
नई दिल्ली/भुवनेश्वर: नयागढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक अरुण कुमार साहू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ओडिशा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत 2024 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत के खिलाफ दायर चुनाव याचिका पर आगे की सुनवाई जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब ओडिशा हाई कोर्ट में विधायक अरुण कुमार साहू के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी। सर्वोच्च अदालत ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस मामले का निपटारा छह महीने के भीतर करे।
मामला 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जिसमें नयागढ़ सीट से अरुण कुमार साहू निर्वाचित हुए थे। उनकी जीत को चुनौती देते हुए एक चुनाव याचिका ओडिशा हाई कोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन से जुड़े कुछ मुद्दे उठाए गए थे और विधायक के चुनाव को रद्द करने की मांग की गई थी।
अरुण कुमार साहू ने हाई कोर्ट की कार्यवाही को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से दलील दी गई थी कि चुनाव याचिका पर आगे बढ़ने का हाई कोर्ट का आदेश उचित नहीं है। उन्होंने सर्वोच्च अदालत से हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के बाद विधायक की याचिका को स्वीकार नहीं किया और इसे खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी रह सकती है। साथ ही, मामले के जल्द निपटारे के लिए छह महीने की समय सीमा भी तय कर दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब ओडिशा हाई कोर्ट को निर्धारित समय सीमा के भीतर इस चुनाव विवाद पर फैसला सुनाना होगा। चुनाव याचिकाओं में आमतौर पर चुनाव प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों, दस्तावेजों और गवाहियों के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
अरुण कुमार साहू ओडिशा की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। वह नयागढ़ विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके हैं। उनके निर्वाचन को लेकर चल रही यह कानूनी चुनौती अब हाई कोर्ट में आगे बढ़ेगी, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव याचिकाएं जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत दायर की जाती हैं और इनमें चुनाव परिणाम की वैधता को चुनौती दी जाती है। अदालत इन मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर फैसला करती है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, केवल चुनाव याचिका पर सुनवाई जारी रहने से विधायक की सदस्यता पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अंतिम फैसला हाई कोर्ट की सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा।
अब सभी की नजर ओडिशा हाई कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर होगी। छह महीने के भीतर मामले का निपटारा करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सुनवाई की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।
विधायक अरुण कुमार साहू के लिए यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि 2024 के विधानसभा चुनाव में उनका निर्वाचन कानूनी रूप से सही ठहरता है या चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर कोई अन्य फैसला आता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव विवाद की अंतिम जिम्मेदारी ओडिशा हाई कोर्ट पर है, जहां अब मामले की सुनवाई निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी।





