
चंडीगढ़: पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा की प्रस्तावित ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पलटवार करते हुए गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से वर्ष 2021 में बरामद की गई करीब तीन हजार किलो हेरोइन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब को नशे के नाम पर लगातार बदनाम किया जाता है, जबकि दूसरे राज्यों में मादक पदार्थों की कहीं बड़ी खेप पकड़ी गई है।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पाकिस्तान सीमा से पंजाब में आने वाली हेरोइन आमतौर पर एक-दो, पांच या 10 किलो के पैकेट में पकड़ी जाती है, लेकिन गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से करीब तीन हजार किलो की खेप बरामद हुई थी। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा पंजाब में यात्रा निकालने से पहले उस मामले और गुजरात के रास्ते होने वाली कथित तस्करी पर ध्यान क्यों नहीं देती।
मान ने कहा कि गुजरात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है। ऐसे में भाजपा को पंजाब सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने शासन वाले राज्यों में नशे की आपूर्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पंजाब पुलिस को जब भी किसी खेप या तस्करी नेटवर्क का इनपुट मिलता है तो उसकी टीमें गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित दूसरे राज्यों में जाकर कार्रवाई करती हैं।
18 सितंबर से भाजपा की चार यात्राएं
भाजपा ने 18 सितंबर से पंजाब में चार ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राएं’ निकालने की घोषणा की है। पार्टी का दावा है कि इन यात्राओं का उद्देश्य नशे के खिलाफ जनजागरूकता फैलाना और राज्य सरकार की कथित विफलताओं को जनता के सामने रखना है। चारों यात्राएं राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेंगी और लगभग चार हजार किलोमीटर की दूरी तय करेंगी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पठानकोट जिले के माधोपुर-सुजानपुर स्थित एकता स्थल से पहली यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक यात्राओं का समापन 30 सितंबर को जालंधर में एक बड़ी जनसभा के साथ होगा। इस जनसभा को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संबोधित किए जाने की संभावना है।
भाजपा नशे के साथ कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और तस्करी के मुद्दे पर भी आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि प्रदेश सरकार नशे की समस्या पर नियंत्रण पाने में सफल नहीं हुई है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया है और तस्करी की संपत्तियों तक पर कार्रवाई की जा रही है।
मान ने मुंद्रा की पुरानी बरामदगी का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री ने जिस मुंद्रा बंदरगाह की घटना का उल्लेख किया, वह सितंबर 2021 की है। राजस्व खुफिया निदेशालय ने वहां दो कंटेनरों से कुल 2,988 किलो हेरोइन बरामद की थी। सरकारी विवरण के अनुसार, 17 और 19 सितंबर 2021 को की गई जांच में यह मादक पदार्थ मिला था।
यह खेप अफगानिस्तान से चली थी और ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह के रास्ते मुंद्रा पहुंची थी। इसे कथित तौर पर अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क पत्थर की खेप के रूप में घोषित किया गया था। इसलिए इसे सीधे पाकिस्तान से मुंद्रा पहुंची खेप बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। बाद में इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने संभाली थी। नशा मुक्त यात्रा, मुंद्रा बंदरगाह, हेरोइन तस्करी, राजनीतिक पलटवार
मान ने इस पुराने मामले का उल्लेख भाजपा के नशा विरोधी अभियान की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए किया। उनका कहना था कि जब देश के किसी बंदरगाह पर हजारों किलो हेरोइन पहुंच सकती है तो नशे की समस्या को केवल पंजाब तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
सीमा और दूसरे राज्यों से जुड़ती है तस्करी की शृंखला
पंजाब की सीमा पाकिस्तान से लगी होने के कारण राज्य लंबे समय से मादक पदार्थों की सीमा पार तस्करी की चुनौती का सामना कर रहा है। ड्रोन के माध्यम से छोटे पैकेट गिराने, सीमा के पास सक्रिय स्थानीय संपर्कों और अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए नशीले पदार्थों की आपूर्ति के मामले सामने आते रहे हैं।
पंजाब सरकार का दावा है कि सीमा पार से आने वाली खेपों को पकड़ने के अलावा दूसरे राज्यों में सक्रिय आपूर्ति नेटवर्क पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि, मान द्वारा गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में की गई कार्रवाइयों के दावे का पूरा विवरण संबंधित मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर अलग से सत्यापित होना चाहिए।
नशे की तस्करी रोकना कई एजेंसियों की साझा जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की भूमिका होती है, जबकि राज्य के भीतर स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियां कार्रवाई करती हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, राजस्व खुफिया निदेशालय और राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी मामले की प्रकृति के अनुसार जांच में शामिल हो सकती हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले गरमाया मुद्दा
पंजाब में नशा लंबे समय से संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इसे राज्य सरकार के विरुद्ध प्रमुख मुद्दा बनाना चाहती है। वहीं, आम आदमी पार्टी पिछली सरकारों की नीतियों और दूसरे राज्यों से संचालित आपूर्ति नेटवर्क का उल्लेख कर विपक्षी आरोपों का जवाब दे रही है।
भगवंत मान के बयान के बाद 18 सितंबर से शुरू होने वाली भाजपा की यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। भाजपा सरकार से नशा रोकने का हिसाब मांगेगी, जबकि आप केंद्र तथा भाजपा शासित राज्यों की भूमिका पर सवाल उठाएगी। दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली चुनौती नशे की आपूर्ति रोकना, तस्करी नेटवर्क तोड़ना और प्रभावित युवाओं को उपचार तथा पुनर्वास उपलब्ध कराना है।





