
भुवनेश्वर। ओडिशा में आम लोगों को महंगाई का झटका लगा है। राज्य में पिछले कुछ दिनों से सब्जियों और जरूरी किराना सामानों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा असर चीनी की कीमतों पर पड़ा है, जहां खुदरा बाजार में इसके दाम कुछ ही हफ्तों में तेजी से बढ़ गए हैं।
व्यापारियों के अनुसार, करीब दो हफ्ते पहले चीनी की खुदरा कीमत लगभग 55 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अचानक हुई इस बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है।
ओडिशा के व्यापारियों का कहना है कि चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में बढ़ना भी एक प्रमुख वजह बताई जा रही है। व्यापारियों के अनुसार, इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने की अधिक खपत होने से चीनी उत्पादन और बाजार में उपलब्धता पर असर पड़ा है।
ओडिशा को चीनी की आपूर्ति मुख्य रूप से कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से होती है। इनमें कर्नाटक चीनी सप्लाई का एक बड़ा स्रोत है। वहां उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े बदलावों का असर ओडिशा के बाजार पर भी पड़ता है।
ओडिशा ब्यबसायी महासंघ के सचिव सुधाकर पांडा ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में चीनी की थोक कीमतों में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पहले चीनी की थोक कीमत करीब 4,100 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब बढ़कर लगभग 6,100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।
सुधाकर पांडा के अनुसार, चीनी के दाम पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रहे हैं। थोक बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ता है, जिसके कारण ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
चीनी के अलावा राज्य में अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं और सब्जियों के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बारिश, परिवहन लागत और आपूर्ति में कमी जैसे कारणों से कई सब्जियों की कीमतें प्रभावित हुई हैं।
व्यापारियों का कहना है कि मौसम में बदलाव और कई क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण सब्जियों की आवक पर असर पड़ा है। जब बाजार में आपूर्ति कम होती है तो कीमतें स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं।
खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू खर्च चलाने वाले लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण महीने का बजट प्रभावित हो रहा है।
गृहिणियों के अनुसार, चीनी, सब्जी, दाल और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी से रोजमर्रा के खर्च बढ़ गए हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों के दौरान चीनी और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से कीमतों पर और दबाव आ सकता है।
व्यापार संगठन भी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि कीमतों में स्थिरता के लिए आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर करना जरूरी है। अगर राज्यों से पर्याप्त मात्रा में सामान उपलब्ध होता है तो कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य वस्तु की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है। उत्पादन, मांग, परिवहन लागत और सरकारी नीतियां बाजार भाव को प्रभावित करती हैं। चीनी के मामले में इथेनॉल उत्पादन और गन्ने की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
केंद्र सरकार भी समय-समय पर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और उपलब्धता की समीक्षा करती है। चीनी उत्पादन और निर्यात से जुड़े फैसले बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
ओडिशा में फिलहाल व्यापारियों और उपभोक्ताओं की नजर आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति पर है। अगर आपूर्ति व्यवस्था बेहतर होती है तो कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल आम लोगों को बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य में बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। चीनी के दाम में बड़ा उछाल इस बात का संकेत है कि खाद्य बाजार में स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है।





