
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने 2023-24 शैक्षणिक सत्र में नियुक्त जूनियर टीचर्स (स्कीमैटिक) की सेवाओं को नियमित करने का निर्णय लिया है। स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार इन शिक्षकों को 1 जनवरी 2026 से एलिमेंट्री कैडर के लेवल-V(A) में असिस्टेंट टीचर के रूप में नियमित किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले से लंबे समय से नियमित सेवा की प्रतीक्षा कर रहे जूनियर टीचर्स को बड़ी राहत मिली है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नियमितीकरण की प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2026 मानी जाएगी और उसी तिथि से उन्हें नियमित कैडर का हिस्सा माना जाएगा।
हालांकि सरकार ने इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी स्पष्ट की है। जूनियर टीचर्स की प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से लेकर 31 दिसंबर 2025 तक की पूरी सेवा अवधि को स्कीमैटिक या संविदा आधार पर की गई सेवा माना जाएगा। इस अवधि को नियमित सेवा के रूप में नहीं गिना जाएगा।
इसका सीधा मतलब यह है कि शिक्षक अपनी प्रारंभिक जॉइनिंग की तारीख से नियमित कैडर में वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकेंगे। उनकी नियमित सेवा और उससे मिलने वाले लाभों की गणना 1 जनवरी 2026 से ही की जाएगी।
स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर 2025 तक की संविदा या स्कीमैटिक सेवा अवधि के आधार पर नियमित कैडर में वरिष्ठता, पदोन्नति या अन्य सेवा लाभों का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस फैसले के बाद संबंधित जूनियर टीचर्स अब एलिमेंट्री कैडर के लेवल-V(A) में असिस्टेंट टीचर की जिम्मेदारी संभालेंगे। नियमितीकरण के साथ उनके सेवा ढांचे में भी बदलाव आएगा और वे निर्धारित नियमों के तहत नियमित सरकारी शिक्षक माने जाएंगे।
सरकार का यह निर्णय उन शिक्षकों पर लागू होगा, जिनकी नियुक्ति 2023-24 शैक्षणिक सत्र के दौरान जूनियर टीचर (स्कीमैटिक) के रूप में हुई थी।
नियमितीकरण का आदेश जारी होने के बाद स्कूल स्तर पर भी संबंधित प्रक्रिया शुरू होगी। शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति विवरण और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर उन्हें नियमित कैडर में शामिल किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमितीकरण का अर्थ पूर्व की संविदा सेवा को स्वत: नियमित सेवा में बदलना नहीं होगा। पुरानी सेवा अवधि का स्वरूप वही रहेगा, जिसमें शिक्षक स्कीमैटिक या संविदा आधार पर कार्यरत थे।
इसके कारण किसी शिक्षक को यह अधिकार नहीं होगा कि वह पूर्व सेवा अवधि के आधार पर दूसरे नियमित शिक्षकों की तुलना में वरिष्ठता का दावा करे।
राज्य सरकार के इस फैसले को शिक्षक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नियमित सेवा मिलने के बाद नौकरी की स्थिरता बढ़ेगी।
नियमित कैडर में शामिल होने के बाद शिक्षक सेवा नियमों के तहत वेतन, पदोन्नति और अन्य लाभों के पात्र होंगे, लेकिन इन लाभों की गणना नियमानुसार 1 जनवरी 2026 से की जाएगी।
जूनियर टीचर्स की नियुक्ति सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से की गई थी। प्रारंभ में इन्हें स्कीमैटिक व्यवस्था के तहत नियुक्त किया गया था।
ऐसी नियुक्तियों में सेवा की प्रकृति नियमित कैडर से अलग होती है और कर्मचारियों को सीमित सेवा लाभ मिलते हैं। अब नियमितीकरण के बाद इन शिक्षकों की स्थिति बदल जाएगी।
सरकार की ओर से जारी आदेश में सेवा अवधि को लेकर स्पष्टता इसलिए भी दी गई है, ताकि भविष्य में वरिष्ठता और अन्य लाभों को लेकर विवाद न हो।
यदि संविदा सेवा को भी नियमित सेवा में शामिल किया जाता तो विभिन्न बैचों और पहले से कार्यरत शिक्षकों के बीच वरिष्ठता को लेकर सवाल खड़े हो सकते थे।
इसी वजह से सरकार ने नियमितीकरण की एक निश्चित कटऑफ तारीख तय की है। 1 जनवरी 2026 से पहले की सेवा को अलग श्रेणी में रखते हुए उसके बाद की सेवा को नियमित माना जाएगा।
शिक्षकों के लिए यह फैसला नौकरी की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। नियमित शिक्षक बनने के बाद उनके सेवा रिकॉर्ड और करियर प्रगति को स्थायी ढांचे में शामिल किया जाएगा।
विद्यालयों में पढ़ाई की निरंतरता के लिए भी यह निर्णय अहम है, क्योंकि लंबे समय तक काम कर चुके शिक्षकों को सेवा में स्थिरता मिलने से स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
सरकार के फैसले के बाद शिक्षक संगठनों की ओर से आगे यह मांग भी उठ सकती है कि संविदा अवधि के कुछ लाभों को भी सेवा रिकॉर्ड में मान्यता दी जाए, हालांकि वर्तमान आदेश में इसकी अनुमति नहीं दी गई है।
आदेश में यह साफ किया गया है कि किसी भी शिक्षक को संविदा अवधि के आधार पर नियमित कैडर में पिछली तारीख से लाभ नहीं मिलेगा।
नियमितीकरण के बाद शिक्षकों की नियुक्ति लेवल-V(A) में होगी। इस स्तर पर नियुक्त शिक्षकों को निर्धारित वेतनमान और सेवा शर्तों के तहत काम करना होगा।
राज्य सरकार का उद्देश्य स्कूल शिक्षा व्यवस्था को स्थिर और व्यवस्थित बनाना है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों की नियुक्ति और नियमितीकरण की प्रक्रिया समय-समय पर की जाती रही है।
इस निर्णय का असर बड़ी संख्या में उन शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्होंने 2023-24 के दौरान जूनियर टीचर के रूप में सेवा शुरू की थी।
उनके लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि अब उनकी सेवा स्थायी ढांचे में आ जाएगी और भविष्य की पदोन्नति तथा अन्य सेवा लाभों का रास्ता खुलेगा।
हालांकि वरिष्ठता के मामले में उन्हें 1 जनवरी 2026 से ही गिना जाएगा।
इसका अर्थ है कि संविदा अवधि में काम करने वाले शिक्षकों को उस सेवा के लिए नियमित कैडर की वरिष्ठता नहीं मिलेगी।
शिक्षा विभाग अब संबंधित जिलों और स्कूलों को आदेश के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है।
सेवा पुस्तिका में भी नियमितीकरण की तिथि दर्ज की जाएगी और उसी आधार पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होगी।
सरकार के इस कदम से स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत जूनियर टीचर्स के बीच लंबे समय से बनी अनिश्चितता समाप्त होने की उम्मीद है।
नियमितीकरण के बाद शिक्षक अब स्थायी सेवा नियमों के तहत काम करेंगे और उनकी भूमिका असिस्टेंट टीचर के रूप में तय होगी।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नियमितीकरण का लाभ 1 जनवरी 2026 से लागू होगा और उससे पहले की सेवा संविदा मानी जाएगी।
इस फैसले के साथ सरकार ने सेवा संरचना को लेकर स्पष्ट सीमा तय कर दी है।
अब संबंधित शिक्षकों को नए कैडर में शामिल करने की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी और इसके बाद वे नियमित असिस्टेंट टीचर के रूप में अपनी सेवा जारी रखेंगे।





