
Odisha ओडिशा: तमिलनाडु में एक सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया गैस लीक होने की घटना में एक और 21 वर्षीय महिला मजदूर की मौत हो गई है। इस हादसे में मरने वाले ओडिया मजदूरों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई है। घटना के बाद से मृतकों के परिजनों में शोक का माहौल है और संबंधित क्षेत्र में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मृतक महिला की पहचान ओडिशा के क्योंझर जिले के हरिचंदनपुर ब्लॉक स्थित खराबा गांव की रहने वाली अंजलि जुआंग के रूप में हुई है। वह तमिलनाडु में स्थित सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में काम करती थीं। हादसे के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, कार्यस्थल पर मानकों और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के सामने आने के बाद ओडिशा और तमिलनाडु दोनों राज्यों के प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हो गए हैं।
इसी बीच इस पूरे मामले में अवैध भर्ती और फर्जी पहचान पत्रों के इस्तेमाल के आरोप भी सामने आए हैं। ओडिशा लेबर डिपार्टमेंट ने रंगामटिया गांव के लेबर कॉन्ट्रैक्टर श्रीकांत जुआंग के खिलाफ तेलकोई पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने फैक्ट्री में काम दिलाने के नाम पर नाबालिग लड़कियों को भी नौकरी दिलाई और इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
तेलकोई के असिस्टेंट लेबर ऑफिसर द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, कॉन्ट्रैक्टर ने अक्टूबर 2025 में मजदूरों को तमिलनाडु भेजने से पहले उन्हें अधिक वेतन और बेहतर काम के अवसर का झांसा दिया था। इस प्रक्रिया में कई नाबालिग लड़कियों को भी शामिल किया गया, जिन्हें कागजों में बालिग दिखाने के लिए आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक औद्योगिक दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और मानव तस्करी जैसे पहलू भी सामने आ रहे हैं। पुलिस और लेबर विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं कि कैसे ग्रामीण इलाकों से मजदूरों को झांसा देकर अन्य राज्यों में काम पर भेजा गया।
इस हादसे के बाद ओडिशा सरकार ने भी स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी है। मृतकों के परिवारों को सहायता देने और प्रभावित मजदूरों की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि प्रवासी मजदूरों के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली बनाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। उनका कहना है कि गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अक्सर बेहतर रोजगार के लालच में गलत एजेंटों के चंगुल में फंस जाते हैं।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।





