ओडिशा

Odisha के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का शराबबंदी आंदोलन

Kavita2
7 April 2026 10:40 AM IST
Odisha के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का शराबबंदी आंदोलन
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Odisha ओडिशा: राज्य के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने शराब की बिक्री और सेवन के खिलाफ़ अपने विरोध को ज़ोरदार रूप दिया है। महिलाओं ने मिलकर सड़कों पर उतरकर नारे लगाए और स्थानीय प्रशासन से शराबबंदी लागू करने की मांग की।

बरगढ़ जिले के तालापदार गांव में महिलाओं के समूह ने आयोजन किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब बेचने या पीने वालों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि शराब बेचते हुए पाए जाने वाले व्यक्ति पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया जाएगा और गांव की सामाजिक गतिविधियों से उसका बहिष्कार किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने ज़िला प्रशासन को औपचारिक शिकायत भी दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि अवैध शराब के धंधे को लेकर पुलिस से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

तालापदार की महिलाओं ने कहा कि शराब के सेवन और बिक्री से गांव में घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट और सामाजिक समस्याओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द गांव में पूरी तरह से शराबबंदी लागू की जाए।

पदमपुर इलाके के घनमल गांव में भी इसी तरह की गतिविधियां देखने को मिलीं। यहां महिलाओं और ग्रामीणों ने मिलकर शराब की गतिविधियों के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि लगातार शिकायत करने के बावजूद पुलिस और स्थानीय अधिकारियों ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने गांव के अंदर अवैध शराब ठेके और बिक्री पर निगरानी बढ़ाने की मांग की।

स्थानीय महिलाओं ने बताया कि वे इस आंदोलन के जरिए अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभा रही हैं और गांव में बच्चों और युवाओं को शराब की लत से बचाने की कोशिश कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे और भी बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को तैयार हैं।

अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और शराब की अवैध बिक्री रोकने के लिए विशेष टीम गठित की जा सकती है। पुलिस और पंचायतों के बीच सहयोग बढ़ाकर गांव में शराब पर पूरी तरह से नियंत्रण करने की योजना बनाई जा रही है।

इस आंदोलन से यह स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने सामाजिक मुद्दों पर सशक्त रूप से अपनी आवाज़ उठाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ़ शराबबंदी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आगे भी वे स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहेंगे।

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