
PUNJAB पंजाब : मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार, 23 अगस्त को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत पंजाब में आठ लाख से अधिक राशन कार्ड धारकों के नाम हटाने का प्रयास कर रही है। सीएम ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इसे होने नहीं देगी और केंद्र के फैसले पर सवाल उठाया। सीएम मान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि केंद्र से हाल ही में उनकी सरकार को एक रिपोर्ट मिली है, जिसमें पंजाब में 8,02,493 राशन कार्ड धारकों को NFSA के लाभ से बाहर करने की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रति परिवार औसतन चार सदस्य माने जाएँ, तो यह कदम राज्य में लगभग 32 लाख लोगों को प्रभावित करेगा। यह संख्या पंजाब की जनसंख्या के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद प्रभावित हो सकती है।
मान ने कहा कि केंद्र द्वारा अपनाए गए मानदंडों में कई तरह की विसंगतियाँ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लाभार्थियों के नाम हटाने की प्रक्रिया बिना व्यापक समीक्षा और पारदर्शिता के की जा रही है। सीएम ने यह भी बताया कि पंजाब सरकार इस विषय पर गंभीरता से काम कर रही है और राज्य के हित में हर संभव कदम उठाएगी ताकि गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ जारी रहे। राज्य सरकार का कहना है कि NFSA के तहत लाभार्थियों का नाम हटाना सीधे तौर पर लोगों की जीवन-यापन क्षमता पर असर डालता है। राशन कार्ड धारक इस योजना के माध्यम से सब्सिडी वाले अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुएँ प्राप्त करते हैं। अगर लाभ समाप्त हो जाता है, तो गरीब और जरूरतमंद परिवारों की भोजन सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस तरह के टकराव से आम जनता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह मामला केवल प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। सीएम मान ने कहा कि उनकी सरकार केन्द्र के आदेशों का विरोध करते हुए स्थानीय स्तर पर हर संभव समाधान निकालेगी और राशन कार्ड धारकों को राहत प्रदान करेगी।





