
भुवनेश्वर। ओडिशा में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को राज्य के बरगढ़, झारसुगुड़ा और सुंदरगढ़ जिलों के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। मौसम विभाग ने बताया कि राज्य के अन्य हिस्सों और पूर्वी भारत के विभिन्न क्षेत्रों से भी मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। अगले तीन से चार दिनों के दौरान ओडिशा सहित पूर्वी भारत के अन्य इलाकों से दक्षिण-पश्चिम मानसून के और पीछे हटने की संभावना है। हालांकि, मानसून की वापसी का मतलब पूरे राज्य में बारिश तत्काल बंद हो जाना नहीं है। मौसम विभाग ने कुछ जिलों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना भी जताई है।
तीन जिलों से मानसून की वापसी शुरू
मौसम विभाग की ताजा जानकारी के अनुसार, ओडिशा के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का क्रम आगे बढ़ा है।
बरगढ़, झारसुगुड़ा और सुंदरगढ़ जिलों के कुछ क्षेत्रों में मानसून की सक्रियता कम हुई है।
विभाग ने बताया कि मानसून की वापसी की रेखा अब सुंदरगढ़ और बरगढ़ से होकर गुजर रही है।
इसका अर्थ है कि मानसून धीरे-धीरे राज्य के अन्य हिस्सों से पीछे हट रहा है।
हालांकि, इन जिलों के सभी क्षेत्रों से मानसून पूरी तरह विदा होने की घोषणा नहीं की गई है।
मौसम विभाग लगातार हवा की दिशा, वातावरण में नमी और वर्षा की गतिविधियों का विश्लेषण कर रहा है।
अगले तीन से चार दिनों में और आगे बढ़ेगी वापसी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, आने वाले तीन से चार दिनों में पूर्वी भारत के और हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं।
इस अवधि में ओडिशा के अतिरिक्त क्षेत्रों से भी दक्षिण-पश्चिम मानसून पीछे हट सकता है।
मौसम की मौजूदा स्थिति संकेत दे रही है कि बारिश के प्रमुख मौसम का अंतिम चरण चल रहा है।
हालांकि, मानसून की वापसी की रफ्तार वातावरण में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगी।
यदि मौसम की परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में मानसून की वापसी की सीमा और आगे बढ़ सकती है।
देश के अन्य राज्यों से भी लौट रहा मानसून
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी केवल ओडिशा तक सीमित नहीं है।
मौसम विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र के शेष हिस्सों से भी मानसून की वापसी हो चुकी है।
इसके अलावा गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कुछ और क्षेत्रों से मानसून पीछे हट गया है।
ताजा जानकारी के अनुसार, मानसून की वापसी की रेखा सुपौल, रांची, सुंदरगढ़, बरगढ़, बीजापुर, हैदराबाद, बेलगावी और पणजी से होकर गुजर रही है।
यह स्थिति देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में मानसून की वापसी की प्रगति को दर्शाती है।
12 जून को ओडिशा पहुंचा था मानसून
वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 12 जून को ओडिशा में प्रवेश किया था।
इसके साथ ही राज्य में मानसूनी बारिश का दौर शुरू हुआ था।
जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून राज्य की कृषि गतिविधियों, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ओडिशा में खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है।
विशेष रूप से धान की खेती के लिए बारिश का समय और उसका वितरण महत्वपूर्ण होता है।
अब अक्टूबर में मानसून की वापसी शुरू होने के साथ राज्य धीरे-धीरे मानसून के बाद वाले मौसम की ओर बढ़ रहा है।
मानसून वापसी का मतलब क्या है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी एक मौसम संबंधी प्रक्रिया है।
इस दौरान किसी क्षेत्र में मानसून से जुड़ी वर्षा की गतिविधियां कम होने लगती हैं।
मौसम विभाग मानसून की वापसी घोषित करने से पहले कई परिस्थितियों का अध्ययन करता है।
इनमें लगातार शुष्क मौसम, वातावरण में नमी की कमी और हवाओं के प्रवाह में बदलाव शामिल हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मानसून की आगे की वापसी घोषित करने के लिए मौसम की निरंतरता और पर्याप्त समय तक वर्षा में कमी को भी ध्यान में रखा जाता है।
इसी आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों से मानसून के पीछे हटने की आधिकारिक घोषणा की जाती है।
मानसून लौटने के बावजूद बारिश की संभावना
ओडिशा में मानसून की वापसी शुरू होने के बाद भी कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना बनी हुई है।
मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ वर्षा की चेतावनी जारी की है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मानसून की वापसी के बाद भी स्थानीय मौसम प्रणालियां सक्रिय रह सकती हैं।
वातावरण में मौजूद नमी और अन्य मौसमी परिस्थितियों के प्रभाव से बादल बन सकते हैं।
इसलिए मानसून की वापसी को बारिश के पूरी तरह समाप्त होने के रूप में नहीं देखना चाहिए।
कई जिलों में आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट
मौसम विभाग ने 8 से 9 अक्टूबर के बीच ओडिशा के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है।
सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, संबलपुर, देवगढ़, अंगुल, ढेंकनाल, क्योंझर, मयूरभंज, सुवर्णपुर, नुआपाड़ा और बलांगीर जिलों में कुछ स्थानों पर बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
इन क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इसके अलावा बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रापाड़ा, जगतसिंहपुर और कटक में भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के आसार हैं।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण है मौसम में बदलाव
मानसून की वापसी का सीधा संबंध कृषि गतिविधियों से है।
ओडिशा में धान सहित विभिन्न खरीफ फसलों की खेती मानसून के दौरान की जाती है।
अक्टूबर में कई क्षेत्रों में फसल की वृद्धि और कटाई से पहले की तैयारियों का समय होता है।
ऐसे में बारिश में कमी और शुष्क मौसम किसानों की कृषि गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, यदि इस दौरान अचानक तेज बारिश होती है, तो खेतों में तैयार फसलों और कृषि कार्यों पर असर पड़ सकता है।
किसानों के लिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के आधार पर सिंचाई, फसल सुरक्षा और कटाई की योजना बनाना उपयोगी होगा।
पश्चिमी ओडिशा से शुरू हुआ मौसमी बदलाव
बरगढ़, झारसुगुड़ा और सुंदरगढ़ जिलों के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी राज्य में मौसम के बदलते स्वरूप का संकेत है।
पश्चिमी ओडिशा के इन क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां कम होने के साथ मौसम धीरे-धीरे शुष्क हो सकता है।
हालांकि, दिन के तापमान और रात की ठंडक में बदलाव की स्थिति स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
इसलिए अभी पूरे राज्य में तापमान घटने या ठंड बढ़ने का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
मौसम विभाग की आगामी रिपोर्ट से अलग-अलग जिलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
अक्टूबर में बदलता है मौसम का स्वरूप
अक्टूबर का महीना भारत के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का समय होता है।
इस दौरान देश के उत्तर-पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां धीरे-धीरे समाप्त होती हैं।
इसके बाद मौसम का स्वरूप बदलने लगता है।
हालांकि, देश के दक्षिणी और तटीय हिस्सों में अलग-अलग मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश जारी रह सकती है।
ओडिशा में भी बंगाल की खाड़ी से बनने वाली मौसम प्रणालियां मानसून की वापसी के बाद वर्षा का कारण बन सकती हैं।
इसलिए अक्टूबर के दौरान स्थानीय मौसम चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी है।
मौसम विभाग की चेतावनी पर ध्यान देने की सलाह
राज्य के जिन जिलों में गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है, वहां लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
तेज आंधी और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और असुरक्षित स्थानों पर खड़े होने से बचना चाहिए।
किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए।
बारिश और तेज हवाओं के दौरान सड़क पर यात्रा करने वाले लोगों को भी सतर्कता बरतनी चाहिए।
मौसम विभाग की चेतावनी का पालन करने से मौसम संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
आगामी दिनों में स्थिति होगी और स्पष्ट
ओडिशा में मानसून की वापसी को लेकर मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।
फिलहाल बरगढ़, झारसुगुड़ा और सुंदरगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून की वापसी की पुष्टि हुई है।
राज्य के अन्य क्षेत्रों से भी अगले तीन से चार दिनों में मानसून पीछे हटने की संभावना जताई गई है।
हालांकि, बारिश की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं और कई जिलों में गरज-चमक का पूर्वानुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में पूर्वी भारत के और क्षेत्रों से मानसून की विदाई होने की संभावना है। इस दौरान लोगों और किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान तथा चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।





