
भुवनेश्वर। ओडिशा में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। ब्राह्मणी, महानदी और बैतरणी जैसी प्रमुख नदियों का पानी कई जिलों में फैल गया है। बाढ़ के पानी के साथ नदी क्षेत्रों से मगरमच्छों के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। इसी को देखते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इंसानों और मगरमच्छों के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
विभाग ने राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को मगरमच्छों के व्यवहार, उनसे बचाव के उपाय और आपात स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देना है। इसके साथ ही वन विभाग ने एक आपातकालीन व्हाट्सऐप हेल्पलाइन भी शुरू की है, ताकि लोग मगरमच्छ दिखाई देने या किसी खतरे की स्थिति में तुरंत सूचना दे सकें।
अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश और बाढ़ के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ अक्सर अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकल आते हैं। पानी का बहाव उन्हें नदी किनारे बसे गांवों, खेतों और निचले इलाकों तक ले जा सकता है। ऐसे में लोगों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। वन विभाग ने इसी खतरे को कम करने के लिए समय रहते कदम उठाए हैं।
ब्राह्मणी, महानदी और बैतरणी नदियों के आसपास के कई इलाके पहले से ही मगरमच्छों की मौजूदगी वाले क्षेत्र माने जाते हैं। बाढ़ के दौरान इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। विभाग की टीमें अब ऐसे गांवों और क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सतर्क कर रही हैं।
जागरूकता अभियान के तहत ग्रामीणों को सलाह दी जा रही है कि वे बाढ़ के पानी या नदी किनारे जाने से बचें। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को नदी, तालाब या जलभराव वाले क्षेत्रों के पास नहीं जाने की सलाह दी गई है। लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि यदि कहीं मगरमच्छ दिखाई दे तो उसे पकड़ने या उसके पास जाने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मगरमच्छ आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते, लेकिन अचानक आमने-सामने की स्थिति में खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए लोगों को सतर्क रहने और वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। विभाग का लक्ष्य किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकना है।
आपातकालीन व्हाट्सऐप हेल्पलाइन शुरू करने का उद्देश्य सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज करना है। ग्रामीण और स्थानीय लोग अब किसी भी क्षेत्र में मगरमच्छ दिखने, फंसे होने या मानव बस्ती में पहुंचने की स्थिति में तुरंत वन विभाग को जानकारी दे सकेंगे। इसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करेगी।
वन विभाग ने रेस्क्यू टीमों को भी सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील इलाकों में कर्मचारियों की तैनाती बढ़ाई गई है और स्थानीय स्तर पर निगरानी की जा रही है। विभाग के कर्मचारी ग्रामीणों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ के समय वन्यजीवों का अपने स्थान से बाहर आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। ऐसे में लोगों को डरने के बजाय सावधानी और जानकारी के साथ स्थिति का सामना करना चाहिए। जागरूकता के माध्यम से मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्थानीय प्रशासन भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रख रहा है। जलस्तर बढ़ने वाले इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण कई बार वन्यजीव मानव आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में संरक्षण और सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। लोगों में जागरूकता बढ़ाकर ही इस तरह की घटनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
ओडिशा में शुरू किया गया यह अभियान केवल तत्काल खतरे से निपटने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय तक मानव और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
फिलहाल वन विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत सूचना दें और खुद से मगरमच्छों को हटाने या पकड़ने का प्रयास न करें। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सतर्कता और सहयोग से बाढ़ के दौरान होने वाली अप्रिय घटनाओं को रोका जा सकता है।





