
भुवनेश्वर। उत्कल विश्वविद्यालय में शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय ‘अर्थ अगेन कॉन्फ्रेंस 2026’ के दौरान ‘संबाद’ और ‘कनक न्यूज’ की एडिटर तनाया पटनायक ने जलवायु परिवर्तन को लेकर चलाए जा रहे ‘पुनश्च पृथ्वी’ अभियान की प्रगति और उसके जमीनी प्रभाव के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब केवल लोगों को जागरूक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन पर होने वाली बातचीत को लोगों के घरों तक पहुंचाने में सफल रहा है।
तनाया पटनायक ने कहा कि ‘पुनश्च पृथ्वी’ अभियान का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषय को आम नागरिकों की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बनाना है। उनके मुताबिक, जब जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर चर्चा केवल विशेषज्ञों, संस्थानों या शहरों तक सीमित रहती है तो जमीनी समस्याएं सामने नहीं आ पातीं। इसी वजह से अभियान को व्यापक स्तर पर लोगों से सीधे संवाद करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया गया है।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत ओडिशा के सभी 147 विधानसभा क्षेत्रों में ‘क्लाइमेट पंचायत’ आयोजित की जा रही हैं। इन पंचायतों के माध्यम से अलग-अलग इलाकों के लोगों को एक मंच पर बैठकर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अपनी चिंताओं, अनुभवों और स्थानीय समस्याओं पर बातचीत करने का अवसर दिया जा रहा है।
पटनायक के अनुसार, ‘क्लाइमेट पंचायत’ का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित करना है। इन बैठकों में लोगों को अपनी बात सीधे सामने रखने का अवसर मिलता है, जबकि चुने हुए प्रतिनिधियों को भी स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं को समझने और सुनने का मौका मिलता है।
उन्होंने कहा कि अभियान के तहत होने वाली इन चर्चाओं में सामने आ रही लोगों की आवाजों और अनुभवों को अब एक बड़े दस्तावेज के रूप में संकलित किया जा रहा है। इसके लिए ‘पीपल्स क्लाइमेट एटलस’ तैयार किया जा रहा है। पटनायक ने इसे राज्यभर में गांव के स्तर पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का रिकॉर्ड बताया।
उनके मुताबिक, इस एटलस का उद्देश्य केवल आंकड़ों या सूचनाओं को एकत्र करना नहीं है, बल्कि अलग-अलग समुदायों के अनुभवों को दर्ज करना भी है। गांवों और स्थानीय क्षेत्रों में लोग जलवायु परिवर्तन के असर को किस रूप में महसूस कर रहे हैं, उनके सामने कौन-सी समस्याएं हैं और वे अपने आसपास क्या बदलाव देख रहे हैं, इन पहलुओं को इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।
तनाया पटनायक ने कहा कि ‘पुनश्च पृथ्वी’ अभियान का फोकस केवल भुवनेश्वर जैसे शहरी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। अभियान को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पहुंच बनाई गई है। इसका उद्देश्य उन समुदायों तक बातचीत पहुंचाना है जो सीधे पर्यावरणीय बदलावों और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
इसी क्रम में अभियान भीतरकनिका तक पहुंचा, जहां मैंग्रोव के महत्व को सामने लाने पर जोर दिया गया। अभियान के दौरान मैंग्रोव और उससे जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर लोगों के बीच बातचीत की गई। स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण के संबंध को समझने की दिशा में भी इस तरह के संवाद को महत्वपूर्ण बताया गया।
अभियान का दायरा गंजम जिले के बरहमपुर और आर्यपल्ली तक भी पहुंचा। पटनायक ने बताया कि इन तटीय इलाकों में समुदायों पर तटीय कटाव और समुद्र के बढ़ते जलस्तर के प्रभावों को समझने की कोशिश की गई। स्थानीय लोगों के अनुभवों और चिंताओं को बातचीत के माध्यम से दर्ज किया जा रहा है, ताकि पर्यावरणीय बदलावों की जमीनी तस्वीर सामने आ सके।
उन्होंने कहा कि समुद्र के किनारे रहने वाले समुदायों के लिए जलवायु परिवर्तन एक दूर का विषय नहीं है, बल्कि उनके दैनिक जीवन और भविष्य से जुड़ा सवाल है। ऐसे क्षेत्रों में होने वाली स्थानीय चर्चाएं यह समझने में मदद करती हैं कि पर्यावरणीय बदलावों का असर लोगों के जीवन, उनकी आजीविका और आसपास के प्राकृतिक परिवेश पर किस तरह दिखाई दे रहा है।
‘पुनश्च पृथ्वी’ अभियान के तहत सिमलीपाल और देबरीगढ़ तक भी पहुंच बनाई गई है। इस तरह अभियान को तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ वन क्षेत्र और अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में भी ले जाने की कोशिश की गई है। इससे जलवायु परिवर्तन से जुड़े अलग-अलग अनुभवों को एक व्यापक मंच पर लाने का अवसर मिल रहा है।
पटनायक ने बताया कि अभियान के तहत जुटाई जा रही जानकारी को एक साथ संकलित करने का काम जारी है। ‘पीपल्स क्लाइमेट एटलस’ इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आने वाली आवाजों को जगह दी जा रही है, ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को केवल बड़े शहरों या विशेषज्ञों के नजरिए से नहीं, बल्कि गांव और समुदाय के स्तर से भी समझा जा सके।
उन्होंने कहा कि इस अभियान की खासियत जमीनी संवाद है। लोगों से सीधे बातचीत करने और उनके अनुभवों को सुनने पर जोर दिया गया है। इससे जलवायु परिवर्तन को लेकर स्थानीय स्तर पर मौजूद चिंताओं और अपेक्षाओं को सामने लाने में मदद मिल रही है।
उत्कल विश्वविद्यालय में आयोजित ‘अर्थ अगेन कॉन्फ्रेंस 2026’ के मंच से पटनायक ने अभियान की दिशा पर बात करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन पर बातचीत को व्यापक बनाने के लिए लोगों की भागीदारी जरूरी है। उनके अनुसार, जब लोग अपनी स्थानीय परिस्थितियों को लेकर बोलते हैं तो समस्या की वास्तविक तस्वीर सामने आती है।
तीन दिवसीय सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। इसी क्रम में ‘पुनश्च पृथ्वी’ अभियान को एक ऐसे प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो पर्यावरणीय बहस को स्थानीय समुदायों तक ले जाने पर केंद्रित है।
क्लाइमेट पंचायतों के माध्यम से नागरिकों को अपनी चिंताएं व्यक्त करने का मंच दिया जा रहा है। वहीं प्रतिनिधियों को भी इन चिंताओं को सुनने का अवसर मिल रहा है। इस प्रक्रिया से लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच जलवायु से जुड़े मुद्दों पर सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पटनायक ने कहा कि अभियान की यात्रा अब जागरूकता अभियान से आगे बढ़ चुकी है। उनके मुताबिक, आज जलवायु परिवर्तन को लेकर चर्चा केवल कार्यक्रमों या अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के बीच होने वाली बातचीत का हिस्सा बनने लगी है।
‘पीपल्स क्लाइमेट एटलस’ को इसी बदलाव का दस्तावेज माना जा रहा है। इसमें गांव-गांव से सामने आने वाली कहानियों और अनुभवों को एक जगह संकलित किया जाएगा। इससे ओडिशा में जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभावों का एक व्यापक रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिल सकती है।
तनाया पटनायक ने जोर दिया कि अभियान का उद्देश्य लोगों को केवल समस्या के बारे में बताना नहीं, बल्कि उन्हें बातचीत का सक्रिय हिस्सा बनाना है। यही वजह है कि अभियान को अलग-अलग जिलों, तटीय इलाकों और वन क्षेत्रों तक ले जाया गया है।
भीतरकनिका के मैंग्रोव से लेकर गंजम के तटीय क्षेत्रों, सिमलीपाल और देबरीगढ़ तक पहुंची इस पहल के जरिए अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों में रहने वाले समुदायों की आवाजों को जोड़ा जा रहा है।
उत्कल विश्वविद्यालय में हुए सम्मेलन के दौरान पटनायक की प्रस्तुति ने यह रेखांकित किया कि जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए केवल वैज्ञानिक जानकारी ही पर्याप्त नहीं है। स्थानीय समुदायों के अनुभव और उनके सामने मौजूद वास्तविक समस्याएं भी महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल ‘पुनश्च पृथ्वी’ अभियान के तहत ओडिशा के सभी 147 विधानसभा क्षेत्रों में ‘क्लाइमेट पंचायत’ आयोजित करने की प्रक्रिया जारी है। इन चर्चाओं से सामने आने वाले अनुभवों और चिंताओं को ‘पीपल्स क्लाइमेट एटलस’ में शामिल किया जा रहा है। अभियान के जरिए जलवायु परिवर्तन को लेकर जमीनी संवाद को व्यापक बनाने और गांवों से उठने वाली आवाजों को एक साझा मंच देने पर जोर दिया जा रहा है।





