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पंजाब चुनाव से पहले अमित शाह का बड़ा प्लान

Rajeshwari Nishad
19 Oct 2026 1:46 PM IST
पंजाब चुनाव से पहले अमित शाह का बड़ा प्लान
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चंडीगढ़: अमित शाह का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह करीब 20 दिनों के भीतर दूसरी बार पंजाब पहुंचेंगे। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। अब उनका दौरा सीधे उन परिवारों से जुड़ा है, जिनके सदस्यों की मौत को नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने से जोड़कर देखा जा रहा है।
शाह के दौरे के दौरान मानसा, संगरूर और गुरदासपुर में परिवारों से मुलाकात का कार्यक्रम है। हालांकि, यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम और मुलाकातों का क्रम अलग से जारी हो सकता है। इस दौरे को बीजेपी की पंजाब में राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने बढ़ाया विवाद
मानसा के नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मौत ने पंजाब में नशे के कारोबार और उसे रोकने की कोशिश करने वालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 13 अक्टूबर को एक विवाद के बाद उन्हें गोली मार दी गई थी। मामले में एक मेडिकल स्टोर संचालक पर आरोप लगा और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए और परिवार ने न्याय की मांग की।
झोटा को नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता था। उनकी मौत के बाद इस मामले ने राज्य की राजनीति में भी जगह बना ली। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था और नशे के अवैध कारोबार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, इस मामले की जांच और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष पुलिस तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
गुरदासपुर और संगरूर के मामलों पर भी नजर
अमित शाह गुरदासपुर में बिक्रमजीत सिंह और संगरूर में गुलजार सिंह के परिवारों से भी मुलाकात करेंगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिक्रमजीत सिंह की मौत को कथित तौर पर नशे की बिक्री का विरोध करने से जोड़ा गया है। दूसरी ओर, संगरूर के गुलजार सिंह की मौत का मामला स्थानीय राजनीतिक विवाद और नशे के मुद्दे से जुड़ा बताया गया है।
गुलजार सिंह के मामले में रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने गांव में कथित तौर पर ‘चिट्टा’ की बिक्री और आपूर्ति को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन पर दबाव बनाए जाने का आरोप सामने आया। इन घटनाओं की परिस्थितियों और उनमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है, ताकि जिम्मेदारी तय करने में तथ्यों को आधार बनाया जा सके।
गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से मांगी रिपोर्ट
इन घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार भी सक्रिय हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से हाल की मौतों और हत्याओं के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामलों की स्थिति और संबंधित कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा है।
इस कदम के बाद नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और ऐसे मामलों में प्रशासन की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं। अमित शाह ने पंजाब की आप सरकार पर नशे के कारोबार को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार और आप नेताओं ने केंद्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इन राजनीतिक आरोपों से अलग, मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण है।
चुनाव से पहले नशा बनेगा बड़ा राजनीतिक मुद्दा?
पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का अहम विषय रही है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी इस मुद्दे पर आप सरकार को घेरने की तैयारी में है। पार्टी नशे के अवैध कारोबार, युवाओं पर उसके प्रभाव और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठा रही है।
अमित शाह का पीड़ित परिवारों से मिलना बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम हो सकता है। इससे पार्टी नशे के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दिखाने और प्रभावित परिवारों के साथ खड़े होने का संदेश देना चाहती है। हालांकि, पंजाब में चुनावी समर्थन पर इस दौरे का कितना असर पड़ेगा, इसका आकलन अभी नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, आप सरकार के सामने भी नशे की आपूर्ति रोकने, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई करने और स्थानीय स्तर पर लोगों का भरोसा कायम करने की चुनौती है। नशे की समस्या का समाधान केवल राजनीतिक आरोपों से नहीं, बल्कि प्रभावी पुलिस कार्रवाई, सीमा पार तस्करी पर नियंत्रण, नशा मुक्ति सेवाओं और पुनर्वास के प्रयासों से ही संभव होगा।
परिवारों को न्याय और नशे के कारोबार पर कार्रवाई की मांग
अमित शाह का 20 अक्टूबर का पंजाब दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा और उनकी मौतों की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मानसा, संगरूर और गुरदासपुर में परिवारों से मुलाकात के दौरान इन मामलों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र और राज्य सरकार इन घटनाओं की जांच, पीड़ित परिवारों को न्याय और नशे के अवैध कारोबार पर कार्रवाई के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं। पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है, लेकिन जनता के लिए सबसे अहम परिणाम वही होगा, जिससे नशे की आपूर्ति रुके, युवाओं को इससे बचाया जा सके और अपराध के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
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