
Odisha ओडिशा: पुरी स्थित 12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कुछ खास शब्दों और लोगो का पेटेंट हासिल कर लिया गया है। यह जानकारी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी ने दी।
पाधी ने बताया कि मंदिर प्रशासन ने मंदिर से जुड़े कई महत्वपूर्ण शब्दों और पहचान चिह्नों को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकारों के तहत सुरक्षित कराया है। इनमें “आनंद बाजार”, “श्री पतिता पबन” और “श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA)” जैसे शब्द शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया से आधिकारिक पुष्टि प्राप्त हो चुकी है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह कदम मंदिर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को संरक्षित करने और इसके नाम व प्रतीकों के अनधिकृत उपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि जगन्नाथ मंदिर की परंपरा और उससे जुड़े प्रतीकों का गलत इस्तेमाल रोकना आवश्यक है ताकि इसकी पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व सुरक्षित रहे।
एसजेटीए ने यह भी बताया कि अभी 26 अन्य शब्दों के लिए पेटेंट हासिल करने की प्रक्रिया जारी है। इन शब्दों को भी मंदिर से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक संदर्भों में उपयोग किया जाता है। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया ने इन शब्दों पर विस्तृत जानकारी मांगी है, जिसे मंदिर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि आने वाले समय में इन सभी शब्दों और प्रतीकों पर भी पेटेंट मिल जाएगा। इससे मंदिर से जुड़ी पहचान को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और किसी भी तरह के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाई जा सकेगी।
SJTA ने पहले ही घोषणा की थी कि वह पुरी जगन्नाथ मंदिर से जुड़े शब्दों के बिना अनुमति उपयोग को रोकने के लिए उनके पेटेंट के लिए आवेदन करेगा। यह कदम मंदिर की ब्रांड पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा अपने प्रतीकों और शब्दों का पेटेंट कराना एक बढ़ता हुआ चलन है, जिससे उनकी पहचान और विरासत को कानूनी सुरक्षा मिलती है।
यह निर्णय न केवल पुरी के जगन्नाथ मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य में इसके नाम और प्रतीकों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम भी स्थापित करेगा।





