
पंजाब। पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद राज्य में खेतों में फसल अवशेष जलाने के मामले सामने आ रहे हैं। पराली जलाने की घटनाओं को लेकर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 7 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट में कुल 3307 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच भी खेतों में आग लगाने की घटनाएं पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाई हैं।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पराली जलाने की कुल 3307 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं को लेकर संबंधित स्थानों पर निरीक्षण की प्रक्रिया भी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल दर्ज मामलों में से 2903 स्थानों पर खेतों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान 1275 स्थानों पर फसल अवशेष जलाने की पुष्टि हुई है। यानी जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे स्थान मिले हैं, जहां खेतों में पराली जलाने की घटना सामने आई है।
3307 घटनाओं में 2903 स्थानों का हुआ निरीक्षण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों में पराली जलाने की घटनाओं और उनके निरीक्षण का विवरण सामने आया है। 7 नवंबर तक राज्य में कुल 3307 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 2903 मामलों में खेतों का निरीक्षण किया गया। इस तरह दर्ज घटनाओं में से अधिकांश स्थानों तक प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की टीम पहुंची और वहां की स्थिति का जायजा लिया गया।
निरीक्षण के दौरान 1275 स्थानों पर फसल अवशेष जलाने की पुष्टि होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पता चलता है कि पराली जलाने की समस्या को लेकर केवल शिकायतें या घटनाओं की जानकारी ही दर्ज नहीं हुई, बल्कि कई स्थानों पर जांच के दौरान इसकी पुष्टि भी की गई है।
वहीं, रिपोर्ट में दर्ज कुल घटनाओं और निरीक्षण किए गए स्थानों के आंकड़ों के बीच अंतर भी सामने आया है। कुल 3307 घटनाओं में से 2903 स्थानों का निरीक्षण किया गया है। ऐसे में 404 मामलों का निरीक्षण इस आंकड़े में शामिल नहीं है। हालांकि, रिपोर्ट में इन मामलों की अलग-अलग स्थिति का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
कार्रवाई के बावजूद सामने आ रहे मामले
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। खेतों में फसल अवशेष जलाने की पुष्टि होने से यह भी स्पष्ट होता है कि रोकथाम के प्रयासों के साथ-साथ निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
प्रशासन की ओर से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए संबंधित क्षेत्रों में कार्रवाई की जा रही है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के माध्यम से इन घटनाओं का रिकॉर्ड भी सामने आ रहा है। 7 नवंबर तक दर्ज 3307 घटनाएं बताती हैं कि राज्य में इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पाने की चुनौती बनी हुई है।
1275 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा उन स्थानों से जुड़ा है, जहां निरीक्षण के बाद फसल अवशेष जलाने की पुष्टि हुई है। कुल 2903 निरीक्षणों में से 1275 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि की गई। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद राज्य में पराली प्रबंधन और खेतों में फसल अवशेषों के निपटारे को लेकर चल रहे प्रयासों पर ध्यान केंद्रित हुआ है।
पराली जलाने की घटनाओं को लेकर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दर्ज मामलों की जांच और खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि केवल घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है, वहां नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है।
आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 7 नवंबर तक की रिपोर्ट ने राज्य में पराली जलाने की स्थिति को सामने रखा है। 3307 दर्ज घटनाओं में से 2903 स्थानों का निरीक्षण और 1275 मामलों में पुष्टि का आंकड़ा इस समस्या की व्यापकता को दर्शाता है। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई के बावजूद खेतों में आग लगाने की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय बना हुआ है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में जिलावार आंकड़ों, संबंधित मामलों में लगाए गए जुर्माने और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का विस्तृत विवरण शामिल नहीं है। हालांकि, सामने आए आंकड़ों से इतना स्पष्ट है कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई की जरूरत बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन घटनाओं पर कितना नियंत्रण हो पाता है, इस पर नजर रहेगी।





