पंजाब

भाखड़ा बांध का जलस्तर 37 फीट गिरा

Kavita2
29 Aug 2026 12:08 PM IST
भाखड़ा बांध का जलस्तर 37 फीट गिरा
x

नंगल। मौसम के बदलते मिजाज का असर इस बार सतलुज-ब्यास नदी तंत्र से जुड़े प्रमुख बांधों पर साफ दिखाई दे रहा है। भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड (BBMB) के 28 अगस्त के आंकड़ों के अनुसार भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर बांधों में पिछले साल की तुलना में इस बार पानी की आवक में भारी कमी दर्ज की गई है।

जलाशयों में घटते जलस्तर ने आने वाली गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में जलभराव की स्थिति बेहतर नहीं हुई तो सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

भाखड़ा बांध का जलस्तर 37 फीट नीचे

BBMB के आंकड़ों के अनुसार, भाखड़ा बांध में शुक्रवार को जलस्तर 1634.76 फीट दर्ज किया गया। जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख को जलस्तर 1671.90 फीट था।

इस तरह इस साल भाखड़ा बांध का जलस्तर पिछले वर्ष की तुलना में करीब 37.14 फीट कम है। जलस्तर में इतनी बड़ी गिरावट ने जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।

भाखड़ा बांध उत्तर भारत की जल और ऊर्जा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और अन्य क्षेत्रों को पानी और बिजली की आपूर्ति होती है।

पानी की आवक में आई कमी

इस साल मानसून के दौरान बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है। कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश और असमान वर्षा के कारण नदियों में पानी की आवक प्रभावित हुई है।

सतलुज और ब्यास नदी तंत्र में पानी की कमी का सीधा असर बांधों के जलस्तर पर पड़ा है। पिछले साल की तुलना में इस बार जलाशयों में पानी का भंडारण कम है।

अधिकारियों के अनुसार, बांधों में पानी की आवक मौसम, बारिश और ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ पिघलने जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।

पोंग और रणजीत सागर बांध भी प्रभावित

केवल भाखड़ा बांध ही नहीं, बल्कि पोंग और रणजीत सागर बांधों में भी पिछले वर्ष की तुलना में पानी की स्थिति कमजोर बताई जा रही है।

इन बांधों में कम आवक का असर पूरे नदी तंत्र पर पड़ता है। जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं होने से गर्मियों के दौरान जल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था को लेकर चुनौती पैदा हो सकती है।

गर्मियों की जल आपूर्ति को लेकर चिंता

जल विशेषज्ञों का कहना है कि बांधों में अभी से कम पानी होने का असर अगले साल गर्मियों में दिखाई दे सकता है।

गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ जाती है। उस समय कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है, जबकि शहरों में पेयजल की मांग भी बढ़ जाती है।

ऐसे में जलाशयों में पर्याप्त भंडारण होना जरूरी होता है।

बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है असर

भाखड़ा और अन्य बांधों से जल विद्युत उत्पादन भी किया जाता है। जलस्तर कम होने की स्थिति में बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, फिलहाल अधिकारियों की ओर से बिजली उत्पादन को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं जताई गई है, लेकिन भविष्य की स्थिति को देखते हुए जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

जल संरक्षण की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के बीच जल संरक्षण और बेहतर प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया है।

कम बारिश और बढ़ती पानी की मांग के बीच लोगों को पानी के उपयोग में सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही सरकार और संबंधित विभागों को जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की योजना बनानी होगी।

BBMB रख रहा है स्थिति पर नजर

भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड लगातार बांधों के जलस्तर और पानी की आवक की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों द्वारा रोजाना जलाशयों की स्थिति की समीक्षा की जाती है।

जरूरत पड़ने पर पानी के वितरण और उपयोग को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि उपलब्ध संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल किया जा सके।

आने वाले दिनों में बारिश पर निर्भर करेगी स्थिति

फिलहाल बांधों की स्थिति में सुधार काफी हद तक आने वाली बारिश पर निर्भर करेगा। अगर मानसून के अंतिम चरण में अच्छी बारिश होती है तो जलाशयों में पानी की स्थिति बेहतर हो सकती है।

लेकिन अगर बारिश कमजोर रही तो आने वाले महीनों में जल प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकता है।

भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर बांधों में घटते जलस्तर ने एक बार फिर जल संसाधनों के संरक्षण और बेहतर योजना की जरूरत को सामने ला दिया है।

Next Story