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Jalandhar.जालंधर: पंजाब के गांवों और शहरों में नशे की धड़ल्ले से हो रही बिक्री इस बात का सबूत है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल का 31 मई तक पंजाब को नशा मुक्त करने का वादा पूरी तरह से विफल हो गया है। यह बात पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद श्वेत मलिक ने आज जालंधर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कही। मलिक ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि युद्ध नशे विरुद्ध अभियान लुधियाना पश्चिम उपचुनाव से पहले राज्य सरकार द्वारा अपने वोट बैंक को भुनाने की कोशिश लग रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान बतौर मुख्यमंत्री राज्य को नशा मुक्त बनाने की अपनी पांचवीं डेडलाइन भी पूरी नहीं कर पाए। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मलिक के साथ पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया, प्रदेश भाजपा महासचिव राकेश राठौर, पूर्व विधायक शीतल अंगुराल, जालंधर नगर निगम में विपक्ष के नेता जगबीर बराड़, महासचिव मनजीत सिंह टीटू, अशोक सरीन हिक्की, राजेश कपूर और अमरजीत सिंह गोल्डी समेत अन्य मौजूद थे। मलिक ने कहा कि राज्य में बड़े ड्रग तस्करों के खिलाफ सरकार की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने से संदेह पैदा हुआ है।
पंजाब को नशा मुक्त बनाने के सीएम के वादों और समयसीमा पर टिप्पणी करते हुए श्वेत मलिक ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने 2020 से 2022 तक पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बार-बार दावा किया था कि सरकार बनते ही वे एक महीने में पंजाब से नशा खत्म कर देंगे। लेकिन 16 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले मान की पहली समयसीमा 16 अप्रैल 2022 बिना किसी बदलाव के बीत गई। मलिक ने कहा कि इसी तरह, ड्रग्स को खत्म करने के लिए बाद की समयसीमाएं - पांचवीं समयसीमा 31 मई 2025 तक - भी जमीनी स्तर पर बिना किसी बदलाव के बीत गई। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान नशे की सप्लाई चेन टूट गई थी, जिसके कारण हर जिले में नशा मुक्ति केंद्रों के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं। लेकिन 1 मार्च 2025 को नशे के खिलाफ शुरू की गई जंग के दौरान नशा मुक्ति केंद्रों के बाहर ऐसी कोई कतार नहीं लगी। इसका साफ मतलब है कि पंजाब सरकार का अभियान केवल विज्ञापनों, कार्यक्रमों और खबरों तक ही सीमित था और यह एक झूठा राजनीतिक स्टंट था, क्योंकि नशे की कोई सप्लाई चेन नहीं टूटी। उन्होंने कहा कि जब मान और केजरीवाल सत्ता में नहीं थे, तो वे कहते थे, सत्ता में बैठे अकाली और कांग्रेस के नेता नशा बेचते हैं। अगर आज भी यही फॉर्मूला लागू होता है, तो सीएम, मंत्री, विधायक और आप नेता नशे और तस्करों के बारे में चुप क्यों हैं।
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