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पंजाब चुनाव के लिए भाजपा ने तेज की तैयारी, सैनी बोले- हमारा गठबंधन सिर्फ जनता के साथ

Kavita2
27 Sept 2026 10:25 AM IST
पंजाब चुनाव के लिए भाजपा ने तेज की तैयारी, सैनी बोले- हमारा गठबंधन सिर्फ जनता के साथ
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चंडीगढ़। पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ सामाजिक समीकरण साधने और राज्य के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से शिरोमणि अकाली दल के साथ चुनावी गठबंधन की संभावना से इनकार करते हुए सभी 117 विधानसभा सीटों पर तैयारी करने की बात कह रहे हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी कहा है कि पंजाब में भाजपा का गठबंधन केवल राज्य की जनता के साथ है।

पंजाब विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं और इसे देखते हुए भाजपा के केंद्रीय तथा पड़ोसी राज्यों के नेता लगातार पंजाब में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। पार्टी की रणनीति संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के साथ उन सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की है, जहां पहले उसका प्रभाव सीमित रहा है। हाल के महीनों में पार्टी ने कई नेताओं को अपने साथ जोड़ा है और संगठनात्मक बैठकों के जरिए चुनावी तैयारियों को गति दी है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंजाब में भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अकाली दल के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए सवालों पर सैनी ने सार्वजनिक रूप से ऐसी संभावना को खारिज किया है। उनका कहना है कि भाजपा का गठबंधन पंजाब की जनता के साथ है। हालांकि मीडिया रिपोर्टों में दोनों दलों के बीच संभावित तालमेल को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चाओं का दावा भी किया गया है। ऐसे में सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक अटकलों के बीच गठबंधन का सवाल अभी चर्चा में बना हुआ है।

भाजपा की चुनावी तैयारियों में संगठन विस्तार एक प्रमुख हिस्सा है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने अगस्त में पंजाब दौरे के दौरान प्रदेश इकाई को सभी 117 विधानसभा सीटों पर तैयारी करने का संदेश दिया था। अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित बैठकों में बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया।

पार्टी सामाजिक समीकरणों को भी ध्यान में रखकर अपनी रणनीति आगे बढ़ा रही है। पंजाब में अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी को देखते हुए भाजपा इस वर्ग तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके अलावा युवा मतदाताओं, ग्रामीण क्षेत्रों और उन इलाकों में संगठन विस्तार की तैयारी है, जहां भाजपा परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत कमजोर रही है।

पंजाब में भाजपा लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल की सहयोगी रही थी। दोनों दलों का गठबंधन सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। अब 2027 के चुनाव से पहले दोनों दलों के संभावित गठबंधन को लेकर समय-समय पर अटकलें सामने आती रही हैं।

हालांकि भाजपा के कई वरिष्ठ नेता लगातार अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी का संदेश दे रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व की ओर से भी सभी 117 सीटों पर संगठन को तैयार करने की बात कही गई है। पार्टी की मौजूदा गतिविधियां भी इसी दिशा में दिखाई देती हैं, जिसमें संगठन विस्तार, नए नेताओं को जोड़ना और बूथ स्तर की तैयारी शामिल है।

हाल के दिनों में पंजाब के अलग-अलग राजनीतिक परिवारों से जुड़े कई नेताओं के भाजपा में शामिल होने को भी पार्टी की चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के रिश्तेदार और लंबे समय तक उनके राजनीतिक सलाहकार रहे मेजर सेवानिवृत्त भूपिंदर सिंह ढिल्लों भी भाजपा में शामिल हुए। उनके साथ अन्य नेताओं की एंट्री ने पार्टी की पंजाब में संगठन विस्तार की कोशिशों को चर्चा में ला दिया।

भाजपा चुनाव से पहले राज्य में विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक अभियान भी चला रही है। नशे के मुद्दे को लेकर पार्टी ने सितंबर में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की, जिसमें चार अलग-अलग यात्राओं के माध्यम से राज्य के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की योजना बनाई गई। इन यात्राओं का समापन 30 सितंबर को जालंधर में होना निर्धारित है।

पार्टी पंजाब में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, नशे और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को भी अपने राजनीतिक अभियान में प्रमुखता देने की तैयारी कर रही है। भाजपा की ओर से इन विषयों पर आम आदमी पार्टी सरकार की आलोचना की जा रही है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए पूर्व अकाली-भाजपा सरकार के रिकॉर्ड पर सवाल उठाते रहे हैं।

हरियाणा के भाजपा नेताओं की पंजाब में बढ़ती सक्रियता भी चुनावी तैयारियों का हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि हरियाणा में संगठन और चुनाव प्रबंधन से मिले अनुभव का उपयोग पंजाब में संगठन मजबूत करने के लिए किया जाएगा। हरियाणा भाजपा के पूर्व प्रभारी सतीश पूनिया ने भी हरियाणा के अनुभवों से सीख लेकर पंजाब में पार्टी को मजबूत करने की बात कही है।

पंजाब में भाजपा के सामने शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में अपना आधार बढ़ाने की चुनौती है। वरिष्ठ भाजपा नेता तरुण चुघ ने हाल में कहा कि पार्टी सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ा रही है।

अकाली दल के साथ गठबंधन को लेकर स्थिति फिलहाल सार्वजनिक बयानों के स्तर पर स्पष्ट दिखाई देती है कि भाजपा नेता अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कर रहे हैं। लेकिन राजनीतिक हलकों में संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। कुछ रिपोर्टों में दोनों दलों के बीच अनौपचारिक स्तर पर बातचीत होने का दावा किया गया है, जबकि सार्वजनिक तौर पर भाजपा और अकाली नेताओं ने ऐसी अटकलों को खारिज किया है।

ऐसे में आने वाले महीनों में भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों पर नजर रहेगी। पार्टी का मौजूदा जोर सभी विधानसभा क्षेत्रों में अपनी तैयारी मजबूत करने, सामाजिक समीकरण साधने और मतदाताओं तक सीधे पहुंच बनाने पर है। नायब सिंह सैनी का यह बयान कि भाजपा का गठबंधन केवल पंजाब की जनता के साथ है, पार्टी के सार्वजनिक रुख को स्पष्ट करता है। हालांकि अंतिम चुनावी समीकरण उम्मीदवारों और गठबंधन संबंधी औपचारिक फैसलों के बाद ही पूरी तरह साफ होंगे।

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