
चंडीगढ़। अंबाला-कैथल मार्ग के लंबे समय से अधूरे पड़े निर्माण और सड़क की खराब हालत को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने परियोजना पूरी करने की समयसीमा तय कर दी है। प्राधिकरण ने हाई कोर्ट को बताया है कि अंबाला-कैथल सड़क परियोजना का काम मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 5 अप्रैल 2027 को होगी, जब NHAI को ताजा स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ कर रही है। यह मामला सड़क की खराब हालत और लंबे समय से अधूरे पड़े निर्माण को लेकर हाई कोर्ट द्वारा जनहित में स्वत: संज्ञान लेने के बाद शुरू हुआ था। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की आधिकारिक जानकारी के अनुसार चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा वर्तमान में अदालत का नेतृत्व कर रहे हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान खंडपीठ के सामने यह बात रखी गई थी कि अंबाला से कैथल के बीच सड़क का बड़ा हिस्सा बेहद खराब हालत में है और करीब तीन वर्षों से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। सड़क पर जगह-जगह खराब सतह, अधूरा निर्माण और यातायात से जुड़ी समस्याओं के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अदालत ने इन परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए NHAI से परियोजना की प्रगति और इसे पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा था। इसी के जवाब में प्राधिकरण ने अब मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का भरोसा दिया है।
अंबाला-कैथल मार्ग हरियाणा के महत्वपूर्ण सड़क संपर्कों में से एक है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में निजी वाहन, बसें और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में लंबे समय तक सड़क की खराब हालत न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनती है, बल्कि यातायात सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता बढ़ाती है।
NHAI से जुड़े सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड में अंबाला-कैथल सेक्शन के चार लेन निर्माण और विभिन्न स्थानों पर सुधार कार्यों से जुड़ी परियोजना भी दर्ज है। रिकॉर्ड के मुताबिक यह काम NH-152 के अंबाला-कैथल हिस्से से संबंधित है और विभिन्न स्थानों पर सुधार कार्यों के लिए भी प्रक्रिया चलाई गई है।
हाई कोर्ट की निगरानी में चल रहे इस मामले में अब मुख्य सवाल यह रहेगा कि NHAI मार्च 2027 की तय समयसीमा का पालन कर पाता है या नहीं। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 5 अप्रैल 2027 की तारीख तय की है, जिससे यह स्पष्ट है कि निर्माण पूरा होने के तुरंत बाद परियोजना की वास्तविक स्थिति का न्यायिक स्तर पर फिर आकलन किया जाएगा।
अगली सुनवाई में NHAI को ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इस रिपोर्ट में परियोजना की वास्तविक प्रगति, पूरा हो चुका काम, बचा हुआ निर्माण और सड़क की स्थिति जैसी जानकारियां शामिल होने की उम्मीद है। अदालत यह भी देख सकती है कि मार्च तक पूरा करने का जो भरोसा दिया गया है, उसका पालन किस हद तक हुआ।
सड़क परियोजनाओं में देरी का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। अधूरी सड़क पर वाहन चलाने से यात्रा का समय बढ़ता है और वाहनों की मरम्मत तथा ईंधन पर अतिरिक्त खर्च भी हो सकता है। निर्माण क्षेत्र में डायवर्जन और अधूरी लेन के कारण दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है।
अंबाला-कैथल मार्ग की हालत को लेकर भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया। अदालत ने इसे केवल ठेके या निर्माण एजेंसी के बीच का विवाद न मानते हुए सार्वजनिक हित से जुड़ा मामला माना और स्वत: संज्ञान लिया।
खंडपीठ ने पहले भी संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा था कि इतने लंबे समय तक निर्माण पूरा क्यों नहीं हुआ और सड़क की हालत सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अब NHAI की ओर से निश्चित समयसीमा दिए जाने के बाद अदालत के पास परियोजना की निगरानी के लिए एक स्पष्ट आधार है।
परियोजना पूरी होने के बाद अंबाला और कैथल के बीच यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। चार लेन मार्ग के पूरी तरह तैयार होने पर वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकती है और यात्रा का समय भी कम हो सकता है। इसके अलावा भारी वाहनों और स्थानीय यातायात के बीच बनने वाले दबाव को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि फिलहाल परियोजना का निर्माण पूरा होना बाकी है। इसलिए सड़क की मौजूदा स्थिति और अधूरे हिस्सों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना भी NHAI और प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। निर्माण पूरा होने तक संकेतक, बैरिकेडिंग, डायवर्जन और रात के समय पर्याप्त रोशनी जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।
हाई कोर्ट द्वारा मामले की लगातार निगरानी से अब संबंधित एजेंसी पर परियोजना समय पर पूरी करने का दबाव भी बढ़ गया है। मार्च 2027 तक काम पूरा करने का आश्वासन अदालत के रिकॉर्ड में आने के बाद यदि आगे कोई देरी होती है तो NHAI को उसके कारण भी स्पष्ट करने पड़ सकते हैं।
सड़क निर्माण में देरी के पीछे विभिन्न प्रशासनिक, तकनीकी या ठेके से जुड़े कारण हो सकते हैं, लेकिन अदालत का फोकस आम लोगों को सुरक्षित और बेहतर सड़क उपलब्ध कराने पर है। यही वजह है कि मामले की अगली तारीख परियोजना पूरी होने की तय समयसीमा के तुरंत बाद रखी गई है।
फिलहाल अंबाला-कैथल सड़क परियोजना के लिए मार्च 2027 की समयसीमा तय हो गई है। अब यात्रियों और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में निर्माण किस तेजी से आगे बढ़ता है। 5 अप्रैल 2027 को होने वाली अगली सुनवाई में NHAI की ताजा स्थिति रिपोर्ट से यह साफ होगा कि प्राधिकरण ने हाई कोर्ट को दिया अपना भरोसा कितना पूरा किया।





