
संबलपुर। ओडिशा के संबलपुर जिले में हाल ही में शुरू किए गए डॉप्लर वेदर रडार स्टेशन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, जमादारपली में बनाए गए इस पांच मंजिला भवन के लिए अब तक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं लिया गया है। राज्य के तीसरे डॉप्लर वेदर रडार स्टेशन का उद्घाटन बुधवार को मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था।
यह मौसम निगरानी केंद्र करीब डेढ़ साल की अवधि में बनकर तैयार हुआ है। इसका उद्देश्य मौसम से जुड़ी सटीक जानकारी उपलब्ध कराना और विशेष रूप से बारिश, तूफान, चक्रवात जैसी मौसमी गतिविधियों की निगरानी को मजबूत करना है। हालांकि, उद्घाटन के बाद भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, इस भवन के लिए आवश्यक फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि न तो ओडिशा स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (OSDMA) और न ही निर्माण कार्य से जुड़े वर्क्स डिपार्टमेंट ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया था।
नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी या सार्वजनिक भवन के संचालन से पहले अग्नि सुरक्षा से जुड़े मानकों की जांच और प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है। इसमें भवन में आग बुझाने की व्यवस्था, आपातकालीन निकासी मार्ग, सुरक्षा उपकरण और अन्य आवश्यक इंतजामों का निरीक्षण किया जाता है।
डॉप्लर वेदर रडार स्टेशन एक महत्वपूर्ण मौसम संबंधी सुविधा है, जहां तकनीकी उपकरणों के साथ कर्मचारी भी काम करते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तकनीकी केंद्र में कर्मचारियों और उपकरणों की सुरक्षा के लिए सभी मानकों का पालन जरूरी है।
संबंधित विभागों की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। हालांकि, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट को लेकर उठे सवालों के बाद अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि भवन के संचालन से पहले जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जानी चाहिए थीं।
संबलपुर का यह डॉप्लर वेदर रडार स्टेशन ओडिशा में मौसम निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। राज्य में इससे पहले भी डॉप्लर रडार स्टेशन स्थापित किए गए हैं। नए स्टेशन से पश्चिमी ओडिशा समेत आसपास के क्षेत्रों में मौसम की निगरानी क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
मौसम विभाग के अनुसार, डॉप्लर रडार की मदद से बादलों की गतिविधियों, बारिश की तीव्रता, आंधी-तूफान और अन्य मौसमी घटनाओं का बेहतर पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। इससे आपदा प्रबंधन और समय रहते चेतावनी जारी करने में मदद मिलती है।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण परियोजना के भवन को लेकर सामने आई सुरक्षा संबंधी कमी ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि किसी भी सरकारी भवन को जनता या कर्मचारियों के उपयोग के लिए शुरू करने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच पूरी होनी चाहिए।
फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद अब संबंधित विभागों से जवाब की उम्मीद की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल डॉप्लर वेदर रडार स्टेशन मौसम निगरानी के उद्देश्य से महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में काम करेगा, लेकिन भवन की अग्नि सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के कारण इसकी व्यवस्था चर्चा में आ गई है। अब संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।





