
Odisha ओडिशा: मानसून की सक्रियता और ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बाद हीराकुड डैम प्रशासन ने इस मौसम का पहला बाढ़ का पानी छोड़ने का फैसला किया है। अधिकारियों के अनुसार, 9 जुलाई 2026 को सुबह करीब 11 बजे हीराकुड जलाशय से महानदी नदी में पानी छोड़ा जाएगा। पानी छोड़े जाने को देखते हुए संबंधित जिलों में बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया गया है।
हीराकुड डैम सर्कल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जलाशय में लगातार पानी की आवक बढ़ रही है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण बांध के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा और जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जाएगा।
महानदी के निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ी
हीराकुड डैम से पानी छोड़े जाने के बाद महानदी के निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
अधिकारियों ने बताया कि पानी छोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित होगी और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों को पहले ही तैयार रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और किसी भी तरह की जोखिम भरी गतिविधियों में शामिल न हों।
जिला प्रशासन और विभागों को दिए निर्देश
हीराकुड डैम अधिकारियों ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को जरूरी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें।
इसके अलावा नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों और वहां चल रही गतिविधियों को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य बाढ़ के दौरान किसी भी तरह की जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकना है।
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
प्रशासन ने महानदी के किनारे बसे गांवों और निचले क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने को कहा है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
अधिकारियों ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसलिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है।
बाढ़ जैसी स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जलस्तर पर लगातार रखी जा रही नजर
हीराकुड बांध देश के प्रमुख बहुउद्देश्यीय बांधों में शामिल है और महानदी के जल प्रबंधन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मानसून के दौरान बांध में पानी की आवक और जलस्तर पर लगातार नजर रखी जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, इस समय ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में बारिश के कारण जलाशय में पानी की मात्रा बढ़ रही है। ऐसे में नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ना जरूरी हो जाता है ताकि बांध की सुरक्षा बनी रहे।
जल संसाधन विभाग के अधिकारी लगातार मौसम की स्थिति और नदी के प्रवाह की निगरानी कर रहे हैं।
बाढ़ प्रबंधन को लेकर तैयारी तेज
पानी छोड़े जाने की घोषणा के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों की तैनाती, संचार व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखें।
नगर निकायों को भी निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक व्यवस्थाएं करने को कहा गया है।
पिछले अनुभवों को देखते हुए सावधानी
हर साल मानसून के दौरान हीराकुड डैम से पानी छोड़ा जाता है। हालांकि, पानी छोड़ने से पहले सभी सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा की जाती है।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी पूरी सावधानी के साथ पानी छोड़ा जाएगा। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन प्रशासन के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों को तैयार रखा गया है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
महानदी किनारे लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने महानदी के किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
लोगों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों और बुजुर्गों को नदी किनारे जाने से रोकें और बाढ़ संबंधी निर्देशों का पालन करें।
फिलहाल हीराकुड डैम प्रशासन ने 9 जुलाई को पानी छोड़े जाने की तैयारी पूरी कर ली है। ऊपरी क्षेत्रों में बारिश की स्थिति और जलस्तर को देखते हुए आगे के फैसले लिए जाएंगे।
प्रशासन की प्राथमिकता बांध की सुरक्षा के साथ-साथ महानदी के किनारे रहने वाले लोगों की जान-माल की रक्षा करना है।





