
बंगला साहिब विवाद: प्रेम सिंह चंदूमाजरा करेंगे मामले की पड़ताल
चंडीगढ़/नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब में दिल्ली पुलिस के प्रवेश को लेकर विवाद के बीच शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने पूरे मामले के तथ्यों की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की ओर से एक विशेष टीम गुरुद्वारा बंगला साहिब भेजी जाएगी। यह टीम घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी जुटाएगी और तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
चंदूमाजरा ने धार्मिक स्थल से जुड़े संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देने पर चिंता जताई। उनका कहना है कि पूरी जानकारी हासिल किए बिना बयान देना या अपुष्ट बातें फैलाना समाज में भ्रम और गलतफहमी पैदा कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल की जाए और उसके बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाए।
विशेष टीम जुटाएगी घटना से जुड़े तथ्य
प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा के मुताबिक, उनकी पार्टी की विशेष टीम गुरुद्वारा बंगला साहिब जाकर घटनाक्रम की जानकारी लेगी। टीम यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि प्रदर्शन के दौरान क्या परिस्थितियां बनीं, पुलिस की भूमिका क्या रही और गुरुद्वारा परिसर में वास्तव में क्या हुआ। जांच के बाद तैयार की जाने वाली रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित होगी।
चंदूमाजरा ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में गुरुद्वारे की पवित्रता या मर्यादा के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
उनके मुताबिक, यदि दिल्ली प्रशासन या पुलिस की ओर से गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा का उल्लंघन किए जाने की बात जांच में सामने आती है, तो इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाएगा। संबंधित प्रबंधन अधिकारियों से भी उचित कदम उठाने का आग्रह किया जाएगा। हालांकि, चंदूमाजरा ने किसी पक्ष को पहले से दोषी ठहराने के बजाय तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालने पर जोर दिया है।
CEC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उठा विवाद
गुरुद्वारा बंगला साहिब से जुड़ा यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आया। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारा परिसर में शरण ली थी। इसके बाद पुलिस की भूमिका और परिसर में उसके प्रवेश को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों के गुरुद्वारा परिसर में पहुंचने के बाद पुलिस की तैनाती और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के घटनाक्रम पर चर्चा शुरू हुई। इसी बीच पुलिसकर्मियों के जूते पहनकर परिसर में प्रवेश करने से जुड़ा वीडियो भी सामने आया, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के कर्मी जूते पहनकर गुरुद्वारे में दाखिल हुए। पार्टी ने इस घटना पर सवाल उठाते हुए पुलिस के व्यवहार को लेकर आपत्ति जताई। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने वीडियो को लेकर सफाई दी कि संबंधित पुलिसकर्मी उस सामान्य रास्ते पर चल रहे थे, जिसका उपयोग श्रद्धालु गुरुद्वारे के प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए करते हैं। पुलिस के अनुसार, यह रास्ता जूते उतारने वाले स्थान तक जाता है। इस तरह पुलिस और राजनीतिक पक्षों के दावों में अंतर दिखाई दिया।
गुरुद्वारा प्रबंधन की शिकायत भी चर्चा में
इस विवाद के बीच दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने भी घटनाक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। कमेटी की ओर से आरोप लगाया गया कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने गुरुद्वारे के परिसर में राजनीतिक गतिविधियां कीं और नारे लगाए। कमेटी ने संबंधित लोगों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। कमेटी के आरोपों और आम आदमी पार्टी की ओर से पुलिस के व्यवहार पर उठाए गए सवालों के कारण मामला और संवेदनशील हो गया है। एक ओर गुरुद्वारे की मर्यादा और धार्मिक स्थल पर राजनीतिक गतिविधियों को लेकर आपत्ति जताई गई, वहीं दूसरी ओर पुलिस के प्रवेश और कार्रवाई की परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए। इन आरोपों के बीच चंदूमाजरा ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि घटना की पूरी जानकारी सामने आने से पहले किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। उनकी पार्टी की प्रस्तावित जांच का उद्देश्य भी घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करना है।
निष्पक्ष जांच पर दिया जोर
चंदूमाजरा ने कहा कि गुरुद्वारे सिख समुदाय की आस्था, विश्वास और श्रद्धा के प्रतीक हैं। ऐसे पवित्र स्थलों से जुड़े किसी भी घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए। धार्मिक भावनाओं की रक्षा करना और धार्मिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी घटना का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने से समाज में अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है। इसीलिए जरूरी है कि संबंधित पक्षों की बात सुनी जाए, पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जाए और पुष्टि किए गए तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की मांग की जाए। फिलहाल, चंदूमाजरा की ओर से घोषित विशेष टीम की जांच रिपोर्ट सामने आने का इंतजार है। रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या किसी पक्ष की भूमिका को लेकर कोई निष्कर्ष निकलता है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। अभी पुलिस के प्रवेश और गुरुद्वारे की मर्यादा से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।





