ओडिशा

MMDR संशोधन के खिलाफ ओडिशा विधानसभा में हंगामा, विपक्ष के प्रदर्शन से कार्यवाही स्थगित

Kavita2
25 Sept 2026 11:20 AM IST
MMDR संशोधन के खिलाफ ओडिशा विधानसभा में हंगामा, विपक्ष के प्रदर्शन से कार्यवाही स्थगित
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भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र में माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) यानी MMDR संशोधन कानून को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस के विधायकों के विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। प्रश्नकाल के दौरान हंगामा बढ़ने के बाद डिप्टी स्पीकर भवानी शंकर भोई ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। हाल के दिनों में MMDR संशोधन के मुद्दे पर विधानसभा में लगातार विरोध देखने को मिला है।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने MMDR संशोधन कानून का मुद्दा उठाया। BJD और कांग्रेस के सदस्य बैनर और पोस्टर लेकर सदन के वेल की ओर बढ़े और संशोधित कानून को वापस लेने की मांग करते हुए नारे लगाए। कांग्रेस विधायकों ने विरोध संदेश वाले पोस्टर पहनकर भी अपना विरोध दर्ज कराया।

विपक्षी सदस्यों के विरोध के कारण प्रश्नकाल सामान्य तरीके से नहीं चल सका। विधायक स्पीकर के पोडियम के पास पहुंचकर नारेबाजी करते रहे। डिप्टी स्पीकर ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन प्रदर्शन जारी रहा। इसके बाद कार्यवाही को शाम 4 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

MMDR संशोधन कानून मौजूदा मानसून सत्र में विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गया है। कांग्रेस और BJD दोनों संशोधन को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि नए प्रावधानों से खनिज संपदा और खनन से जुड़े मामलों में राज्य के अधिकार प्रभावित होंगे। यह विपक्ष का राजनीतिक दावा है और इसी आधार पर दोनों दल सदन के अंदर और बाहर विरोध कर रहे हैं।

कांग्रेस का कहना है कि वह इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी। पार्टी के विधायक विधानसभा परिसर में भी विरोध कर चुके हैं। कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने कहा है कि पार्टी संशोधित खनन कानून का विधानसभा के अंदर और बाहर विरोध कर रही है। पार्टी ने इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन की बात भी कही है।

BJD भी संशोधन को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है। पार्टी के विधायकों ने विधानसभा में बैनर और तख्तियां दिखाकर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि संशोधन से खनिज संपदा वाले राज्यों के अधिकारों पर असर पड़ेगा। हालांकि यह विपक्ष की व्याख्या है और कानून के वास्तविक प्रशासनिक तथा कानूनी प्रभाव का आकलन उसके प्रावधानों और क्रियान्वयन के आधार पर होगा।

विधानसभा में MMDR का मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है। मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही विपक्ष इसे लेकर प्रदर्शन कर रहा है। अलग-अलग दिनों में कांग्रेस और BJD के सदस्य सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी कर चुके हैं। इसके कारण प्रश्नकाल सहित निर्धारित विधायी कामकाज प्रभावित हुआ है।

MMDR विवाद के अलावा BJD ने स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों का मुद्दा भी उठाया है और स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। गुरुवार की कार्यवाही में भी BJD ने पाठ्यपुस्तक विवाद और कांग्रेस ने MMDR संशोधन को प्रमुखता से उठाया था।

लगातार विरोध के कारण मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक गतिरोध बढ़ा है। विपक्ष चाहता है कि खनन कानून से जुड़े अपने सवालों पर सरकार स्पष्ट जवाब दे और संशोधन वापस लेने की दिशा में कदम उठाए। दूसरी ओर सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए पीठ की ओर से प्रदर्शनकारी विधायकों से बार-बार अपनी सीटों पर लौटने की अपील की गई है।

खनिज संपदा के लिहाज से ओडिशा देश के महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। इसलिए खनन से संबंधित किसी भी बड़े कानूनी बदलाव का मुद्दा राज्य की राजनीति में व्यापक चर्चा का विषय बनता है। विपक्ष इसी संदर्भ में MMDR संशोधन को राज्य के हितों और अधिकारों से जोड़कर पेश कर रहा है। संशोधन के समर्थकों और केंद्र सरकार का दृष्टिकोण इसके उद्देश्यों और खनन क्षेत्र में प्रस्तावित बदलावों पर अलग हो सकता है; विधानसभा में मौजूदा विवाद मुख्य रूप से विपक्ष की वापसी की मांग पर केंद्रित है।

विरोध के दौरान कांग्रेस और BJD के सदस्यों ने अलग-अलग तरीकों से अपनी मांगें सामने रखीं। कांग्रेस विधायकों का पोस्टर पहनकर सदन में पहुंचना भी इसी विरोध का हिस्सा रहा। BJD सदस्यों ने बैनर और तख्तियों के साथ प्रदर्शन किया। विपक्षी विधायक लगातार नारे लगाते हुए संशोधन वापस लेने की मांग करते रहे।

सदन में शोर-शराबे के कारण सामान्य चर्चा और प्रश्नकाल प्रभावित होने पर डिप्टी स्पीकर के सामने कार्यवाही स्थगित करने की स्थिति बनी। पिछले दिनों भी इसी तरह के विरोध के कारण सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा है। इससे मानसून सत्र के दौरान निर्धारित विधायी कार्यों के लिए उपलब्ध समय पर भी असर पड़ा है।

विधानसभा के बाहर भी MMDR संशोधन के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियां हुई हैं। विपक्षी दलों ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर कानून वापस लेने की मांग की है। रायगड़ा में भी विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया था और इसे आदिवासी तथा खनिज क्षेत्रों के हितों से जोड़ा था। ये दावे विपक्ष की राजनीतिक स्थिति को दर्शाते हैं।

फिलहाल MMDR संशोधन का मुद्दा ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र के प्रमुख राजनीतिक विवादों में बना हुआ है। कांग्रेस और BJD इसे वापस लेने की मांग पर कायम हैं और सदन में प्रदर्शन कर रहे हैं। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण विधानसभा की कार्यवाही बार-बार प्रभावित हो रही है। आने वाली बैठकों में भी यह मुद्दा सदन के अंदर सरकार और विपक्ष के बीच बहस का केंद्र बने रहने की संभावना है।

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