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इस सीज़न में कई NRI (प्रवासी भारतीय) अपने घर लौट सकते हैं, और जालंधर उन जगहों में से एक है जहाँ से बड़ी संख्या में लोग विदेशों में जाकर बस गए हैं। परमिंदर सिंह कलसी (जिन्हें अब 'पाम' के नाम से जाना जाता है) ने बताया, "मुझे याद है कि 2013 में मैंने 'हॉकी इंडिया लीग' के दौरान कुछ मैच देखे थे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेल रहे थे। शायद 'वर्ल्ड हॉकी सीरीज़' का भी एक मैच देखा था। मैं नवंबर में घर आने की सोच रहा था, लेकिन इन मैचों को देखने के लिए मैंने अपना प्लान पहले ही बना लिया। यह बहुत गर्व की बात है, और यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि स्टेडियम में एंट्री बिल्कुल फ्री है। लोग टिकट के पैसे भी दे सकते थे, लेकिन आयोजकों का यह कदम खेल के प्रति उनके लगाव को दिखाता है, जो वाकई काबिले तारीफ है।"
यह उत्साह सिर्फ विदेशों से आने वाले लोगों में ही नहीं, बल्कि शहर के आम लोगों में भी देखने को मिल रहा है। स्कूली बच्चों से लेकर छोटे-बड़े व्यापारियों तक, हर कोई इस आयोजन को लेकर काफी उत्साहित है। होशियारपुर के DAV कॉलेज में हॉकी खेल चुके 45 वर्षीय ऑटो ड्राइवर तेजदीप सिंह ने कहा, "कल मैच हैं, बढ़िया हॉकी देखने को मिलेगी।"
उन्होंने आगे कहा, "वो भी क्या दिन थे जब इस स्टेडियम में खेलना एक अलग ही बात होती थी। किस्मत में कुछ और ही लिखा था, लेकिन मैं अच्छी हॉकी खेलता था। यहाँ टीमों को खेलते देखना उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए बहुत अच्छा अनुभव होगा। मैं सुबह के मैच देखने जरूर जाऊंगा, लेकिन शाम को होने वाले भारतीय टीम के मैचों के समय मैं अपना काम (ऑटो चलाना) करूंगा। आने वाले दिनों में सड़कों पर ट्रैफिक पाबंदियां होंगी, जिससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग बढ़ जाएगी।" जहाँ एक तरफ फैंस मैचों का इंतज़ार कर रहे हैं, वहीं स्थानीय प्रशासन उद्घाटन समारोह के लिए आस-पास के स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को बुलाने की योजना बना रहा है। वीआईपी (VIP) मेहमानों की देखरेख के लिए आला अधिकारी मुस्तैद हैं, स्थानीय नेता पोस्टरों के ज़रिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं, और राज्य पुलिस के अधिकारी भी यहाँ पहुँच रहे हैं ताकि पूरा आयोजन बिना किसी परेशानी के संपन्न हो सके। कुल मिलाकर, ATC जालंधर में हर तरह के लोगों को कुछ ऐसी यादें देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिन्हें वे कभी भुला नहीं पाएंगे।
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