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अमृतसर के संस्थापक श्री गुरु राम दास के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में नगर कीर्तन निकाल रहे भक्तों पर फूलों की वर्षा की गई। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) द्वारा आयोजित जुलूस अकाल तख्त साहिब पर प्रार्थना के बाद शहर की ऐतिहासिक सड़कों से गुजरा। पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को स्वर्ण मंदिर के प्रमुख ग्रंथी ज्ञानी अमरजीत सिंह ने स्वर्ण पालकी में रखा था। तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने चौर साहिब की सेवा की।
जुलूस चारदीवारी वाले शहर के ऐतिहासिक द्वारों को जोड़ने वाले मार्गों से गुजरा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जगह-जगह धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने नगर कीर्तन का स्वागत किया, वहीं श्रद्धालुओं ने पंज प्यारों व ध्वजवाहकों को सिरोपा देकर सम्मानित किया। मार्ग में लंगरों का भी आयोजन किया गया।
भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया। हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा ने धार्मिक उत्साह बढ़ा दिया। भक्तों को संबोधित करते हुए ज्ञानी अमरजीत सिंह ने इस अवसर पर शुभकामनाएं दीं और सिख समुदाय से गुरु राम दास की शिक्षाओं का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सिख को गुरु की शिक्षाओं के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए और गुरमत के सिद्धांतों के अनुसार जीवन जीना चाहिए।
ज्ञानी टेक सिंह ने भी भक्तों का अभिवादन किया और उनसे बानी (गुरु की शिक्षाएं) और बाना (सिख धार्मिक पहचान) दोनों को अपनाते हुए सिख जीवन शैली का पालन करने का आह्वान किया। इस बीच, एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गुरु राम दास का जीवन निस्वार्थ सेवा, भक्ति, विनम्रता, सहनशीलता और करुणा का प्रतीक है। धामी ने कहा कि गुरु ने अपना जीवन भक्ति, सेवा और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
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