पंजाब

भगवंत मान के महंगे जूते-सूट पर भाजपा का आरोप, कस्टम विवाद में बढ़ी सियासत

nidhi
22 Oct 2026 8:27 AM IST
भगवंत मान के महंगे जूते-सूट पर भाजपा का आरोप, कस्टम विवाद में बढ़ी सियासत
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ढाई लाख के जूते और लाखों के सूट का दावा
नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पेरिस से लौटने पर दिल्ली हवाई अड्डे पर कथित तौर पर रोके जाने का मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि मान अपने साथ महंगे जूते, डिजाइनर सूट और इत्र लेकर आए थे, जिनकी जानकारी सीमा शुल्क विभाग को नहीं दी गई। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री को अनावश्यक रूप से परेशान करने और राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। सामान की कीमत और घोषणा नहीं करने संबंधी दावे भाजपा के हैं; उनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने बुधवार को इस मुद्दे पर मान और आम आदमी पार्टी को घेरा। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री पेरिस से लगभग ढाई लाख रुपये के जूते, पत्नी के लिए लाखों रुपये के सूट और महंगे परफ्यूम लाए थे। भंडारी का आरोप है कि इन वस्तुओं को कस्टम के सामने घोषित नहीं किया गया। उन्होंने आप पर घटना को राजनीतिक उत्पीड़न का रूप देने का आरोप भी लगाया। हालांकि, आरोपों के समर्थन में सामान की पूरी सूची या मूल्यांकन संबंधी दस्तावेज प्रकाशित रिपोर्ट में प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
आप ने तीन घंटे रोकने और जुर्माने का किया दावा
आम आदमी पार्टी के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने दावा किया कि मान को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगभग तीन घंटे रोका गया। उनके मुताबिक, पहले सामान आने और उसकी जांच पूरी होने की बात कही गई। बाद में मुख्यमंत्री को जाने दिया गया और 50 हजार रुपये का चालान काटा गया। पन्नू ने इसे जानबूझकर की गई परेशानी बताया। यह घटनाक्रम आप की ओर से दिए गए विवरण पर आधारित है। पन्नू ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और पंजाब की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि यह सामान्य जांच से आगे बढ़कर राजनीतिक दुर्भावना का मामला है। भाजपा ने इस आरोप को खारिज करते हुए सवाल किया कि यदि सामान की जानकारी नियमानुसार दी गई थी, तो विवाद क्यों हुआ। इस तरह दोनों दल घटना की अलग व्याख्या कर रहे हैं। किसी पक्ष का राजनीतिक बयान अपने आप जांच के वास्तविक कारण का प्रमाण नहीं बनता।
यात्रा के उद्देश्य पर भी अलग-अलग बयान
भाजपा प्रवक्ता ने मान की पेरिस यात्रा को छुट्टियां मनाने से जोड़ा। इसके विपरीत, आप की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी में पंजाब के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों को बढ़ावा देने गए थे। पार्टी ने यात्रा को निवेश और व्यापारिक अवसरों से संबंधित बताया। आप नेताओं ने यह भी कहा कि विदेश यात्रा की अनुमति के मुद्दे पर न्यायालय का हस्तक्षेप हुआ था। यात्रा के उद्देश्य पर यह मतभेद अब एयरपोर्ट विवाद की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। इस संदर्भ में विदेश यात्रा और निजी खरीदारी के प्रश्न अलग हैं। किसी दौरे का आधिकारिक उद्देश्य होने से उसमें लाए गए सामान के बारे में उठे सवाल स्वतः समाप्त नहीं होते। उसी तरह महंगी वस्तुओं की खरीद का आरोप लगने भर से सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का निष्कर्ष भी नहीं निकाला जा सकता। ऐसे दावों का मूल्यांकन संबंधित खर्च, खरीद और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर ही संभव होगा। अभी सार्वजनिक बयानबाजी में इन विषयों को एक साथ उठाया जा रहा है।
अकाली दल ने भी मांगा स्पष्टीकरण
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी मुख्यमंत्री और उनके साथ आए लोगों को रोके जाने के कारणों पर सवाल उठाए। उन्होंने महंगे जूते, बेल्ट, परफ्यूम और डिजाइनर सूट से जुड़े दावे किए तथा पूछा कि कस्टम विभाग ने जुर्माना क्यों लगाया। ये भी विपक्षी नेता के आरोप हैं। संबंधित वस्तुओं की वास्तविक कीमत, उनकी संख्या और घोषणा की स्थिति का अधिकृत विवरण सामने आए बिना इन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
संजय सिंह ने केंद्र पर लगाया निशाना
आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मुख्यमंत्री को रोके जाने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। पार्टी की ओर से जारी बयान में कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए इसे पंजाब के मुख्यमंत्री का अपमान बताया गया। आप ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र का इस्तेमाल विरोधी दल की सरकार को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उन्हें पार्टी का पक्ष मानते हुए ही देखा जाना चाहिए।
कस्टम रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
इस विवाद के महत्वपूर्ण प्रश्न हैं कि किन वस्तुओं की जांच हुई, उनका विभागीय मूल्यांकन क्या था और 50 हजार रुपये की राशि किस आधार पर निर्धारित की गई। उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं होता कि संबंधित राशि का पूरा कानूनी स्वरूप क्या था। केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर उसे शुल्क, जुर्माने या किसी अन्य भुगतान की अंतिम श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा। इसी तरह सामान पकड़े जाने के आरोप को तस्करी सिद्ध हो जाने के बराबर नहीं माना जा सकता। भाजपा के ताजा आरोपों पर मान अथवा आम आदमी पार्टी की तत्काल विशिष्ट प्रतिक्रिया संबंधित समाचार विवरण में नहीं थी, हालांकि आप पहले से कार्रवाई को उत्पीड़न बता रही है। फिलहाल विवाद में आरोप और प्रत्यारोप दोनों सामने हैं। सामान की कीमत तथा कस्टम घोषणा से जुड़ी स्थिति विभाग के दस्तावेज और अधिकृत स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट होगी। तब तक ढाई लाख रुपये के जूते और लाखों के सूट की बात भाजपा के दावे के रूप में दर्ज करना ही सटीक होगा।
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