पंजाब
बायोफ्लोक के शौकीनों ने Ludhiana में भाग लिया कैपेसिटी-बिल्डिंग प्रोग्राम में
Ratna Netam
5 May 2026 4:15 PM IST

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Ludhiana.लुधियाना: शहर के वेटरनरी यूनिवर्सिटी में हाल ही में आयोजित कैपेसिटी-बिल्डिंग प्रोग्राम में पांच जिलों के बायोफ्लोक खेती के शौकीनों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से किसानों और उभरते पशुपालन उद्यमियों को बायोफ्लोक तकनीक और उन्नत प्रबंधन प्रणाली में प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। प्रोग्राम में भाग लेने वाले किसानों में लुधियाना, फरीदकोट, संगरूर, पठानकोट और रोपड़ जिले के बायोफ्लोक उत्साही शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि और जल-पालन के क्षेत्र में नवाचार और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों ने किसानों को बायोफ्लोक तकनीक के फायदे, लाभदायक प्रबंधन और उत्पादकता बढ़ाने के उपाय समझाए।
वेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और प्रोग्राम आयोजक डॉ. संदीप शर्मा ने बताया, “बायोफ्लोक प्रणाली मछली पालन में संसाधनों का अधिकतम उपयोग और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करती है। इस प्रोग्राम का मकसद किसानों को आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक ज्ञान से लैस करना है, ताकि वे उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी कर सकें।” प्रशिक्षण सत्र में किसानों को पानी की गुणवत्ता, आहार प्रबंधन, रोग नियंत्रण और बाजार में मछली की बिक्री के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया। इसके अलावा, किसानों को प्राकृतिक खाद, जैविक पद्धतियों और टिकाऊ खेती के महत्व पर भी जागरूक किया गया। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले किसान हरियाणा और पंजाब के बायोफ्लोक फॉरम और स्थानीय एसोसिएशनों के माध्यम से जुड़े। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से उन्हें व्यावहारिक अनुभव और विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन प्राप्त होता है, जो उनकी खेती को लाभदायक और टिकाऊ बनाता है।
एक किसान, रामकुमार, फरीदकोट से, ने कहा, “बायोफ्लोक के बारे में हमारी समझ अब बहुत बढ़ गई है। हम नई तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और मुनाफा बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया यह प्रशिक्षण हमारे लिए बहुत उपयोगी और प्रेरणादायक रहा।” कार्यक्रम का समापन सर्टिफिकेट वितरण और प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ। आयोजकों ने आश्वस्त किया कि ऐसे प्रोग्राम समय-समय पर आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक किसान सुधारात्मक और टिकाऊ कृषि तकनीक सीख सकें। इस कार्यक्रम ने न केवल किसानों की क्षमता बढ़ाई, बल्कि बायोफ्लोक खेती के महत्व और भविष्य के बारे में भी व्यापक जागरूकता फैलाई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से पारंपरिक मछली पालन के मॉडल में बदलाव और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
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