ओडिशा

सालंदी नदी का तटबंध टूटा खेत जलमग्न

Kavita2
2 Sept 2026 11:53 AM IST
सालंदी नदी का तटबंध टूटा खेत जलमग्न
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भद्रक। ओडिशा के भद्रक जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। सालंदी नदी और उसकी सहायक नदी पर अलग-अलग स्थानों पर तटबंध टूटने से कई इलाकों में पानी फैल गया है। अब तक कुल आठ स्थानों पर तटबंध में कटाव या टूटने की सूचना सामने आई है। इनमें कुछ स्थानों पर कटाव छोटा है, जबकि कई जगह तटबंध का बड़ा हिस्सा टूट गया है। इसके कारण सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है और बड़े क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

लगातार बारिश और नदियों में बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंधों पर पानी का दबाव बढ़ने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ता है या कमजोर हिस्सों पर दबाव बना रहता है तो अन्य स्थानों पर भी कटाव हो सकता है।

आठ स्थानों पर तटबंध टूटने की सूचना

सालंदी नदी और उसकी सहायक नदी के किनारे अलग-अलग स्थानों पर कुल आठ जगह तटबंध टूटने की जानकारी मिली है। इन कटावों की वजह से नदी का पानी आसपास के निचले इलाकों और कृषि क्षेत्रों में पहुंच रहा है।

कई स्थानों पर तटबंध का हिस्सा टूटने के कारण पानी का बहाव तेज हो गया है। इससे खेतों में खड़ी फसल प्रभावित होने की आशंका है। लगातार पानी जमा रहने से कृषि भूमि को नुकसान बढ़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर तटबंधों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और कमजोर हिस्सों की पहचान की जा रही है।

बिलाना-लंजतारा में 150 फीट का कटाव

सबसे बड़ा कटाव तिहिडी ब्लॉक के बिलाना-लंजतारा क्षेत्र में सामने आया है। यहां तटबंध करीब 150 फीट तक टूट गया है। इतने बड़े हिस्से में तटबंध टूटने के कारण नदी का पानी तेजी से आसपास के इलाकों में फैलने की स्थिति बनी है।

यह क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित इलाकों में शामिल है। तटबंध के बड़े हिस्से में टूटने के बाद आसपास की कृषि भूमि पर पानी का दबाव बढ़ गया है।

प्रशासन के सामने अब इस हिस्से को सुरक्षित करने और पानी के बहाव को नियंत्रित करने की चुनौती है।

तालगोपबिंधा में भी बड़ा कटाव

तालगोपबिंधा के पास भी तटबंध में 100 फीट से अधिक लंबा कटाव दर्ज किया गया है। यहां भी नदी का पानी तटबंध के कमजोर हिस्से से बाहर निकलकर आसपास के क्षेत्रों में फैल रहा है।

बिलाना-लंजतारा और तालगोपबिंधा के अलावा कई अन्य स्थानों पर भी 50 फीट से अधिक के कटाव की जानकारी सामने आई है।

छोटे-बड़े सभी कटावों को मिलाकर नदी के किनारे तटबंधों की स्थिति चिंताजनक हो गई है।

सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न

तटबंध टूटने का सबसे सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। नदी का पानी खेतों में पहुंचने के कारण सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है।

किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। यदि जलभराव बना रहता है तो कृषि गतिविधियां भी प्रभावित होंगी।

कई इलाकों में पहले से बारिश और बाढ़ के कारण स्थिति खराब है। ऐसे में तटबंध टूटने से समस्या और बढ़ गई है।

लगातार बारिश से बढ़ा दबाव

भद्रक जिले में बाढ़ की स्थिति के पीछे लगातार बारिश और नदियों में बढ़ता जलस्तर प्रमुख कारणों में शामिल है। जलस्तर बढ़ने के साथ नदी का दबाव तटबंधों पर भी बढ़ जाता है।

कमजोर और पुराने हिस्सों में तेज बहाव के कारण मिट्टी का कटाव शुरू हो सकता है। धीरे-धीरे यह कटाव बड़ा होकर तटबंध टूटने का कारण बनता है।

सालंदी नदी और उसकी सहायक नदी के किनारे सामने आए आठ कटाव इसी तरह की स्थिति की ओर संकेत करते हैं।

अन्य इलाकों में भी खतरा

एक स्थान पर तटबंध टूटने के बाद आसपास के दूसरे कमजोर हिस्सों पर भी खतरा बढ़ जाता है। पानी के बहाव का दबाव बदलने से अन्य हिस्सों में कटाव तेज हो सकता है।

इसी वजह से नदी के किनारे बसे इलाकों में लगातार निगरानी जरूरी है। प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती यह है कि कमजोर हिस्सों की पहचान कर समय रहते उन्हें मजबूत किया जाए।

यदि बारिश जारी रहती है तो तटबंधों की स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी रह सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी चिंता

तटबंध टूटने से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। कृषि भूमि में पानी भरने के साथ ग्रामीण रास्तों और निचले क्षेत्रों में भी जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है।

बाढ़ की स्थिति में स्थानीय लोगों के लिए आवागमन प्रभावित होना भी एक बड़ी समस्या बन जाती है। यदि पानी का स्तर बढ़ता है तो राहत और बचाव कार्यों की जरूरत भी बढ़ सकती है।

फिलहाल प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

तटबंधों की मरम्मत बड़ी चुनौती

तटबंध टूटने के बाद तत्काल मरम्मत करना जरूरी होता है, ताकि नदी का पानी और अधिक क्षेत्र में न फैल सके। लेकिन तेज बारिश और लगातार जलप्रवाह के बीच मरम्मत कार्य करना भी चुनौतीपूर्ण होता है।

प्रशासन को पहले पानी के दबाव और बहाव की स्थिति का आकलन करना पड़ता है। इसके बाद प्रभावित हिस्से को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।

बिलाना-लंजतारा में 150 फीट और तालगोपबिंधा में 100 फीट से अधिक कटाव के कारण मरम्मत का काम बड़े स्तर पर करना पड़ सकता है।

किसानों को नुकसान की आशंका

सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि में पानी भरने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है। फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रहने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

बाढ़ की स्थिति सामान्य होने के बाद प्रभावित कृषि क्षेत्र का सर्वे कराया जाना महत्वपूर्ण होगा। इससे नुकसान का आकलन करने और किसानों को संभावित राहत उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

हालांकि फिलहाल प्राथमिकता पानी के बहाव को नियंत्रित करने और प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को संभालने की है।

जलस्तर पर बनी रहेगी नजर

नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच प्रशासन के लिए लगातार निगरानी जरूरी है। यदि जलस्तर कम होता है तो तटबंधों पर दबाव भी घट सकता है। लेकिन बारिश जारी रहने की स्थिति में नए कटाव का खतरा बना रह सकता है।

सालंदी नदी और उसकी सहायक नदी के किनारे पहले से सामने आए कमजोर हिस्सों की निगरानी करना इसलिए भी जरूरी है, ताकि किसी नए बड़े टूटाव को समय रहते रोका जा सके।

बाढ़ ने बढ़ाई प्रशासन की चुनौती

भद्रक में आठ स्थानों पर तटबंध टूटने की खबर ने बाढ़ की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। सबसे बड़ा कटाव तिहिडी ब्लॉक के बिलाना-लंजतारा क्षेत्र में करीब 150 फीट का है। तालगोपबिंधा के पास 100 फीट से अधिक लंबा कटाव सामने आया है, जबकि कई अन्य स्थानों पर 50 फीट से अधिक के कटाव की जानकारी है।

इन टूटावों से सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते दबाव के बीच अब प्रशासन के सामने तटबंधों को सुरक्षित करने, पानी के बहाव को नियंत्रित करने और प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों को राहत देने की बड़ी चुनौती है।

फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आगे की स्थिति नदी के जलस्तर तथा बारिश पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

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