
चंडीगढ़। शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर 2026 का दिन चंडीगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि लेकर आया। मलोया कॉलोनी स्थित गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के साइंस टीचर रवि कुमार जायसवाल को शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभिनव प्रयोगों के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। रवि जायसवाल ने कबाड़ और बेकार सामान का उपयोग कर अपने स्कूल में ही ‘3D सीवी रमन डोम थिएटर’ और मौसम केंद्र तैयार किया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े अनुभव मिल रहे हैं।
रवि जायसवाल की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने सीमित संसाधनों को बच्चों की वैज्ञानिक शिक्षा में बाधा नहीं बनने दिया। जिन विद्यार्थियों के लिए आर्थिक कारणों से कपूरथला साइंस सिटी की शैक्षणिक यात्रा संभव नहीं थी, उनके लिए उन्होंने स्कूल को ही एक छोटी ‘साइंस सिटी’ में बदलने का प्रयास किया।
राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय सम्मान
शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में देशभर के चयनित शिक्षकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें चंडीगढ़ के रवि कुमार जायसवाल भी शामिल रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों पुरस्कार मिलने से न केवल रवि जायसवाल बल्कि उनके स्कूल और चंडीगढ़ की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी यह बड़ी उपलब्धि बन गई।
यह सम्मान उन प्रयासों को पहचान देता है जिनके माध्यम से उन्होंने विज्ञान की पढ़ाई को किताबों और कक्षा की चारदीवारी से निकालकर विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक और रोचक बनाया।
प्रधानमंत्री मोदी से भी हुई बातचीत
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह से पहले शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों से बातचीत की थी।
इस बातचीत में रवि जायसवाल भी शामिल थे। इस दौरान शिक्षकों को अपने शैक्षणिक प्रयोगों और विद्यार्थियों के लिए किए जा रहे अभिनव कार्यों को साझा करने का अवसर मिला।
एक शिक्षक के लिए राष्ट्रपति से राष्ट्रीय सम्मान मिलने के साथ प्रधानमंत्री से संवाद का अवसर मिलना उनके शैक्षणिक सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
कबाड़ से खड़ी कर दी ‘साइंस सिटी’
रवि जायसवाल के काम की सबसे खास बात उनका ‘3D सीवी रमन डोम थिएटर’ है। उन्होंने कबाड़ और अनुपयोगी सामग्री का इस्तेमाल कर इसे स्कूल में ही तैयार किया।
इसका उद्देश्य बच्चों को विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया से जीवंत तरीके से परिचित कराना था।
सामान्य तौर पर विज्ञान केंद्रों और तारामंडलों में जाकर बच्चे अंतरिक्ष, ग्रहों और वैज्ञानिक घटनाओं को दृश्य माध्यमों से समझते हैं। रवि जायसवाल ने इसी तरह का अनुभव अपने विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया।
गरीब बच्चों की परेशानी बनी प्रेरणा
इस पहल के पीछे विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति एक महत्वपूर्ण कारण बनी। स्कूल में ऐसे बच्चे भी पढ़ते हैं जिनके परिवार शैक्षणिक भ्रमण पर होने वाला अतिरिक्त खर्च वहन नहीं कर सकते।
कपूरथला साइंस सिटी की यात्रा पर नहीं जा पाने के कारण कई विद्यार्थी विज्ञान के व्यावहारिक और आकर्षक अनुभव से वंचित रह जाते थे।
इसी समस्या का समाधान निकालते हुए रवि जायसवाल ने सोचा कि जब सभी बच्चे साइंस सिटी नहीं जा सकते तो क्यों न स्कूल में ही उनके लिए विज्ञान का ऐसा वातावरण तैयार किया जाए।
स्कूल में ही अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव
3D डोम थिएटर के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष और विज्ञान की विभिन्न अवधारणाओं को समझने का अवसर मिलता है।
इस तरह की गतिविधियां बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा करने में मदद करती हैं। किताब में ग्रहों, तारों और अंतरिक्ष के बारे में पढ़ने और उन्हें दृश्य माध्यम से अनुभव करने में बड़ा अंतर होता है।
रवि जायसवाल ने इसी अंतर को कम करने की कोशिश की है ताकि विद्यार्थियों के लिए विज्ञान केवल याद करने का विषय न रहकर खोज और अनुभव का माध्यम बने।
मौसम केंद्र भी किया तैयार
3D डोम थिएटर के अलावा रवि जायसवाल ने स्कूल में मौसम केंद्र भी तैयार किया है।
इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को मौसम और उससे जुड़ी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझने का व्यावहारिक अवसर मिलता है।
मौसम में बदलाव, तापमान और पर्यावरण से संबंधित विषयों को जब बच्चे वास्तविक उपकरणों और गतिविधियों के माध्यम से समझते हैं तो उनकी वैज्ञानिक सोच और मजबूत हो सकती है।
बेकार सामान को बनाया सीखने का साधन
रवि जायसवाल का प्रयोग पर्यावरण संरक्षण और पुनः उपयोग का संदेश भी देता है। जिस सामग्री को आम तौर पर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, उसी को उन्होंने शैक्षणिक संसाधन में बदल दिया।
इससे विद्यार्थियों को यह भी सीखने का अवसर मिलता है कि रचनात्मक सोच के जरिए सीमित संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
कबाड़ से तैयार विज्ञान मॉडल और अन्य संसाधन बच्चों को नवाचार की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
पढ़ाई को रोचक बनाने की कोशिश
विज्ञान ऐसा विषय है जिसमें प्रयोग और व्यावहारिक अनुभव का विशेष महत्व है। केवल पाठ्यपुस्तकों के आधार पर कई वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझना बच्चों के लिए कठिन हो सकता है।
ऐसे में मॉडल, प्रयोग, दृश्य माध्यम और गतिविधियों से पढ़ाई को अधिक सरल और रोचक बनाया जा सकता है।
रवि जायसवाल ने इसी पद्धति को अपनाते हुए अपने विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने की कोशिश की।
सीमित संसाधन बने नवाचार की ताकत
उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि बेहतर शिक्षा के लिए हर बार महंगे उपकरणों की ही आवश्यकता नहीं होती। उपलब्ध संसाधनों का रचनात्मक इस्तेमाल भी बच्चों को बेहतर सीखने का अनुभव दे सकता है।
एक सरकारी स्कूल में कबाड़ और बेकार सामग्री से डोम थिएटर तैयार करना इसी सोच का उदाहरण है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए उनका चयन ऐसे नवाचारों को मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है।
दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा
रवि जायसवाल की उपलब्धि अन्य शिक्षकों को भी अपने विद्यालयों में स्थानीय जरूरतों के मुताबिक नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
हर स्कूल की परिस्थितियां और संसाधन अलग-अलग होते हैं, लेकिन विद्यार्थियों की समस्याओं को समझकर स्थानीय स्तर पर समाधान तैयार किए जा सकते हैं।
शिक्षक यदि बच्चों की जरूरत को केंद्र में रखकर नवाचार करें तो सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
चंडीगढ़ के लिए गौरव का मौका
रवि कुमार जायसवाल को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलना उनके स्कूल के साथ पूरे चंडीगढ़ के लिए गौरव की बात है।
मलोया कॉलोनी के सरकारी स्कूल से निकलकर उनका काम देश के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचा और शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति के हाथों उन्हें सम्मान मिला।
उनकी पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका केंद्र वे बच्चे हैं जो आर्थिक सीमाओं के कारण बड़े विज्ञान केंद्रों की यात्रा नहीं कर पाते। ऐसे बच्चों के लिए स्कूल में ही ‘साइंस सिटी’ तैयार करके रवि जायसवाल ने विज्ञान को उनके करीब पहुंचाया।
शिक्षक दिवस पर मिला राष्ट्रीय सम्मान उनके इसी प्रयास की पहचान है और यह संदेश भी देता है कि एक शिक्षक अपनी रचनात्मकता से कक्षा और विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को किस तरह बदल सकता है।





