ओडिशा

सलांदी नदी उफनी, भद्रक में बाढ़ का असर

Kavita2
28 July 2026 9:53 AM IST
सलांदी नदी उफनी, भद्रक में बाढ़ का असर
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भद्रक: ओडिशा के भद्रक जिले में इस मानसून की पहली बाढ़ ने दस्तक दे दी है। सलांदी नदी का जलस्तर बढ़ने से जिले के कई इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। नदी के उफान पर आने के कारण बड़ी मात्रा में कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कई ब्लॉकों में खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, सलांदी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद हदागढ़ बांध से पानी छोड़ा गया। बांध के गेट खोले जाने के बाद नदी में पानी का प्रवाह अचानक बढ़ गया, जिसके कारण निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। नदी का पानी आसपास के खेतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया, जिससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। जिले के कई हिस्सों में धान और अन्य फसलों के खेत पानी में डूब गए हैं। किसानों का कहना है कि लंबे समय की मेहनत के बाद तैयार हो रही फसलें बर्बाद होने का खतरा है। लगातार पानी भरे रहने से फसलों के सड़ने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

स्थानीय किसानों ने बताया कि इस मौसम में यह पहली बड़ी बाढ़ है, जिसने खेती को काफी नुकसान पहुंचाया है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में कई फीट तक पानी भर गया है। किसानों को अब प्रशासन से मदद और मुआवजे की उम्मीद है। उनका कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं उतरता है तो नुकसान और बढ़ सकता है।

भद्रक जिले के कई ब्लॉकों में बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखना शुरू कर दिया है। अधिकारियों की टीमें मौके पर जाकर जलस्तर, फसल नुकसान और लोगों की समस्याओं का आकलन कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, खासकर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने को कहा गया है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे तेज बहाव वाले पानी में जाने से बचें और किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन को दें।

मौसम विभाग के अनुसार, ओडिशा में मानसून के दौरान कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई है। बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र के प्रभाव से राज्य के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। पहाड़ी और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में अधिक बारिश होने के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

सलांदी नदी में पानी बढ़ने के कारण प्रशासन बांध और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार जल प्रबंधन के कदम उठाए जा रहे हैं। बांध से पानी छोड़ने के फैसले मौसम और जलस्तर की स्थिति को देखते हुए लिए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण केवल खेती ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर आवागमन में परेशानी हो रही है और लोगों को अपने जरूरी कामों के लिए अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ इलाकों में पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आने लगी है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो धान समेत कई फसलों को नुकसान हो सकता है। किसानों को राहत देने के लिए फसल नुकसान का सही आकलन और समय पर सहायता जरूरी है। प्रशासन की ओर से सर्वे के बाद ही वास्तविक नुकसान का पता चल पाएगा।

राज्य सरकार ने सभी प्रभावित जिलों के प्रशासन को आपदा की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। राहत सामग्री, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल भद्रक जिले में सलांदी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन कर रहा है और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए जल्द ही सर्वे शुरू किए जाने की संभावना है।

सलांदी नदी की पहली बाढ़ ने एक बार फिर ओडिशा में मानसून के दौरान आने वाली चुनौतियों को सामने ला दिया है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना और कृषि नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाना है।

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