पंजाब

13 मांगों को लेकर किसानों का बड़ा ऐलान, 5 अक्टूबर को पंजाब के सभी डीसी दफ्तरों का घेराव

Kavita2
27 Sept 2026 4:01 PM IST
13 मांगों को लेकर किसानों का बड़ा ऐलान, 5 अक्टूबर को पंजाब के सभी डीसी दफ्तरों का घेराव
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मानसा। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने अपनी 13 प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। संगठन ने 5 अक्टूबर को पंजाब के सभी डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों का घेराव करने की घोषणा की है। किसान संगठन की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करना और पंजाब की लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस लेना शामिल है। संगठन ने किसानों और उनके परिवारों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।

इस आंदोलन की घोषणा भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के ब्लॉक मानसा अध्यक्ष जगसीर सिंह जवाहरके ने गांव घरांगना में आयोजित गांव कमेटी के चुनाव के दौरान की। उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़े मुद्दों और मांगों को लेकर संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा। 5 अक्टूबर को राज्य के सभी डीसी कार्यालयों का घेराव इसी आंदोलन का हिस्सा होगा।

जगसीर सिंह जवाहरके ने लोगों से अपील की कि वे इस आंदोलन में अपने परिवारों के साथ शामिल हों। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी से केंद्र और पंजाब सरकार के सामने किसानों की मांगों को मजबूती से रखा जाएगा। संगठन की कोशिश है कि सरकारों पर मांगों के समाधान के लिए दबाव बनाया जाए।

किसान संगठन भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध कर रहा है। यूनियन नेताओं की मांग है कि इसे रद्द किया जाए। दूसरी ओर केंद्र सरकार का पक्ष इससे अलग है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फरवरी में कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों से समझौता नहीं किया गया और प्रमुख कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखा गया है।

किसान संगठन की दूसरी प्रमुख मांग पंजाब की लैंड पूलिंग पॉलिसी से जुड़ी है। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां इससे पहले भी इस नीति का विरोध करती रही है। पंजाब में संगठन के प्रदर्शनों के दौरान लैंड पूलिंग नीति और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है।

संगठन का आंदोलन केवल इन दो मांगों तक सीमित नहीं है। किसान नेताओं की ओर से किसानों और मजदूरों की कर्ज माफी, फसलों के नुकसान का मुआवजा तथा आंदोलनों के दौरान किसानों और मजदूरों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगें भी उठाई जाती रही हैं। हाल में कृषि मंत्री के साथ हुई बैठक में भी संगठन ने इन मुद्दों को सामने रखा था।

किसान संगठन का कहना है कि मांगों पर ठोस समाधान नहीं मिलने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे पहले भी पंजाब के कई जिलों में डीसी कार्यालयों के बाहर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के सदस्य धरना दे चुके हैं। सितंबर की शुरुआत में संगठन ने कई जिलों में डीसी कार्यालयों के बाहर अनिश्चितकालीन धरने शुरू किए थे।

अब 5 अक्टूबर को पूरे राज्य में डीसी कार्यालयों के घेराव की घोषणा से आंदोलन एक बार फिर तेज होने जा रहा है। संगठन ने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से इसकी तैयारियों में जुटने के लिए कहा है। किसान नेताओं का जोर आंदोलन में परिवारों की भागीदारी बढ़ाने पर भी है।

गांव घरांगना में हुई बैठक के दौरान किसान आंदोलन की रणनीति के साथ संगठनात्मक गतिविधियों पर भी चर्चा हुई। इस मौके पर गांव इकाई का सर्वसम्मति से चुनाव किया गया। बैठक की अध्यक्षता ब्लॉक अध्यक्ष जगसीर सिंह जवाहरके ने की।

गांव इकाई के चुनाव में बलजीत सिंह को अध्यक्ष चुना गया। इंद्रपाल सिंह को महासचिव और राजिंदर सिंह को खजांची की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा गुरतार सिंह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मलकीत सिंह को उपाध्यक्ष और हरदीप सिंह सेखों को संगठन सचिव चुना गया। इस मौके पर गुरदीप सिंह खोखर और सिकंदर सिंह घरांगना भी मौजूद रहे।

नई गांव इकाई के गठन के साथ संगठन ने आगामी आंदोलन के लिए ग्रामीण स्तर पर तैयारियां तेज करने का संकेत दिया है। 5 अक्टूबर के प्रस्तावित घेराव में अधिक से अधिक किसानों और उनके परिवारों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां पंजाब में किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लगातार आंदोलन करती रही है। हाल के प्रदर्शनों में व्यापार समझौते, लैंड पूलिंग, कर्ज माफी, फसल नुकसान के मुआवजे और किसानों पर दर्ज मामलों जैसे विषय प्रमुख रहे हैं।

अब संगठन ने 5 अक्टूबर को सभी डीसी कार्यालयों के घेराव की घोषणा कर अपने आंदोलन के अगले चरण का ऐलान कर दिया है। किसान नेताओं का कहना है कि उनकी 13 मांगों पर कार्रवाई के लिए केंद्र और पंजाब सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। संगठन ने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव में लोगों को आंदोलन के बारे में जानकारी देने और बड़ी संख्या में घेराव में पहुंचने की अपील की है।

5 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए आने वाले दिनों में किसान संगठन की गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। गांव स्तर पर कमेटियों के जरिए कार्यकर्ताओं को संगठित किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा और डीसी कार्यालयों का घेराव इसी रणनीति का हिस्सा है।

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