावा भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस का आरोप था कि वधवा और उसके बेटों ने दोनों पुलिस अधिकारियों को कथित रूप से अनुचित लाभ या इनाम का प्रलोभन दिया, ताकि वधवा को वैध हिरासत से बाहर निकाला जा सके।

अब चालान दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। अदालत आरोप पत्र में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

पहले भी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे

मामले में गिरफ्तारी के बाद चंडीगढ़ की एक अदालत ने पुलिसकर्मी जगमेहर सिंह और सुरिंदर सिंह के साथ विक्रम वधवा के दोनों बेटों करण और कुणाल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। विक्रम वधवा पहले से ही दूसरे आपराधिक मामलों में न्यायिक हिरासत में था। बाद में इस मामले में भी उसकी औपचारिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया अपनाई गई।

पुलिस के अनुसार, दोनों पुलिसकर्मी उस समय पुलिस लाइंस, सेक्टर-26 में तैनात थे और उन्हें वधवा की मेडिकल जांच कराने के लिए लगाया गया था। इसी ड्यूटी के दौरान कथित तौर पर पूरा घटनाक्रम हुआ।

विक्रम वधवा पर 661 करोड़ के घोटाले का आरोप

विक्रम वधवा चंडीगढ़ का रियल एस्टेट कारोबारी और होटल व्यवसायी है। वह IDFC First Bank से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में प्रमुख आरोपितों में शामिल है। जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों, चंडीगढ़ प्रशासन, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और अन्य सरकारी संस्थाओं से जुड़े धन के कथित दुरुपयोग की जांच की जा रही है।

सीबीआई ने जून 2026 में इस व्यापक मामले से जुड़े अलग-अलग मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी। एक मामले में विक्रम वधवा को भी आरोपित बनाया गया था। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी से जुड़े मामले में भी उसका नाम आरोप पत्र में शामिल किया गया था।

मामला अब कोर्ट में

होटल ले जाने के मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद चालान दाखिल किया है। आरोप पत्र में पुलिसकर्मियों और वधवा के दोनों बेटों की भूमिका को भी शामिल किया गया है। अब अदालत में इस मामले से जुड़े साक्ष्यों, पुलिस की जांच और आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

मामले की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित साजिश किस स्तर तक थी, पुलिसकर्मियों और वधवा के परिवार के बीच क्या संपर्क था और होटल तक पहुंचने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था। पुलिस ने अपनी जांच में इसे हिरासत से बाहर निकालने की कथित योजना बताया है, लेकिन इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

चंडीगढ़ पुलिस के लिए भी गंभीर मामला

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें आरोप पुलिसकर्मियों पर ही लगे हैं। किसी विचाराधीन कैदी को मेडिकल जांच के बाद निर्धारित नियमों के तहत वापस जेल पहुंचाना सुरक्षा और हिरासत प्रबंधन की मूल जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में वधवा को कथित रूप से होटल ले जाने की घटना ने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए थे।

पुलिस अधिकारियों ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मियों को गिरफ्तार किया और जांच आगे बढ़ाई। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस मामले में अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

आगे क्या होगा

चालान पेश होने के बाद अदालत आरोपों और साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। इसके बाद मामले में आरोप तय करने और सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि आरोपितों ने कानून के तहत लगाए गए अपराध किए, जबकि आरोपितों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि विक्रम वधवा को जेल से मेडिकल जांच के बाद होटल ले जाने के मामले में पुलिस ने दो पुलिसकर्मियों समेत पांच लोगों के खिलाफ चालान दाखिल कर दिया है। आरोप पत्र में सब-इंस्पेक्टर जगमेहर सिंह, एएसआई सुरिंदर सिंह, विक्रम वधवा और उसके दोनों बेटे करण व कुणाल वधवा शामिल हैं। पुलिस ने सभी को इस मामले में गिरफ्तार किया था।

विक्रम वधवा से जुड़ा मूल IDFC बैंक घोटाला भी अलग से जांच के दायरे में है और सीबीआई पहले ही इस व्यापक वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामलों में कई आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।

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