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चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को राज्य में रेगुलर डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) की नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार रेगुलर DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करे। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई तक इस संबंध में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा है कि अगली तारीख तक अदालत को यह बताया जाए कि रेगुलर DGP की नियुक्ति को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की दिशा में सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की गई है।
यह मामला वकील निखिल थम्मन की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए हाई कोर्ट के सामने पहुंचा। याचिका में पंजाब में लंबे समय से रेगुलर DGP की नियुक्ति नहीं होने का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पंजाब में चार साल से अधिक समय से रेगुलर DGP नियुक्त नहीं किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने और राज्य सरकार को नियमानुसार नियुक्ति करने के निर्देश देने की मांग की।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले और पुलिस प्रमुख की नियुक्ति से संबंधित दिशानिर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने तर्क रखा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्देश दे चुका है और राज्य सरकारों को उन्हीं निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
याचिकाकर्ता के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में यह व्यवस्था की गई है कि राज्य के DGP की नियुक्ति यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन यानी UPSC द्वारा सुझाए गए अधिकारियों के पैनल में से की जाए। याचिका में इसी प्रक्रिया के पालन की मांग की गई है। कहा गया कि रेगुलर DGP की नियुक्ति का मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय व्यवस्था का अनुपालन भी जरूरी है।
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप रेगुलर DGP नियुक्त करने का निर्देश देते हुए मुख्य सचिव से जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा। अब सरकार को अगली सुनवाई से पहले अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा। इस हलफनामे के जरिए अदालत को बताया जाएगा कि राज्य सरकार ने निर्देशों के बाद क्या कार्रवाई की और नियुक्ति प्रक्रिया किस स्थिति में है।
जनहित याचिका में यह मुद्दा भी प्रमुखता से रखा गया कि राज्य में चार साल से ज्यादा समय से रेगुलर DGP नहीं होने के कारण सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित नियुक्ति व्यवस्था के पालन पर सवाल खड़े होते हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया कि इस स्थिति को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार को स्पष्ट समयबद्ध निर्देश दिए जाएं।
मामले में हाई कोर्ट का ताजा निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार नियुक्ति करने की बात कही है। इसके साथ ही मुख्य सचिव से व्यक्तिगत स्तर पर अनुपालन हलफनामा मांगकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि आदेश पर की गई कार्रवाई की जानकारी अदालत के रिकॉर्ड में आए।
अब पंजाब सरकार के सामने अगली सुनवाई तक रेगुलर DGP की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है। मुख्य सचिव को 13 अक्टूबर 2026 से पहले हलफनामा दाखिल करना होगा। इसके बाद हाई कोर्ट सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और प्रस्तुत जवाब के आधार पर मामले में आगे सुनवाई करेगा।
याचिका में उठाए गए सवालों का केंद्र यही है कि राज्य के पुलिस प्रमुख की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा है कि UPSC द्वारा सुझाए गए पैनल में से रेगुलर DGP की नियुक्ति का प्रावधान पहले से स्पष्ट है और इसका पालन किया जाना आवश्यक है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब सभी की नजर पंजाब सरकार की अगली कार्रवाई पर रहेगी। अदालत ने सरकार को स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने और अगली सुनवाई तक अनुपालन की पूरी जानकारी देने को कहा है। 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में मुख्य सचिव द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि राज्य सरकार ने रेगुलर DGP की नियुक्ति को लेकर अब तक क्या कदम उठाए हैं।
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