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Bangal बंगाल: खाड़ी से उठे चक्रवात ‘मोंथा’ का प्रभाव अब ओडिशा के तटीय इलाकों में दिखने लगा है। मौसम में अचानक आए बदलाव के चलते खुर्दा जिले की प्रसिद्ध चिल्का झील में तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण स्थिति अशांत हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने मछुआरों को झील और समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी है, जबकि तटीय इलाकों में राहत और बचाव दलों को सतर्क मोड पर रखा गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि चक्रवात मोंथा अगले कुछ घंटों में आंध्र प्रदेश और ओडिशा तट से टकरा सकता है। वर्तमान में यह तूफान उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और काकीनाडा व कालींगपट्टनम के बीच भूमि से टकराने की संभावना जताई गई है। इसका असर ओडिशा के दक्षिणी जिलों—खुर्दा, गंजाम, पुरी और गजपति—पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।
चिल्का झील के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि रविवार रात से ही तेज हवाएं और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। सोमवार सुबह हवाओं की रफ्तार बढ़कर 90-100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जिससे झील में लहरें उफान पर हैं। कई नावें किनारे पर बांध दी गई हैं और पर्यटन गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। खुर्दा जिला प्रशासन ने बताया कि एनडीआरएफ और ओड्राफ की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। सभी तटीय थानों को संभावित आपदा से निपटने के लिए आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, चिल्का के आसपास के गांवों में माइक से चेतावनी संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की जा रही है।
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात मोंथा का असर अगले 24 घंटों तक जारी रहेगा, जिससे ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। विशेष रूप से पुरी, गंजाम, खुर्दा, और कटक जिलों में जलभराव और पेड़ उखड़ने जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। ओडिशा सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिया है कि वे सभी फिशिंग कम्युनिटी और पर्यटन स्थलों पर सतर्कता बढ़ाएं। चिल्का झील में चलने वाली नौकाओं, फेरी सेवाओं और बोट सफारी को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है।
स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि चिल्का झील की पारिस्थितिकी व्यवस्था पर भी इस तूफान का प्रभाव पड़ सकता है। हवा की तीव्रता और जलस्तर में अचानक वृद्धि से झील में मौजूद प्रवासी पक्षियों और मछलियों के प्रजनन चक्र पर असर पड़ सकता है। वहीं, राज्य मौसम विज्ञान केंद्र भुवनेश्वर ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। सभी मछुआरों को समुद्र और झील में जाने से पूरी तरह मना किया गया है।
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