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ब्रिटिश चैरिटी 'रिप्रीव' (Reprieve) द्वारा जारी एक बयान में उनके भाई गुरप्रीत सिंह जोहल ने कहा, "पिछले नौ सालों में इतनी रुकावटें और निराशाएं आईं कि जब तक मैंने जगतार को अपनी आँखों से जेल के गेट से बाहर निकलते नहीं देखा, तब तक मुझे विश्वास करने की हिम्मत नहीं हुई।" गुरप्रीत ने आगे कहा, "लड़ाई जारी है, क्योंकि उन पर अभी भी मुकदमा चल रहा है और उन्हें उस काम के लिए मौत की सज़ा का सामना करना पड़ रहा है जो उन्होंने किया ही नहीं... हम तब तक लड़ते रहेंगे जब तक वह हमारे साथ घर वापस नहीं आ जाते।"
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने यह ज़मानत आदेश तब जारी किया जब सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में जोहल के मामलों को नए सिरे से विचार करने के लिए हाई कोर्ट वापस भेज दिया था। जोहल को 2017 में पंजाब में गिरफ़्तार किया गया था और उन पर 2016-17 के दौरान लुधियाना और जालंधर में हुई हत्याओं और हत्या की कोशिशों से जुड़े कई मामलों में आरोप लगाए गए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये हमले एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साज़िश का हिस्सा थे, जिसे कथित तौर पर KLF ने पंजाब में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए रचा था। इसके तहत RSS और हिंदू संगठनों से जुड़े नेताओं समेत कई प्रमुख लोगों को निशाना बनाया गया था। जोहल पर शूटरों में से एक होने का आरोप नहीं है। इसके बजाय, अभियोजन पक्ष का आरोप है कि वह इस साज़िश के पीछे की कथित वित्तीय और लॉजिस्टिकल चेन का हिस्सा थे और फाइनेंसर व कूरियर के तौर पर काम कर रहे थे। जांचकर्ताओं का आरोप है कि जोहल ने UK में रहने वाले KLF सहयोगी गुरशरण सिंह से मिले 3,000 यूरो पेरिस में हरमिंदर सिंह (उर्फ मिंटू) को सौंपे थे। इसके बाद यह पैसा कथित तौर पर शूटरों में से एक, हरदीप सिंह को दिया गया, ताकि साज़िश को आगे बढ़ाया जा सके और उसे हमले करने के लिए प्रेरित किया जा सके। हरदीप सिंह और रमनदीप सिंह पर ही असल में टारगेटेड हत्याओं को अंजाम देने का आरोप है। ज़मानत के लिए जोहल की लड़ाई कई कानूनी चरणों से गुज़री है। ट्रायल कोर्ट ने सात मामलों में उनकी ज़मानत अर्ज़ियां खारिज कर दी थीं। पांच अर्ज़ियां 7 सितंबर, 2022 को खारिज की गई थीं, जबकि दो अन्य 25 अप्रैल, 2024 को खारिज कर दी गई थीं।
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