
श्री अकाल तख्त साहिब: जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने यूके में रह रहे सिख समुदाय से अपनी धार्मिक पहचान, गुरमत मूल्यों और आपसी एकता को मजबूत करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में नई पीढ़ी को सिखी, गुरबाणी और अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना सबसे बड़ी आवश्यकता है।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने यह संदेश लंदन स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक गरीब निवाज हेज में आयोजित विशेष गुरमत समागम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम अफगानिस्तान की सिख संगत की ओर से श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब के प्रकाश पर्व को समर्पित 27वें बाला प्रीतम गुरमत समागम के रूप में आयोजित किया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में सिख संगत मौजूद रही।
अपने संबोधन में जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि जहां-जहां श्री गुरु नानक देव जी गए, वहां संगत की स्थापना हुई और आज भी दुनियाभर के गुरुद्वारे सिखों को गुरबाणी और गुरमत सिद्धांतों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में रह रहे सिख परिवारों की जिम्मेदारी है कि वे अपनी आने वाली पीढ़ियों को धर्म और संस्कृति से जोड़े रखें।
उन्होंने कहा कि विदेशों में स्थित गुरुद्वारों में होने वाले साप्ताहिक धार्मिक समागम लगातार जारी रहने चाहिए, ताकि बच्चे और युवा सिख धर्म की शिक्षाओं को समझ सकें। उन्होंने गुरबाणी कीर्तन को गुरमत संगीत परंपरा के अनुरूप करने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि गुरबाणी केवल धार्मिक पाठ नहीं बल्कि मानवता, समानता और सेवा का संदेश देती है।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी का संदेश पूरी मानवता के लिए है। सिख धर्म हमेशा समानता, भाईचारे और मानव सेवा की भावना को बढ़ावा देता है। उन्होंने विदेशों में रहने वाले सिखों से अपील की कि वे जिस देश में रह रहे हैं, वहां के कानूनों का सम्मान करें और समाज की प्रगति में सकारात्मक योगदान दें।
अपने संबोधन में उन्होंने सिखों की धार्मिक पहचान को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक सिख परिवार से अपील की कि वे अपने बच्चों के नाम के साथ ‘सिंह’ और ‘कौर’ शब्दों का प्रयोग जरूर करें। उन्होंने कहा कि यह सिख समुदाय की अलग पहचान और गौरव का प्रतीक है।
जत्थेदार ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही सिखी का वातावरण दिया जाना चाहिए। उन्हें गुरुद्वारों से जोड़ना, गुरबाणी की शिक्षा देना और सिख रीति-रिवाजों की जानकारी देना परिवारों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इससे नई पीढ़ी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर तरीके से समझ पाएगी।
उन्होंने सिख समुदाय से परिवार के साथ अधिक समय बिताने और बच्चों को सही दिशा देने का भी आह्वान किया। जत्थेदार ने कहा कि आधुनिक समय में युवा पीढ़ी कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में उन्हें अपनी जड़ों और गुरमत सिद्धांतों से जोड़ना बेहद जरूरी है।
जत्थेदार गड़गज्ज ने शस्त्रों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब द्वारा दिए गए शस्त्र आत्मरक्षा और कमजोर तथा पीड़ित लोगों की रक्षा के लिए हैं। इनका कभी भी गलत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने सभी समुदायों के साथ प्रेम, सम्मान और भाईचारे के साथ रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सिख धर्म की मूल भावना मानव सेवा और सभी के प्रति सद्भाव रखना है।
इस अवसर पर भाई गजिंदर सिंह खालसा, श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह, सिख विद्वान भाई गुरबख्श सिंह गुलशन, बाबा अमर सिंह सहित यूके और अफगानिस्तान की सिख संगत के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में सिख समुदाय के लोगों ने जत्थेदार के संदेश को ध्यानपूर्वक सुना और धार्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।





