
Odisha ओडिशा: जाजपुर जिले में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। दशरथपुर ब्लॉक के कांटापाड़ा क्षेत्र में बैतरणी नदी की सहायक नदी कानी नदी के तटबंध में दो जगह बड़ी दरारें आने से आसपास के इलाकों में पानी फैल गया है। तटबंध टूटने से खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है, जिससे किसानों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कानी नदी के तटबंध में पहली दरार करीब 70 फीट चौड़ी है, जबकि दूसरी दरार लगभग 50 फीट की बताई जा रही है। दोनों दरारें एक-दूसरे से करीब 150 फीट की दूरी पर बनी हैं। तटबंध टूटने का असर सबसे ज्यादा आसपास के कृषि क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां बड़ी मात्रा में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।
खेतों में फैला बाढ़ का पानी, फसलों को नुकसान का खतरा
तटबंध में दरार आने के बाद नदी का पानी तेजी से आसपास के इलाकों में फैलने लगा। कई जगहों पर खेत जलमग्न हो गए हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
बाढ़ का पानी मलिकापुर, दुदुरांता, शुशुआ, मंगलपुर और कनिकापाड़ा समेत कई पंचायतों के कृषि क्षेत्रों तक पहुंच गया है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोग खेती पर निर्भर हैं। खेतों में पानी भरने से धान और अन्य फसलों पर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही तटबंध की मरम्मत नहीं की गई और नदी का जलस्तर बढ़ता रहा, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
निचले इलाकों में घुसा पानी, ग्रामीणों में चिंता
तटबंध टूटने के कारण आसपास के कुछ निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि लगातार पानी बढ़ने से घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भी खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत कार्य शुरू करने और कमजोर हिस्सों की तुरंत मरम्मत करने की अपील की है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की टीमों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। स्थानीय अधिकारियों को स्थिति का जायजा लेने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
एक किलोमीटर तटबंध धंसने से बढ़ा खतरा
ग्रामीणों की चिंता उस समय और बढ़ गई जब मलिकापुर और कांटापाड़ा के बीच तटबंध का करीब एक किलोमीटर हिस्सा धंसने की जानकारी सामने आई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो यह कमजोर हिस्सा भी टूट सकता है और बड़े क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैल सकता है।
तटबंध के कमजोर हिस्सों की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो नुकसान का दायरा बढ़ सकता है।
पिछले साल टूटे तटबंध की मरम्मत अभी अधूरी
ग्रामीणों ने बैतरणी नदी पर कायन पंचायत के गुंथुनीपाड़ा इलाके में पिछले साल टूटे तटबंध की अधूरी मरम्मत का मुद्दा भी उठाया है।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष वहां करीब 500 मीटर लंबा तटबंध टूट गया था। हालांकि, इसके बाद मरम्मत कार्य शुरू किया गया था, लेकिन अभी तक इसे पूरी तरह पूरा नहीं किया जा सका है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि पिछले साल क्षतिग्रस्त हुए तटबंध की समय पर पूरी मरम्मत कर दी जाती, तो वर्तमान स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पुराने और नए दोनों कमजोर हिस्सों की जांच कर स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
जाजपुर जिले में मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन कमजोर तटबंधों के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
कानी नदी के तटबंध में आई दरारों ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब प्राथमिकता टूटे हुए हिस्सों को जल्द से जल्द बंद करना और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी तटबंधों की समय-समय पर जांच और मजबूत निर्माण जरूरी है, ताकि बारिश के मौसम में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।
ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मशीनों और कर्मचारियों की मदद से जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। साथ ही, जिन इलाकों में पानी भर गया है वहां राहत और बचाव की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि खेती की जमीन को हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को सहायता दी जानी चाहिए।
फिलहाल कानी नदी के तटबंध में आई दरारों के बाद पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी बड़ी आपदा से बचने के लिए जरूरी कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।





