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Odisha ओडिशा: भारतीय शतरंज ग्रैंडमास्टर और ऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) के उपाध्यक्ष दिव्येंदु बरुआ ने भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय शतरंज सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शैक्षिक विकास और उनकी प्रतिभा को निखारना है। बरुआ ने बताया, "यह एक दो दिवसीय सम्मेलन है। आज पहला दिन है और कल दूसरा दिन होगा। सम्मेलन का मुख्य ध्यान बच्चों के शिक्षा में सहयोग और उनके समग्र विकास पर है। इस विषय पर व्यापक चर्चा होगी, और इसमें भारत और विदेशों से कई प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।"
सम्मेलन का उद्देश्य न केवल शतरंज खेल को बढ़ावा देना है, बल्कि इसे शिक्षा और मानसिक विकास के एक साधन के रूप में भी प्रस्तुत करना है। दिव्येंदु बरुआ ने कहा कि शतरंज खेलने वाले बच्चों में संकल्प, ध्यान, रणनीतिक सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता बढ़ती है। इसलिए यह सम्मेलन बच्चों की शिक्षा में खेल की भूमिका को और मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में देशभर से कई ग्रैंडमास्टर, कोच, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान शतरंज के तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ बच्चों के मानसिक और अकादमिक विकास में खेल के योगदान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
बरुआ ने आगे कहा, "हम चाहते हैं कि शतरंज को केवल प्रतिस्पर्धा के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे बच्चों के मानसिक विकास, समस्या सुलझाने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करने वाले उपकरण के रूप में अपनाया जाए। इस सम्मेलन में हम इन पहलुओं पर गहन चर्चा करेंगे और नई योजनाओं पर विचार करेंगे। सम्मेलन में शतरंज के विभिन्न पहलुओं पर कार्यशालाएं और सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें बच्चों के लिए प्रशिक्षण विधियाँ, शतरंज में नैतिकता और खेल भावना, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण जैसी विषयवस्तुएँ शामिल हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे भारतीय प्रतिभाओं को वैश्विक स्तर की जानकारी और प्रेरणा मिल सके।
बरुआ ने कहा कि बच्चों को शिक्षा और खेल में संतुलन बनाए रखना चाहिए। शतरंज खेल न केवल मानसिक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि बच्चों में धैर्य, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। इस सम्मेलन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बच्चों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि भुवनेश्वर को शतरंज और शिक्षा के संगम का केंद्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों को यह संदेश दिया गया कि खेल के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना सबसे बड़ा उद्देश्य है।
अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतिभागियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान बच्चों के लिए नए प्रशिक्षण मॉड्यूल और योजनाओं को विकसित करने में सहायक होगा। इस सम्मेलन का व्यापक प्रभाव न केवल भारत में शतरंज के प्रचार-प्रसार में दिखाई देगा, बल्कि बच्चों की शिक्षा और मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न पैनल डिस्कशन, विशेषज्ञ सत्र और इंटरैक्टिव कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। बरुआ ने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन से बच्चों और प्रशिक्षकों दोनों को नई दिशा मिलेगी और शतरंज को शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में मजबूती मिलेगी।
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