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ओडिशा के दिग्गज प्लेबैक सिंगर प्रणब पटनायक का निधन, 88 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

Kavita2
21 Aug 2026 1:22 PM IST
ओडिशा के दिग्गज प्लेबैक सिंगर प्रणब पटनायक का निधन, 88 साल की उम्र में ली आखिरी सांस
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भुवनेश्वर। ओडिशा के मशहूर प्लेबैक सिंगर प्रणब पटनायक का शुक्रवार को 88 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर से ओडिशा की फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय तक अपनी आवाज के जरिए ओडिया संगीत को समृद्ध करने वाले पटनायक के निधन को क्षेत्रीय संगीत की दुनिया के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

प्रणब पटनायक ओडिया संगीत की उन प्रमुख आवाजों में शामिल थे, जिन्होंने पांच दशक से अधिक लंबे करियर में फिल्मों, गैर-फिल्मी गीतों और अन्य संगीत प्रस्तुतियों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। संगीत प्रेमियों के बीच उनकी आवाज और गायकी की शैली की खास पहचान थी। उनके निधन के साथ ओडिया संगीत के एक महत्वपूर्ण दौर का अंत माना जा रहा है।

पांच दशक से अधिक लंबा रहा संगीत सफर

प्रणब पटनायक ने अपने लंबे करियर में ओडिया फिल्म संगीत के साथ-साथ अन्य संगीत विधाओं में भी काम किया। उनके कई गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच सुने जाते हैं। उपलब्ध संगीत रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने ओडिया फिल्मों और गैर-फिल्मी एलबमों के लिए कई गीत गाए।

उनकी आवाज को ओडिया संगीत की विशिष्ट पहचान वाली आवाजों में गिना जाता रहा। उनके गीतों में भावनात्मक अभिव्यक्ति और गायकी की गहराई को विशेष महत्व मिला। लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण अलग-अलग पीढ़ियों के श्रोता उनकी गायकी से जुड़े रहे।

संगीत मंच पर उनकी सक्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनके नाम से जुड़े गीत और रिकॉर्डिंग हाल के वर्षों तक संगीत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहे हैं। 2026 में भी उनका ‘Vande Utkal Janani’ सिंगल रिलीज हुआ था।

20 जनवरी 1938 को हुआ था जन्म

प्रणब पटनायक का जन्म 20 जनवरी 1938 को हुआ था। उनका परिवार भी सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा। वह ओडिशा विधानसभा के पूर्व स्पीकर दिवंगत लाल मोहन पटनायक के पुत्र थे।

पारिवारिक वातावरण का उनके व्यक्तित्व और रुचियों पर प्रभाव पड़ा। हालांकि, संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने बाकायदा प्रशिक्षण लिया और बाद में पेशेवर संगीत की ओर कदम बढ़ाया।

गुरु से ली संगीत की औपचारिक शिक्षा

प्रोफेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री में प्रवेश करने से पहले प्रणब पटनायक ने गुरु कुणाल आदिनायण के मार्गदर्शन में संगीत की औपचारिक शिक्षा ली। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपनी गायकी को लगातार निखारा और ओडिया संगीत जगत में जगह बनाई।

बाद के वर्षों में उनकी पहचान सिर्फ फिल्मी गायक के रूप में नहीं रही। उन्होंने गजल और गैर-फिल्मी संगीत में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 2017 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में स्नातक के दौरान गजल गायकी की शैली से परिचय प्राप्त किया था और उर्दू भी सीखी थी।

फिल्मों से लेकर गैर-फिल्मी संगीत तक पहचान

प्रणब पटनायक की आवाज कई ओडिया फिल्मों के गीतों में सुनाई दी। उनके नाम से जुड़े गीतों में ‘Majhire’, ‘Tume Ago Pahanti’, ‘Pahadara Sepakhe’, ‘Mote Jebe Ati Eka’ और अन्य गीत शामिल हैं। संगीत प्लेटफॉर्म पर उनके कई पुराने गीत आज भी सूचीबद्ध हैं।

ओडिया फिल्म संगीत के अलावा उन्होंने गैर-फिल्मी और गजल संगीत में भी काम किया। Saregama के रिकॉर्ड में उन्हें गायक और संगीत निर्देशक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

उनकी गायकी की खासियत यह थी कि उन्होंने समय के साथ बदलते संगीत के बीच अपनी विशिष्ट शैली को बनाए रखा। यही वजह रही कि उनका संगीत केवल एक दौर तक सीमित नहीं रहा।

ओडिया संगीत जगत में शोक

प्रणब पटनायक के निधन की खबर सामने आने के बाद ओडिशा के कला और संगीत क्षेत्र में शोक का माहौल है। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों, संगीतकारों और उनके प्रशंसकों के लिए यह बड़ी क्षति है।

पटनायक की पीढ़ी के कलाकारों ने ओडिया फिल्म संगीत को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उस दौर में सीमित तकनीकी संसाधनों के बावजूद गायकों ने अपनी आवाज और प्रस्तुति के दम पर गीतों को लोगों तक पहुंचाया।

नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा

प्रणब पटनायक सिर्फ अपने गीतों के लिए ही नहीं, बल्कि संगीत के प्रति अपने समर्पण के लिए भी याद किए जाएंगे। एक साक्षात्कार में उन्होंने युवा गायकों को लगातार अभ्यास, समर्पण और सीखते रहने की सलाह दी थी।

उनका मानना था कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और शक्तिशाली माध्यम भी है। यही सोच उनके लंबे संगीत सफर में दिखाई देती रही।

विरासत में रहेंगे गीत

समय बीतने के साथ कलाकार मंच से दूर हो जाते हैं, लेकिन उनकी आवाज रिकॉर्डिंग के माध्यम से श्रोताओं के बीच बनी रहती है। प्रणब पटनायक के साथ भी ऐसा ही होगा। उनके पुराने फिल्मी गीत, गजल और गैर-फिल्मी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को ओडिया संगीत के उस दौर से परिचित कराती रहेंगी।

संगीत प्लेटफॉर्म पर उनके गीतों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि उनकी आवाज आज भी श्रोताओं तक पहुंच रही है।

प्रणब पटनायक का निधन ओडिशा के संगीत जगत के लिए एक युग के अवसान जैसा है। पांच दशक से अधिक लंबे सफर में उन्होंने अपनी आवाज से ओडिया फिल्म संगीत को समृद्ध किया और कई पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों के बीच जगह बनाई। 88 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ एक ऐसी आवाज खामोश हो गई, जिसकी गूंज ओडिया संगीत की दुनिया में लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।

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