
लुधियाना। त्योहारों के बीच आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लगने वाला है। शहर में एक नवंबर से दूध की कीमतों में पांच रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की जाएगी। ताजपुर रोड डेयरी एसोसिएशन की बैठक में दूध के दाम बढ़ाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है। डेयरी संचालकों का कहना है कि पशुओं की बढ़ती कीमतों और दूध उत्पादन पर लगातार बढ़ रहे खर्च के कारण पुराने दामों पर कारोबार करना मुश्किल होता जा रहा है। इसी वजह से दूध की कीमतों में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है।
नई दरें लागू होने के बाद दूध खरीदने वाले परिवारों को हर महीने पहले की तुलना में अधिक पैसे खर्च करने होंगे। खासकर उन परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जहां प्रतिदिन अधिक मात्रा में दूध की खपत होती है। दूध के दाम बढ़ने से घरेलू बजट के साथ चाय, मिठाई और अन्य दूध आधारित उत्पादों की लागत भी प्रभावित हो सकती है।
एक नवंबर से लागू होंगी दूध की नई कीमतें
ताजपुर रोड डेयरी एसोसिएशन ने एक नवंबर से दूध के दाम पांच रुपये प्रति किलो बढ़ाने का निर्णय लिया है।
एसोसिएशन की बैठक में डेयरी संचालकों ने दूध उत्पादन की बढ़ती लागत पर चर्चा की।
इसके बाद कीमतों में बढ़ोतरी करने पर सहमति बनी।
नई दरें लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को प्रत्येक किलो दूध पर पांच रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।
हालांकि, दूध की मौजूदा कीमत और बढ़ोतरी के बाद निर्धारित अंतिम दर का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसलिए अलग-अलग प्रकार के दूध की नई कीमतों को लेकर आधिकारिक दर सूची का इंतजार करना होगा।
डेयरी एसोसिएशन की बैठक में हुआ फैसला
दूध की कीमतें बढ़ाने का निर्णय ताजपुर रोड डेयरी एसोसिएशन की बैठक में लिया गया।
बैठक के दौरान डेयरी संचालकों ने पशुपालन और दूध उत्पादन से जुड़े बढ़ते खर्चों का मुद्दा उठाया।
संचालकों का कहना है कि लागत में लगातार वृद्धि होने से उनके लिए पुराने दामों पर दूध उपलब्ध कराना कठिन हो रहा है।
इसी को देखते हुए एसोसिएशन ने दूध के दाम पांच रुपये प्रति किलो बढ़ाने पर सहमति जताई।
हालांकि, बैठक में कितने डेयरी संचालक शामिल हुए और कितनी डेयरियों पर नई दरें लागू होंगी, इसका स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
पशुओं की बढ़ती कीमतों को बताया कारण
डेयरी संचालकों ने दूध महंगा करने के पीछे पशुओं की बढ़ती कीमतों को प्रमुख कारण बताया है।
दूध उत्पादन के लिए गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं की खरीद और देखभाल पर खर्च करना पड़ता है।
यदि दुधारू पशुओं की कीमतें बढ़ती हैं, तो नए पशु खरीदने या पुराने पशुधन को बदलने में अधिक निवेश की आवश्यकता होती है।
डेयरी संचालकों के अनुसार, पशुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी उनके कारोबार की लागत को प्रभावित कर रही है।
हालांकि, पशुओं की कीमतों में कितने प्रतिशत वृद्धि हुई है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
दूध उत्पादन पर बढ़ रहा खर्च
डेयरी संचालकों के अनुसार, दूध उत्पादन की लागत भी लगातार बढ़ रही है।
पशुपालन में चारा, पशुओं की देखभाल, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होता है।
इनमें किसी भी मद की लागत बढ़ने पर दूध उत्पादन का कुल खर्च प्रभावित हो सकता है।
डेयरी संचालकों का कहना है कि बढ़ते खर्चों के कारण दूध के मौजूदा दाम पर्याप्त नहीं रह गए हैं।
हालांकि, उत्पादन लागत में वास्तविक वृद्धि का विस्तृत लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है।
इसलिए कीमत बढ़ाने के पीछे बताए गए कारण फिलहाल डेयरी संचालकों के पक्ष के रूप में सामने आए हैं।
आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा असर
दूध दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक खाद्य वस्तुओं में शामिल है।
अधिकांश परिवारों में दूध का उपयोग चाय, बच्चों के पोषण और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए किया जाता है।
ऐसे में दूध की कीमतों में पांच रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी का असर घरेलू खर्च पर पड़ेगा।
जो परिवार प्रतिदिन एक किलो दूध खरीदते हैं, उन्हें महीने में लगभग 150 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
वहीं, दो किलो दूध की दैनिक खपत वाले परिवारों पर 30 दिनों के हिसाब से करीब 300 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
चाय और मिठाई की लागत भी हो सकती है प्रभावित
दूध की कीमत बढ़ने से केवल घरेलू उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि दूध का व्यावसायिक उपयोग करने वाले छोटे कारोबारियों पर भी असर पड़ सकता है।
चाय की दुकानों, मिठाई बनाने वाले प्रतिष्ठानों और अन्य खाद्य कारोबारों में दूध का नियमित इस्तेमाल होता है।
यदि इन कारोबारियों को दूध अधिक कीमत पर खरीदना पड़ेगा, तो उनकी उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
हालांकि, चाय, मिठाई या दूध से बने अन्य उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
इसलिए फिलहाल इन उत्पादों के महंगे होने की बात केवल संभावित असर के रूप में देखी जा सकती है।
छोटे कारोबारियों के लिए भी चुनौती
शहर में कई छोटे दुकानदार दूध और दूध से बने उत्पादों के कारोबार पर निर्भर हैं।
ऐसे कारोबारों में कच्चे माल की कीमतों का विशेष महत्व होता है।
दूध की कीमतों में वृद्धि होने पर उन्हें अपने खर्च और बिक्री मूल्य के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है।
विशेष रूप से कम मुनाफे पर काम करने वाले छोटे कारोबारियों के लिए लागत बढ़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, बाजार में वास्तविक असर नई दरें लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या सभी डेयरियों पर लागू होंगी नई दरें?
ताजपुर रोड डेयरी एसोसिएशन की बैठक में दूध के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
लेकिन शहर की सभी डेयरियों और दूध आपूर्तिकर्ताओं पर यह फैसला लागू होगा या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
अलग-अलग डेयरियों, सहकारी संस्थाओं और पैकेटबंद दूध बेचने वाली कंपनियों की मूल्य निर्धारण व्यवस्था अलग हो सकती है।
इसलिए एसोसिएशन के फैसले को शहर में बिकने वाले हर ब्रांड के दूध पर लागू मानना उचित नहीं होगा।
उपभोक्ताओं को अपने संबंधित दूध विक्रेता से नई कीमत की जानकारी लेनी होगी।
डेयरी संचालकों और उपभोक्ताओं के सामने अलग-अलग चुनौतियां
दूध की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर डेयरी संचालकों और उपभोक्ताओं की परिस्थितियां अलग हैं।
डेयरी संचालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण कीमतों में बदलाव आवश्यक हो गया है।
वहीं, आम उपभोक्ताओं के लिए दूध महंगा होने का मतलब घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ है।
ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का असर बाजार की मांग और खरीदारी की आदतों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, नई दरें लागू होने के बाद दूध की बिक्री में कितना बदलाव होगा, इसका अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता।
एक नवंबर से उपभोक्ताओं को देना होगा अधिक पैसा
ताजपुर रोड डेयरी एसोसिएशन के फैसले के अनुसार, एक नवंबर से दूध पांच रुपये प्रति किलो महंगा हो जाएगा।
डेयरी संचालकों ने पशुओं की बढ़ती कीमतों और उत्पादन लागत में वृद्धि को इसका कारण बताया है।
नई दरों से नियमित दूध खरीदने वाले परिवारों का मासिक खर्च बढ़ेगा।
अब उपभोक्ताओं की नजर दूध की अंतिम दर सूची और स्थानीय विक्रेताओं द्वारा लागू की जाने वाली कीमतों पर रहेगी।





