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Phagwara police फगवाड़ा पुलिस ने 27 और 28 सितंबर को लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) और आस-पास के इलाकों में हुई तोड़-फोड़, संपत्ति को नुकसान, काम में रुकावट और हिंसा की घटनाओं के सिलसिले में चार अलग-अलग FIR दर्ज की हैं।
चल रही जांच के तहत, तीन लोगों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसने आगे की पूछताछ के लिए पुलिस को तीन दिन की रिमांड दी। मिली जानकारी के अनुसार, LPU कैंपस में हुई तोड़-फोड़ के मामले में 27 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 के तहत FIR नंबर 162 दर्ज की गई थी। एक और मामला, FIR नंबर 163 (28 सितंबर), फगवाड़ा के सतनामपुरा पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ BNS की धारा 326(g), 324(4) और 309(4) के साथ-साथ पंजाब प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 4 के तहत दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान, पुलिस ने तीन लोगों को फगवाड़ा कोर्ट में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMIC) हर्षवीर सिंह संधू के सामने पेश किया। इनकी पहचान सोनीपत (हरियाणा) के LPU छात्र जेम्स दहिया और फगवाड़ा के रहने वाले गगन और कमल के तौर पर हुई। पुलिस ने बताया कि गगन और कमल यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं हैं। अदालत ने आगे की जांच के लिए तीनों आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस इन घटनाओं में उनकी कथित भूमिका की जांच कर रही है और और सबूत इकट्ठा कर रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, FIR नंबर 163 में 19 लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें मोहम्मद फरहत भी शामिल है, जिसके वीडियो कथित तौर पर घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। पुलिस ने कहा कि मामले में नामजद हर व्यक्ति की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच चल रही है।
इस बीच, अज्ञात लोगों के खिलाफ सदर फगवाड़ा पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 285 और नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 की धारा 8B के तहत FIR नंबर 105 (28 सितंबर) दर्ज की गई। एक और घटनाक्रम में, सदर फगवाड़ा पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ BNS की धाराओं 109, 132, 221, 326(b), 326(g) और 324(5) के तहत 28 सितंबर को FIR नंबर 106 दर्ज की गई। पुलिस ने बताया कि यह मामला अशांति के दौरान पुलिस की गाड़ियों को कथित तौर पर जलाने से जुड़ा है। अधिकारियों ने कहा कि चल रही जांच के तहत बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सबूतों की जांच की जा रही है। पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर, ज़रूरत पड़ने पर मामलों में और कानूनी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। इन घटनाओं की जांच जारी है और पुलिस जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की उम्मीद है।
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