
चंडीगढ़। पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान को अब गांव और मोहल्ला स्तर पर और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। राज्य भर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान से ‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में जुड़ रही हैं और परिवारों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए जमीनी स्तर पर नेटवर्क तैयार कर रही हैं। सरकार का फोकस अब केवल नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई या नशा मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि समुदाय को सीधे जोड़कर नशे की रोकथाम पर भी जोर दिया जा रहा है।
श्री मुक्तसर साहिब जिले के मलोट में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इसी रणनीति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को परिवारों और युवाओं तक सीधे पहुंच बनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। सरकार का मानना है कि नशे की समस्या से लड़ने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और इसके साथ सामाजिक जागरूकता, परिवारों की भागीदारी और युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना भी जरूरी है।
‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में परिवारों से संवाद करेंगी। वे लोगों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान के बारे में जानकारी देंगी। साथ ही ऐसे युवाओं और परिवारों की पहचान करने में भी मदद कर सकती हैं, जिन्हें नशे की रोकथाम या पुनर्वास से जुड़ी सहायता की जरूरत है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी ताकत उनका स्थानीय समुदाय से सीधा जुड़ाव माना जा रहा है। वे नियमित रूप से महिलाओं, बच्चों और परिवारों के संपर्क में रहती हैं। ऐसे में नशे की समस्या से जुड़े शुरुआती संकेतों को समझने और परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
मलोट के कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए। इसमें गांवों, परिवारों, स्कूलों, युवाओं, खेल संगठनों और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अभियान में खेल को भी एक अहम माध्यम बनाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि युवाओं को खेल और अन्य सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर नशे से दूरी बनाने में मदद की जा सकती है। गांवों में खेल प्रतियोगिताएं, सामुदायिक कार्यक्रम और जागरूकता गतिविधियां युवाओं के बीच स्वस्थ माहौल तैयार करने की रणनीति का हिस्सा बन रही हैं।
खेल के जरिए युवाओं को अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में नशा रोकथाम के कार्यक्रमों के साथ खेल गतिविधियों को जोड़ने पर विशेष जोर है ताकि युवाओं के पास खाली समय में सकारात्मक विकल्प उपलब्ध हों।
पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रही है। राज्य सरकार ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत नशा तस्करों पर कार्रवाई के साथ पुनर्वास और रोकथाम के कार्यक्रम भी चला रही है। मौजूदा पहल इसी अभियान के सामुदायिक हिस्से को मजबूत करने की दिशा में देखी जा रही है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इस नेटवर्क में शामिल करने का उद्देश्य अभियान की पहुंच को घर-घर तक ले जाना है। किसी गांव या बस्ती में परिवारों की परिस्थितियों और स्थानीय समस्याओं को समझने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पहले से अनुभव होता है। सरकार इसी नेटवर्क का इस्तेमाल नशा विरोधी जागरूकता के लिए करना चाहती है।
कार्यकर्ताओं को यह भी बताया जा रहा है कि नशे से प्रभावित किसी व्यक्ति या परिवार से संवाद करते समय संवेदनशीलता जरूरी है। केवल सामाजिक आलोचना या डर पैदा करने के बजाय उन्हें सही सहायता और उपचार तक पहुंचाने पर जोर दिया जाना चाहिए।
नशे की समस्या कई बार परिवार के स्तर पर छिपी रहती है और लोग सामाजिक बदनामी के डर से मदद मांगने से बचते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर भरोसेमंद नेटवर्क बनने से परिवारों को शुरुआती स्तर पर सहायता मिल सकती है।
सरकार का प्रयास है कि ‘नशा मुक्ति मित्र’ ऐसे लोगों तक पहुंचें जो नशे की शुरुआत के जोखिम में हैं या जिनके परिवार पहले से इस समस्या से जूझ रहे हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य और नशा मुक्ति सेवाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
मलोट में आयोजित कार्यक्रम ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में अभियान को अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। महिला एवं बाल विकास से जुड़े कर्मचारी, स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना है।
पंजाब सरकार की योजना नशा विरोधी अभियान को ऐसी व्यवस्था में बदलने की है जिसमें गांव स्तर पर लगातार निगरानी और जागरूकता बनी रहे। केवल किसी एक दिन कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय नियमित संवाद और गतिविधियों के जरिए लोगों को जोड़े रखने पर जोर दिया जा रहा है।
आंगनवाड़ी केंद्र इस अभियान में स्थानीय जागरूकता केंद्र की भूमिका भी निभा सकते हैं। यहां महिलाओं और परिवारों तक नशे से जुड़े संदेश पहुंचाना आसान हो सकता है। परिवारों को यह भी समझाया जा सकता है कि नशे से जूझ रहे व्यक्ति को समय पर उपचार और सहयोग मिलने से स्थिति में सुधार की संभावना बढ़ती है।
अभियान में महिलाओं की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। घर और परिवार के भीतर होने वाले बदलावों को महिलाएं अक्सर सबसे पहले महसूस करती हैं। ऐसे में उन्हें नशे के शुरुआती संकेत, सहायता की प्रक्रिया और उपलब्ध सरकारी सेवाओं के बारे में जानकारी देना प्रभावी साबित हो सकता है।
सरकार का मानना है कि समुदाय की भागीदारी जितनी अधिक होगी, नशे की रोकथाम उतनी ही प्रभावी हो सकती है। यही वजह है कि अभियान में खेल, स्थानीय संगठन, पंचायत स्तर की भागीदारी और आंगनवाड़ी नेटवर्क को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मलोट का राज्य स्तरीय कार्यक्रम इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा रहा। इसमें यह संदेश दिया गया कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर हिस्से को इसमें भागीदारी करनी होगी।
फिलहाल राज्य भर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में जोड़कर एक जमीनी नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इस नेटवर्क का उद्देश्य परिवारों तक सीधे पहुंच बनाना, युवाओं को जागरूक करना और नशे के खिलाफ सामुदायिक स्तर पर रोकथाम की मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।
पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का यह चरण इस बात पर केंद्रित है कि नशे की समस्या को केवल अपराध या उपचार के नजरिए से नहीं, बल्कि सामाजिक रोकथाम के स्तर पर भी देखा जाए। खेल और सामुदायिक भागीदारी को इस रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाकर सरकार युवाओं और परिवारों को सीधे अभियान से जोड़ने की कोशिश कर रही है।





