
पंजाब को नशामुक्त बनाने की लड़ाई तेज करने का आह्वान, शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से मांगा सहयोग
चंडीगढ़। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चिंता जताते हुए राज्य के लोगों से इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने होंगे। चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में पंजाब के लोगों से नशामुक्त राज्य के निर्माण के लिए आगे आने की अपील की।
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में कहा कि पंजाब नशे की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है और इसकी वजह से कई परिवार प्रभावित हुए हैं। विशेष रूप से युवाओं के जीवन और भविष्य पर नशे का गंभीर असर पड़ने की बात कहते हुए उन्होंने इसे केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती के रूप में उठाया। उन्होंने पंजाब के लोगों से इस समस्या के खिलाफ एकजुट होने और नशामुक्त समाज बनाने के प्रयासों में भागीदारी करने को कहा।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से पंजाब में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ आयोजित की जा रही है। यह अभियान 18 सितंबर से शुरू हुआ है और 30 सितंबर तक चलने का कार्यक्रम है। पार्टी के मुताबिक यात्रा के जरिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और इस मुद्दे को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा चार अलग-अलग स्थानों से निकाली जा रही है और राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की योजना है।
शिवराज सिंह चौहान 21 सितंबर को तलवंडी साबो स्थित तख्त श्री दमदमा साहिब पहुंचेंगे। यहां मत्था टेकने के बाद वह हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ चौथी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को हरी झंडी दिखाएंगे। चौहान ने पंजाब के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं सहित सभी वर्गों से इस अभियान में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की है।
चौहान ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने में विफल रही है। उनका कहना था कि अब लोगों को स्वयं इस मुद्दे पर निर्णायक लड़ाई के लिए आगे आना चाहिए। यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है। दूसरी ओर, पंजाब की AAP सरकार लगातार दावा करती रही है कि उसने नशा तस्करी के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की है और ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ जैसे अभियान चलाए हैं।
पंजाब सरकार और भाजपा के बीच नशे के मुद्दे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा की यात्रा पर सवाल उठाते हुए केंद्र और भाजपा को घेरा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और सीमापार तस्करी रोकने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान भी हाल में दावा कर चुके हैं कि सरकार की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से पंजाब आने वाले नशीले पदार्थों की आपूर्ति में बड़ी कमी आई है। इन दावों को राजनीतिक पक्षों के अपने-अपने दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ ऐसे समय आयोजित की जा रही है जब पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी और युवाओं में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनी हुई है। भाजपा इस यात्रा के माध्यम से नशे के मुद्दे पर लोगों से सीधे संवाद करने और जनजागरूकता बढ़ाने की बात कह रही है। पार्टी का कहना है कि अभियान को केवल राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक आंदोलन का रूप देने की कोशिश की जाएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका जोर इस बात पर रहा कि युवाओं को नशे से बचाने और प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन की ओर वापस लाने के लिए परिवार तथा समाज की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने पंजाब को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई।
पंजाब में नशे का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है। एक तरफ भाजपा अपनी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के जरिए राज्यभर में अभियान चला रही है, वहीं सत्तारूढ़ AAP अपने नशा विरोधी अभियानों और पुलिस कार्रवाई को सामने रख रही है। दोनों पक्षों के दावों के बीच नशे की रोकथाम, तस्करी पर कार्रवाई, उपचार और पुनर्वास जैसे मुद्दे इस बहस के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।





