
पंजाब : कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव सचिन पायलट से प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारत भूषण आशू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में पायलट से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन की चुनौतियों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद राज्य के कई प्रमुख नेता उनसे मिल चुके हैं। इन मुलाकातों को नए प्रभारी द्वारा प्रदेश संगठन की वास्तविक स्थिति समझने और अलग-अलग नेताओं का पक्ष जानने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व ने हाल में भूपेश बघेल के स्थान पर पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी के सामने राज्य इकाई के भीतर तालमेल मजबूत करने और चुनाव के लिए साझा रणनीति तैयार करने की चुनौती है। इस बदलाव को प्रदेश संगठन के अंदर चल रहे मतभेदों को संभालने की कोशिश से जोड़कर देखा है।
भारत भूषण आशू के साथ हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस की संगठनात्मक गतिविधियों, कार्यकर्ताओं की भूमिका और चुनावी अभियान की संभावित रूपरेखा पर चर्चा होने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि आशू ने नए प्रभारी को पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी संगठन की जमीनी स्थिति से अवगत कराया। हालांकि बैठक में लिए गए किसी औपचारिक निर्णय की विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के लिए संगठन की एकजुटता सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। पार्टी पिछले चुनाव के अनुभवों से सबक लेकर उम्मीदवार चयन, क्षेत्रीय संतुलन और बूथ स्तर की तैयारियों पर समय रहते काम करना चाहती है। नए प्रभारी के सामने अलग-अलग नेताओं तथा समूहों को एक मंच पर लाकर संयुक्त चुनावी अभियान खड़ा करने की जिम्मेदारी होगी।
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। अलग-अलग नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों ने पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चा को बढ़ाया है। सचिन पायलट की नियुक्ति को इन्हीं चुनौतियों के बीच केंद्रीय नेतृत्व की ओर से संतुलन स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
पायलट ने संकेत दिया है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव किसी एक मुख्यमंत्री चेहरे को आगे रखकर नहीं, बल्कि सामूहिक नेतृत्व के आधार पर लड़ सकती है। चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला किए जाने की बात सामने आई है। इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक नाम को लेकर संभावित मतभेद से बचना और सभी वरिष्ठ नेताओं को अभियान में सक्रिय भूमिका देना माना जा रहा है। पायलट ने सामूहिक नेतृत्व के मॉडल पर चुनाव लड़ने की बात कही है।
भारत भूषण आशू पंजाब कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं और संगठन के विभिन्न स्तरों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनकी पायलट से मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आगामी चुनाव से पहले पार्टी वरिष्ठ नेताओं से प्राप्त सुझावों के आधार पर संगठनात्मक बदलाव कर सकती है। क्षेत्रीय समीकरणों और स्थानीय नेतृत्व को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण भी संभावित है।
कांग्रेस का ध्यान अब बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने पर रहने की संभावना है। इसके लिए निष्क्रिय पदाधिकारियों की पहचान, खाली पदों को भरने और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय टीम तैयार करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। पार्टी उन कार्यकर्ताओं को भी दोबारा जोड़ना चाहती है, जो आपसी विवाद या उपेक्षा के कारण संगठनात्मक गतिविधियों से दूर हो गए हैं।
बैठक में पंजाब के राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, बेरोजगारी, किसानों की मांगें, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियां आगामी चुनाव में प्रमुख विषय बन सकती हैं। कांग्रेस इन मुद्दों पर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को घेरने के लिए व्यापक कार्यक्रम तैयार कर सकती है।
सचिन पायलट ने हाल में पंजाब की आप सरकार पर प्रशासनिक विफलता के आरोप लगाते हुए सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस आगामी अभियान में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को प्रमुखता से उठा सकती है। पायलट ने आप सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पंजाब की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति का उल्लेख किया था।
कांग्रेस के लिए किसान राजनीति भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगी। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे विषय पंजाब की सियासत को लंबे समय से प्रभावित करते रहे हैं। पार्टी ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए किसान संगठनों तथा कृषि समुदाय के साथ संवाद बढ़ा सकती है।
शहरी क्षेत्रों में रोजगार, व्यापार, उद्योग और स्थानीय निकायों से जुड़े मुद्दों पर अलग रणनीति तैयार किए जाने की आवश्यकता होगी। पंजाब से उद्योगों के पलायन, छोटे कारोबारियों की परेशानी और युवाओं के विदेश जाने जैसे विषय चुनावी बहस हैं। भारत भूषण आशू जैसे नेताओं से मिलने वाली स्थानीय जानकारी पार्टी की नीतियों और प्रचार अभियान को आकार देने में उपयोगी हो सकती है।
सचिन पायलट के सामने कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की बड़ी जिम्मेदारी है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि व्यक्तिगत मतभेद चुनावी तैयारियों पर प्रभाव न डालें। इसी उद्देश्य से नए प्रभारी अलग-अलग नेताओं से व्यक्तिगत और सामूहिक बैठकें कर सकते हैं।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पायलट की नियुक्ति का स्वागत करते हुए इसे कार्यकर्ताओं के लिए नई उम्मीद बताया है। अन्य वरिष्ठ नेता भी नई दिल्ली पहुंचकर उनसे मुलाकात कर रहे हैं। इन बैठकों के बाद पायलट प्रदेश का दौरा कर जिला स्तर के पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर सकते हैं।
पार्टी आगामी चुनाव से पहले उम्मीदवारों को लेकर जमीनी सर्वेक्षण भी करा सकती है। कांग्रेस के लिए केवल वरिष्ठता के आधार पर टिकट देने के बजाय जीतने की क्षमता, स्थानीय स्वीकार्यता और संगठन में सक्रियता को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण होगा। टिकट वितरण में सामाजिक तथा क्षेत्रीय संतुलन कायम रखना भी बड़ी चुनौती रहेगी।
भारत भूषण आशू और सचिन पायलट की मुलाकात को कांग्रेस की चुनावी तैयारियों की शुरुआती कड़ी माना जा रहा है। इस दौरान हुई चर्चा का असर आने वाले दिनों में संगठनात्मक नियुक्तियों और राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखाई दे सकता है। कांग्रेस के नए प्रभारी की कोशिश होगी कि चुनाव से पहले पार्टी एकजुट दिखाई दे और जनता के सामने स्पष्ट विकल्प प्रस्तुत करे।





