पंजाब
Guru Hargobind के प्रवास की याद में बरार गांव में भव्य मेला और लंगर
Ratna Netam
6 May 2026 12:32 PM IST

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Punjab.पंजाब: पंजाब के बरार गांव में गुरु हरगोबिंद साहिब के ऐतिहासिक प्रवास की याद में वार्षिक मेला और लंगर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक महत्त्व रखता है बल्कि सामाजिक एकता और सेवा भाव का प्रतीक भी है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर बरार गांव पहुंचकर गुरु साहिब की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस साल भी मेले का आयोजन बड़े ही भव्य तरीके से किया गया। स्थानीय गुरुद्वारे और समुदाय ने मिलकर पूजा-अर्चना, कीर्तन, भजन और लंगर की व्यवस्था की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ऐतिहासिक लंगर था, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं को मुफ्त भोजन कराया गया। लंगर के दौरान समुदाय ने सेवा और सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया।
गुरु हरगोबिंद साहिब के बरार गांव में प्रवास को याद करने के पीछे एक विशेष ऐतिहासिक महत्व है। इतिहासकारों के अनुसार, गुरु साहिब ने इस स्थान पर आकर न केवल समाज और धर्म की सेवा की बल्कि लोगों में साहस और नैतिकता की शिक्षा भी दी। यही कारण है कि हर साल उनका यह प्रवास श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।
कार्यक्रम में उपस्थित धार्मिक विद्वानों ने कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब का जीवन सिख धर्म के आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्यों को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि लंगर और सेवा का मूल उद्देश्य समाज में समानता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल ने मेले की सुरक्षा और व्यवस्था में पूरी सावधानी बरती। यातायात, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। इसके चलते श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा-अर्चना और लंगर सेवा का लाभ उठाया।
मेला और लंगर के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इसमें कीर्तन, शास्त्रीय संगीत और स्थानीय कलाकारों के प्रदर्शन ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बच्चों और बुजुर्गों ने भी इस ऐतिहासिक आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
स्थानीय निवासी सुखदेव सिंह ने कहा, “हर साल गुरु साहिब की स्मृति में आयोजित यह मेला हमारे लिए गर्व और आध्यात्मिक आनंद का अवसर है। लंगर और सेवा का माहौल हमारे जीवन में भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करता है।”
धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के अलावा मेले में स्वास्थ्य शिविर, मुफ्त दवाइयां और जरूरतमंदों के लिए कपड़ों का वितरण भी किया गया। इससे यह कार्यक्रम केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक सेवा का प्रतीक बन गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मेले और लंगर से लोगों में न केवल आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है बल्कि समाज में सामाजिक न्याय, सेवा भाव और समुदायिक सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।
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