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Odisha ओडिशा। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य की शिक्षा प्रणाली और संस्कार आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सरस्वती शिशु शिक्षा मंदिर एक आदर्श विद्यालय प्रणाली है, जिसका गठन भारत की सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि एक “शिक्षा का मंदिर” है, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गंजम जिले में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस्वती शिशु शिक्षा मंदिर की अवधारणा भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों में संस्कार, अनुशासन, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी होना चाहिए। इस दृष्टि से सरस्वती शिशु शिक्षा मंदिर देशभर में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरा है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि आज पूरे देश में बाल वाटिका जैसे प्री-प्राइमरी एजुकेशन सिस्टम को अपनाया जा रहा है, जिसकी जड़ें भी इसी शिक्षा पद्धति में दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चे के जीवन की नींव होती है और यदि इस स्तर पर संस्कारयुक्त और मूल्य आधारित शिक्षा दी जाए, तो भविष्य में एक सशक्त, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु शिक्षा मंदिर में शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर समान रूप से ध्यान दिया जाता है। योग, संस्कार शिक्षा, राष्ट्रगान, भारतीय परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़ी गतिविधियां बच्चों को जीवन के लिए तैयार करती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि इस शिक्षा प्रणाली से निकलने वाले विद्यार्थी समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ओडिशा सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और नवाचार के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाओं और शिक्षक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही पारंपरिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखते हुए आधुनिक शिक्षा प्रणाली को अपनाने की दिशा में भी सरकार प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरस्वती शिशु शिक्षा मंदिर आने वाले समय में और अधिक प्रगति करेगा और शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि “निश्चित रूप से यह शिक्षा मंदिर बहुत आगे बढ़ेगा और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षकों, छात्रों और प्रबंधन से भी संवाद किया और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसे शिक्षण संस्थान, जो शिक्षकों को सम्मान और बच्चों को सही संस्कार देते हैं, वे देश के भविष्य को मजबूत बनाते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान को शिक्षा और सांस्कृतिक संगठनों ने सकारात्मक रूप में लिया है। उनका मानना है कि यदि शिक्षा प्रणाली भारतीय मूल्यों के साथ आधुनिक जरूरतों का संतुलन बनाए, तो भारत वैश्विक स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
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