
भुवनेश्वर: ओडिशा वन विभाग की ओर से भुवनेश्वर के पास चंडका वाइल्डलाइफ डिवीजन के कुमारखुंटी में कुमकी हाथी प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया जा रहा है। इस केंद्र में अनाथ, घायल या अपने झुंड से बिछड़ चुके युवा हाथियों को लाकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों को मानव आबादी वाले क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना है। वन विभाग का मानना है कि प्रशिक्षित कुमकी हाथी मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कुमारखुंटी में तैयार किए जाते हैं कुमकी हाथी
कुमकी हाथी वे हाथी होते हैं जिन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे वन विभाग के अभियानों में सहयोग कर सकें। इनका इस्तेमाल जंगली हाथियों को नियंत्रित करने, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और रेस्क्यू ऑपरेशन में किया जाता है।
कुमारखुंटी स्थित प्रशिक्षण केंद्र में हाथियों को धीरे-धीरे इंसानी संपर्क और विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार तैयार किया जाता है।
अनाथ और घायल हाथियों को मिलता है नया जीवन
वन विभाग के अनुसार, जंगलों में कई बार हाथी के बच्चे अनाथ हो जाते हैं, घायल हो जाते हैं या किसी कारण से अपने झुंड से अलग हो जाते हैं। ऐसे हाथियों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर प्रशिक्षण केंद्र लाया जाता है।
#WATCH | Odisha Forest Department runs the Kumki Elephant Training Centre at Kumarakhunti inside the Chandaka Wildlife Division near Bhubaneswar. The orphaned, injured, or herd-separated young elephants are brought to the training centre. The training helps manage human-elephant… pic.twitter.com/mYw6W34ahQ
— ANI (@ANI) September 28, 2026
यहां उनकी देखभाल की जाती है और उनकी शारीरिक स्थिति बेहतर होने के बाद प्रशिक्षण प्रक्रिया शुरू की जाती है।
मानव-हाथी संघर्ष कम करने में मदद
ओडिशा के कई इलाकों में मानव और हाथियों के बीच संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों और हाथियों के बीच टकराव से दोनों को नुकसान पहुंच सकता है।
प्रशिक्षित कुमकी हाथी ऐसे अभियानों में मदद करते हैं, जहां जंगली हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से सुरक्षित तरीके से वापस जंगल की ओर भेजना होता है।
प्रशिक्षण में दी जाती है विशेष सीख
कुमारखुंटी प्रशिक्षण केंद्र में हाथियों को कई तरह की गतिविधियों के लिए तैयार किया जाता है। इसमें इंसानों के निर्देशों को समझना, नियंत्रित तरीके से चलना और विशेष परिस्थितियों में शांत रहना शामिल होता है।
प्रशिक्षण के दौरान हाथियों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर भी लगातार नजर रखी जाती है।
वन विभाग के लिए अहम भूमिका
कुमकी हाथी वन विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होते हैं। जंगलों में रेस्क्यू अभियान, घायल वन्यजीवों की सहायता और जंगली हाथियों को नियंत्रित करने जैसे कार्यों में इनकी भूमिका बढ़ रही है।
वन अधिकारियों के अनुसार, हाथियों को प्रशिक्षित करने का उद्देश्य उन्हें नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है।
हाथियों की देखभाल पर विशेष ध्यान
प्रशिक्षण केंद्र में हाथियों के भोजन, स्वास्थ्य और रहने की व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। विशेषज्ञों की निगरानी में उनकी दिनचर्या तय की जाती है।
हाथियों के व्यवहार को समझने के बाद ही उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाता है।
संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
हाथी संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना भी इसका अहम हिस्सा है।
कुमारखुंटी जैसे प्रशिक्षण केंद्र वन विभाग को ऐसे हाथियों की मदद से संरक्षण कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने में सहायता करते हैं।
भविष्य में बढ़ सकती है भूमिका
बदलते पर्यावरण और जंगलों के आसपास बढ़ती मानव गतिविधियों के कारण मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती बढ़ रही है। ऐसे में प्रशिक्षित कुमकी हाथियों की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
ओडिशा वन विभाग का यह प्रयास हाथियों के संरक्षण और लोगों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
कुमारखुंटी स्थित कुमकी हाथी प्रशिक्षण केंद्र न केवल घायल और अनाथ हाथियों को नया जीवन दे रहा है, बल्कि वन विभाग को वन्यजीव प्रबंधन में भी मजबूत सहयोग प्रदान कर रहा है।





