ओडिशा

10वीं की छात्रा को आपत्तिजनक मैसेज भेजने के आरोप में स्कूल शिक्षक गिरफ्तार

Kavita2
29 Sept 2026 11:40 AM IST
10वीं की छात्रा को आपत्तिजनक मैसेज भेजने के आरोप में स्कूल शिक्षक गिरफ्तार
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बलांगीर। ओडिशा के बलांगीर जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को 10वीं कक्षा की छात्रा को कथित तौर पर आपत्तिजनक संदेश भेजने और उसके साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मामला टिटलागढ़ ब्लॉक के सिंधेकेला थाना क्षेत्र के लिमपाडा स्थित एक सरकारी स्कूल का है। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी शिक्षक को हिरासत में लिया और आगे की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक आरोपी शिक्षक की पहचान बड़पात्रापाली गांव निवासी 28 वर्षीय टेकर सिंह माझी के रूप में हुई है। वह लिमपाडा के सरकारी स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत बताया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसने कुछ महीने पहले स्कूल में पढ़ने वाली 10वीं कक्षा की एक छात्रा को मोबाइल फोन के जरिए आपत्तिजनक संदेश भेजने शुरू किए थे।

छात्रा का आरोप है कि शिक्षक लगातार उससे फोन पर संपर्क करने की कोशिश करता था। उसने कई बार उसे कॉल किया और स्कूल की लाइब्रेरी में अकेले मिलने के लिए कहा। छात्रा ने शिक्षक के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और उससे अकेले मिलने से इनकार कर दिया।

शिकायत में आरोप है कि छात्रा के इनकार करने के बाद शिक्षक का व्यवहार और खराब हो गया। उसने कथित तौर पर छात्रा के साथ मारपीट की। इस घटना के बाद छात्रा डर गई और उसने शुरुआत में किसी को पूरे मामले की जानकारी नहीं दी।

बताया जा रहा है कि छात्रा लंबे समय तक भय के कारण चुप रही। उसे डर था कि शिकायत करने पर उसे स्कूल में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है या शिक्षक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकता है। बाद में उसने हिम्मत जुटाकर अपने परिवार के सदस्यों को घटनाक्रम की जानकारी दी।

परिवार को मामला पता चलने के बाद इसकी शिकायत पुलिस तक पहुंची। छात्रा के बयान और शिकायत के आधार पर सिंधेकेला पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अब छात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े सबूत जुटा रही है। इनमें मोबाइल फोन पर भेजे गए कथित संदेशों और कॉल रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। छात्रा और आरोपी के मोबाइल फोन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों के बीच कब और कितनी बार संपर्क हुआ।

जांच में स्कूल के अन्य कर्मचारियों और जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों से भी पूछताछ की जा सकती है। खास तौर पर लाइब्रेरी में बुलाने और कथित मारपीट से जुड़े घटनाक्रम की पुष्टि के लिए स्कूल परिसर में मौजूद लोगों से जानकारी जुटाई जा सकती है।

मामला स्कूल की छात्रा से जुड़ा होने के कारण पुलिस जांच में उसकी पहचान और गोपनीयता की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून के तहत पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इसी वजह से छात्रा के नाम या उसकी पहचान से जुड़ी कोई जानकारी सामने नहीं लाई गई है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी शिक्षक ने छात्रा को कितने समय से संदेश भेजने शुरू किए थे और उनके कथित संदेशों की प्रकृति क्या थी। मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि करने की कोशिश की जा रही है।

शिकायत में छात्रा ने आरोप लगाया है कि शिक्षक ने स्कूल की लाइब्रेरी में उसे अकेले मिलने के लिए बार-बार कहा था। उसके इनकार करने पर कथित मारपीट की गई। पुलिस घटनाक्रम की समयरेखा तैयार कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित संदेश भेजने, कॉल करने और मारपीट की घटनाएं कब-कब हुईं।

घटना सामने आने के बाद स्कूल में भी इस मामले को लेकर चर्चा है। एक शिक्षक पर अपने ही स्कूल की छात्रा के साथ इस तरह के व्यवहार का आरोप लगने से अभिभावकों में चिंता पैदा हुई है। स्कूल प्रशासन की ओर से आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

शिक्षा विभाग को भी इस मामले की जानकारी दी जा सकती है। यदि आरोपों की जांच में गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघन सामने आता है तो शिक्षक के निलंबन या अन्य विभागीय कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित शिक्षा अधिकारियों द्वारा जांच के आधार पर किया जाएगा।

पुलिस के लिए डिजिटल साक्ष्य इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कथित आपत्तिजनक संदेश यदि मोबाइल फोन या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भेजे गए हैं तो उनकी तकनीकी जांच कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भी भेजा जा सकता है।

छात्रा के बयान को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जाएगा। नाबालिग से जुड़े मामलों में बयान लेते समय संवेदनशील प्रक्रिया अपनाई जाती है। पुलिस यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी कि जांच के दौरान छात्रा को किसी अतिरिक्त मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।

आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि क्या इससे पहले भी उसके खिलाफ किसी छात्र या अन्य व्यक्ति ने इस तरह की शिकायत की थी। यदि कोई पुरानी शिकायत या समान घटना सामने आती है तो उसे भी मौजूदा जांच से जोड़ा जा सकता है।

फिलहाल आरोपी टेकर सिंह माझी पुलिस की गिरफ्त में है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। छात्रा द्वारा बताए गए कथित आपत्तिजनक संदेश, फोन कॉल, लाइब्रेरी में मिलने का दबाव और मारपीट से जुड़े आरोपों की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

मामले में आरोप अभी जांच के अधीन हैं और उनकी अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, छात्रा के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाकर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

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