
नई दिल्ली। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान ने राज्य की राजनीति में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलों को तेज कर दिया है। अमित शाह ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि पंजाब में अगली सरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बनेगी। उनके इस बयान को भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों पार्टियों ने अभी तक गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
अमित शाह के बयान से पंजाब की राजनीति में हलचल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दिल्ली के द्वारका में यमुना नदी की सफाई और जल आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं के उद्घाटन तथा शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
इस दौरान उन्होंने पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा।
शाह ने कहा कि वह एक दिन पहले ही पंजाब में थे और वहां की जनता मौजूदा सरकार से बदलाव चाहती है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब के लोगों ने 2027 में एनडीए की सरकार बनाने का मन बना लिया है।
गृह मंत्री ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भी आम आदमी पार्टी सरकार की आलोचना की।
उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर लड़ने की तैयारी कर रही है।
क्या फिर साथ आएंगे भाजपा और अकाली दल?
पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक राजनीतिक सहयोगी रहे हैं। दोनों पार्टियों ने कई चुनाव साथ मिलकर लड़े और राज्य में गठबंधन सरकार भी चलाई।
लेकिन सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के रिश्तों में दरार आ गई थी।
शिरोमणि अकाली दल ने कृषि कानूनों का विरोध करते हुए एनडीए से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद भाजपा और अकाली दल ने अलग-अलग राजनीतिक रास्ते अपनाए।
अब लगभग छह साल बाद दोनों पार्टियों के फिर साथ आने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
अमित शाह के बयान ने इन अटकलों को और बढ़ा दिया है।
पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के हवाले से आई खबरों के अनुसार, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अनौपचारिक बातचीत चल रही है।
इसमें अकाली दल के विभिन्न गुटों को भी साथ लाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है।
पूर्व पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ पहले से अकाली दल के साथ राजनीतिक तालमेल के पक्षधर माने जाते रहे हैं।
हालांकि, गठबंधन की शर्तों, उम्मीदवारों और सीटों के बंटवारे पर अभी आधिकारिक सहमति घोषित नहीं हुई है।
सीट बंटवारे पर फंस सकता है मामला
भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन के सामने सीटों का बंटवारा एक महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है।
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। दोनों पार्टियों के राजनीतिक विस्तार और चुनावी प्राथमिकताओं को देखते हुए सीटों का वितरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा कम से कम 60 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छुक बताई जा रही है।
दूसरी ओर, अकाली दल भी अपने राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में पर्याप्त सीटें चाहता है।
इस बीच पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा है कि पार्टी सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।
ऐसे में यह स्पष्ट है कि संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
आम आदमी पार्टी पर अमित शाह का हमला
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान पंजाब की भगवंत मान सरकार पर भी निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के शासन में नशे का कारोबार बढ़ा है और राज्य सरकार इस समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाई है।
शाह ने कहा कि पंजाब की जनता मौजूदा सरकार के कामकाज से असंतुष्ट है और राजनीतिक बदलाव चाहती है।
उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की भी आलोचना की और कहा कि केवल आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के सहारे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता।
हालांकि, ये गृह मंत्री के राजनीतिक आरोप और चुनाव संबंधी दावे हैं। आगामी चुनाव में जनता का फैसला मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
अमित शाह ने कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी हमला बोला।
उन्होंने कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग और मतदान प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों की आलोचना की।
शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव हारने पर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है, जबकि जीत मिलने पर उन्हीं संस्थाओं की कार्यप्रणाली को स्वीकार करती है।
उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी टिप्पणी की और दावा किया कि पार्टी लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहेगी।
उनके इन बयानों को आगामी चुनावों से पहले भाजपा की राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
2022 के चुनाव में अलग-अलग लड़े थे दोनों दल
पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।
उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी।
कांग्रेस को 18, शिरोमणि अकाली दल को तीन और भाजपा को दो सीटें मिली थीं। बहुजन समाज पार्टी को एक सीट मिली थी, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुआ था।
चुनाव परिणामों के बाद पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव में सभी प्रमुख दल अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
गठबंधन हुआ तो बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन होने की स्थिति में राज्य में चुनावी प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बदल सकता है।
अकाली दल का पारंपरिक प्रभाव ग्रामीण और सिख बहुल क्षेत्रों में रहा है, जबकि भाजपा का संगठनात्मक आधार शहरी क्षेत्रों में विकसित हुआ है।
दोनों पार्टियों के समर्थक वर्गों और क्षेत्रीय प्रभाव में अंतर होने के कारण राजनीतिक तालमेल की संभावना पर लंबे समय से चर्चा होती रही है।
हालांकि, केवल गठबंधन बनने से चुनाव परिणाम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे, मतदाताओं की प्राथमिकताएं और अन्य दलों की रणनीति भी महत्वपूर्ण होंगी।
औपचारिक घोषणा का इंतजार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद पंजाब में भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं।
एक ओर अमित शाह ने एनडीए सरकार बनने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश भाजपा नेतृत्व अकेले चुनाव लड़ने की तैयारियों की बात कर रहा है।
ऐसे में दोनों दलों की ओर से आधिकारिक घोषणा होने तक गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया समझना जल्दबाजी होगी।
अब निगाहें भाजपा नेतृत्व, शिरोमणि अकाली दल और अन्य संभावित सहयोगियों के अगले कदम पर टिकी हैं।
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्षों पुराने सहयोगी फिर एक मंच पर आते हैं या दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं।





