
Odisha ओडिशा: सरकार ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राज्य के स्कूल और मास एजुकेशन मंत्री नित्यानंद गोंड ने स्पष्ट किया है कि सभी प्राइवेट स्कूलों को छात्रों के लिए NCERT की पाठ्यपुस्तकों की बिक्री और उपयोग सुनिश्चित करना होगा।
मंत्री ने कहा कि NEP के तहत छात्रों को NCERT की किताबों से पढ़ाई करने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस व्यवस्था से हटना शिक्षा नीति के उस उद्देश्य को कमजोर करता है, जिसका मकसद पूरे देश में गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा प्रणाली लागू करना है।
नित्यानंद गोंड ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा अपने निजी प्रकाशनों को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई स्कूल महंगी किताबें थोपकर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं, जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। मंत्री ने कहा, “प्राइवेट पब्लिकेशन्स के जरिए अभिभावकों से भारी रकम वसूलना गलत है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की शिकायतें सामने आती हैं, तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। “अगर हमें शिकायतें मिलती हैं, तो हम तथ्यों की जांच करेंगे और उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई करेंगे,” मंत्री ने कहा।
मंत्री ने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर स्कूल और मास एजुकेशन विभाग के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। सरकार जल्द ही स्पष्ट गाइडलाइंस तैयार करेगी, जिनमें यह तय किया जाएगा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। गोंड ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का शोषण रोकना सरकार की प्राथमिकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NCERT की किताबें देशभर में एक समान पाठ्यक्रम और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि सभी स्कूल इनका पालन करते हैं, तो छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में भी लाभ मिलेगा।
वहीं, अभिभावकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा महंगी किताबें खरीदने का दबाव लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहा है, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
ओडिशा सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन निर्देशों को किस तरह लागू करती है और प्राइवेट स्कूलों पर इसका क्या असर पड़ता है।





