
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार ने दया नदी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में भुवनेश्वर स्थित गंगुआ नाले के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण से जुड़े टेंडर को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना का उद्देश्य बिना उपचारित गंदे पानी को रोककर उसे साफ करना और दया नदी में जाने वाले प्रदूषण को कम करना है।
सरकारी जानकारी के अनुसार यह वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट 100.89 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की समयसीमा 30 अप्रैल 2028 तय की गई है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना भुवनेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण सुधार की दिशा में एक अहम पहल साबित होगी।
गंगुआ नाला शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाले बड़े पैमाने पर बिना ट्रीट किए गए सीवेज को अपने साथ ले जाता है। यह गंदा पानी सीधे दया नदी में मिलकर उसके जल को प्रदूषित करता है। लंबे समय से इस समस्या को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ चिंता जताते रहे हैं, क्योंकि दया नदी न केवल एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि गंगुआ नाला और दया नदी के संगम के पास एक आधुनिक वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट का मुख्य कार्य नाले के पानी को रोकना, उसे मोड़ना और वैज्ञानिक तरीके से शुद्ध करना होगा, ताकि साफ पानी ही नदी में प्रवेश करे।
परियोजना के तहत अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ेगी और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार यह प्लांट न केवल प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेगा, बल्कि शहरी जल प्रबंधन प्रणाली को भी मजबूत करेगा।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना का उद्देश्य दया नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना और भविष्य में जल स्रोतों की गुणवत्ता को सुरक्षित रखना है। इसके साथ ही शहर के बढ़ते शहरीकरण के कारण उत्पन्न हो रहे सीवेज प्रबंधन की समस्या का स्थायी समाधान निकालना भी इस योजना का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं नदियों के संरक्षण के लिए बेहद जरूरी हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तेजी से शहरी विस्तार हो रहा है। गंगुआ नाले का उपचारित पानी दया नदी में जाने से जल गुणवत्ता में सुधार होगा और जलीय जीवन को भी लाभ मिलेगा।
परियोजना के पूरा होने के बाद भुवनेश्वर में सीवेज प्रबंधन प्रणाली को एक नया ढांचा मिलेगा और यह क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अधिक सुरक्षित बन सकेगा। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में अन्य प्रमुख नालों और जल स्रोतों के लिए भी इसी तरह की योजनाएं लागू की जा सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह परियोजना दया नदी के प्रदूषण को रोकने और शहर के जल संसाधनों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलेगी।





