ओडिशा

कर्नाटक में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संपर्क के शक में युवक हिरासत में

Kavita2
19 Oct 2026 11:05 AM IST
कर्नाटक में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संपर्क के शक में युवक हिरासत में
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कलबुर्गी। कर्नाटक के कलबुर्गी शहर में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से कथित संबंधों के शक में पश्चिम बंगाल के एक युवक को हिरासत में लिया गया है। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मुमताज-उल-मलिक नामक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। आरोप है कि युवक सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन से जुड़े संदिग्ध लोगों के संपर्क में था और उसने संदेशों के जरिए कुछ संवेदनशील जानकारियां साझा की थीं। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी इन आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं की है। मामला ब्रह्मपुर पुलिस थाना क्षेत्र का है।

कलबुर्गी के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस.डी. ने बताया कि युवक को शनिवार, 17 अक्टूबर की रात पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। प्रारंभिक जांच में सोशल मीडिया पर संदिग्ध संपर्कों की जानकारी सामने आई है। फिलहाल जांच एजेंसियां युवक की ऑनलाइन गतिविधियों और कथित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।

पश्चिम बंगाल का रहने वाला है संदिग्ध युवक

पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिया गया मुमताज-उल-मलिक मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। वह पिछले करीब दो वर्षों से कर्नाटक के कलबुर्गी शहर में रह रहा था।

जानकारी के मुताबिक, युवक शहर के सर्राफ बाजार इलाके में आभूषण बनाने का काम करता था। उसके साथ उसका भाई भी इसी व्यवसाय से जुड़ा हुआ था।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवक किन परिस्थितियों में संदिग्ध सोशल मीडिया खातों के संपर्क में आया और उसके द्वारा किन लोगों से बातचीत की गई।

केंद्रीय खुफिया एजेंसी की सूचना पर कार्रवाई

कर्नाटक पुलिस को केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से युवक की कथित ऑनलाइन गतिविधियों के संबंध में सूचना मिली थी।

इसके बाद स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई। शनिवार देर रात ब्रह्मपुर पुलिस थाना क्षेत्र में अभियान चलाकर युवक को हिरासत में लिया गया।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से कथित तौर पर जुड़े कुछ व्यक्तियों के संपर्क में था।

हालांकि, इन संपर्कों की वास्तविक प्रकृति और बातचीत का उद्देश्य क्या था, इसकी जांच जारी है।

दो भाइयों को लिया गया था हिरासत में

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि केंद्रीय खुफिया विभाग और राज्य पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की थी।

उन्होंने कहा कि शुरुआती सूचना के आधार पर दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया था। दोनों से पूछताछ की गई, जिसके बाद एक व्यक्ति को छोड़ दिया गया।

गृह मंत्री के अनुसार, पूछताछ में दूसरे व्यक्ति के खिलाफ संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जानकारी सामने नहीं आई थी।

वहीं, मुमताज-उल-मलिक से पूछताछ जारी रखी गई, क्योंकि उसके कथित संदिग्ध संपर्कों के बारे में जांच एजेंसियों को जानकारी मिली थी।

सोशल मीडिया पर संवेदनशील जानकारी साझा करने का शक

जांच एजेंसियों को संदेह है कि मुमताज-उल-मलिक ने सोशल मीडिया संदेशों के जरिए कुछ संवेदनशील जानकारियां साझा की थीं।

हालांकि, पुलिस ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी किस प्रकार की थी और उसका राष्ट्रीय सुरक्षा से क्या संबंध हो सकता है।

जांच अधिकारी युवक के ऑनलाइन संपर्कों, संदेशों और अन्य डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण कर रहे हैं।

इसके जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि युवक ने केवल संदिग्ध खातों से बातचीत की थी या किसी गैरकानूनी गतिविधि में उसकी वास्तविक भूमिका भी थी।

पुलिस आयुक्त ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

कलबुर्गी के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस.डी. ने बताया कि एक 19 वर्षीय युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक पूछताछ के समय युवक के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे प्राथमिकी दर्ज करने या अन्य कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया जाएगा।

इस मामले में अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में प्राथमिकी की स्थिति को लेकर अंतर सामने आया है। इसलिए पुलिस की अंतिम आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

पुलिस आयुक्त ने केंद्रीय खुफिया सूचना उपलब्ध कराने वाली एजेंसी का नाम भी सार्वजनिक नहीं किया।

मोबाइल और डिजिटल गतिविधियों की जांच

संदिग्ध युवक की डिजिटल गतिविधियां इस जांच का प्रमुख विषय बनी हुई हैं।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि युवक किन सोशल मीडिया खातों से जुड़ा था और उसके संदेशों में क्या जानकारी साझा की गई थी।

कुछ शुरुआती रिपोर्टों में डिजिटल उपकरणों से डेटा हटाए जाने की आशंका का भी उल्लेख है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।

जांच में सामने आने वाले डिजिटल साक्ष्य यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि युवक के कथित संपर्क किसी आपराधिक गतिविधि से जुड़े थे या नहीं।

गृह मंत्री बोले- मामले की गंभीरता से हो रही जांच

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

उन्होंने बताया कि जांच केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के समन्वय से की जा रही है।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि दूसरे राज्यों से लोग रोजगार की तलाश में कर्नाटक आते हैं और ऐसा करना उनका अधिकार है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि रोजगार के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को रोका नहीं जा सकता। हालांकि, सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए कर्मचारियों की पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।

कर्मचारियों के सत्यापन के लिए नई व्यवस्था की तैयारी

गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बताया कि विभिन्न व्यवसायों में काम करने वाले कर्मचारियों के पृष्ठभूमि सत्यापन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार करने की योजना है।

इसके तहत व्यापारिक प्रतिष्ठानों, ई-कॉमर्स कंपनियों और होमस्टे संचालकों के साथ बैठक करने की बात कही गई है।

सरकार का उद्देश्य सुरक्षा संबंधी जानकारी का उचित सत्यापन सुनिश्चित करना है।

हालांकि, कर्मचारियों का सत्यापन करते समय कानूनी प्रक्रियाओं और नागरिक अधिकारों का पालन करना भी आवश्यक होगा।

पहले भी सामने आ चुके हैं संदिग्ध संपर्कों के मामले

कर्नाटक में इससे पहले भी कथित आतंकी संपर्कों के संदेह में कुछ व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।

अगस्त 2026 में कलबुर्गी पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रहने वाले दो व्यक्तियों को संदिग्ध गतिविधियों के संबंध में हिरासत में लिया था।

इसके अतिरिक्त राज्य के अन्य हिस्सों में भी विदेशी संपर्कों और सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच की गई है।

हालांकि, इन अलग-अलग मामलों के बीच किसी संगठित नेटवर्क या प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी संदिग्ध युवक की भूमिका

फिलहाल मुमताज-उल-मलिक के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। केवल संदिग्ध सोशल मीडिया संपर्क के आधार पर किसी व्यक्ति को आतंकी गतिविधियों में दोषी नहीं माना जा सकता।

पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां उसके कथित संपर्कों, संदेशों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं।

आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि युवक के खिलाफ किसी अपराध के पर्याप्त साक्ष्य हैं या नहीं।

इस मामले में पुलिस की प्राथमिकता संदिग्ध गतिविधियों की वास्तविकता का पता लगाना और किसी संभावित सुरक्षा खतरे की जांच करना है।

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